हम जब भी अंडरवर्ल्ड की बात करते हैं, तो (so) हमारे दिमाग में सिर्फ खून खराबा, बंदूक, गोली जैसी बातें आती है। यह हिंदुस्तान का इकलौता (only) ऐसा डॉन है जिसने ना कभी गोली चलाई ना कभी चाकू उठाया ना किसी को मारा। यहां तक कि उसने किसी को भी अपने हाथ से कोई नुकसान (loss) ही नहीं पहुंचाया। आज हम Mumbai के Don Haji Mastan की बात करने वाले है।

दूसरा यह कि करीब उसने 20 साल तक मुंबई पर राज किया। इन 20 सालों में उस पर एक भी क़त्ल का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। उसने कोई (someone) मर्डर ही नहीं किया। तीसरी बात यह है कि उसका दबदबा इतना था एक बार जब वह गिरफ्तार किया गया। उस वक्त देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी। उसने बाकायदा दिल्ली इंदिरा गांधी के पास प्रधानमंत्री के ऑफिस तक मैसेज पहुंचाया था। वह जितना कहेंगे उतना पैसा उनको मिल जाएगा। इसके बदले वह उनको जेल से बाहर निकाल दे। हालांकि (although) उनकी यह बात नहीं मानी गई।

हाजी मस्तान के बारे में मुंबई पुलिस की राय-

कई (many) पुलिस वाले तो इस बात को भी कहते हैं। अगर मुंबई से अंडरवर्ल्ड खत्म ना हो यहां तक कि पुलिस भी उसको खत्म ना कर पाए। उनकी चाहत यह है, की अंडरवर्ल्ड Haji Mastan के दौर का हो। उसमें एक वजह (reason) यह थी कि उस वक्त जो भी काम हुआ करता था वह लिमिट में होता था। उससे  (thereby) आम आदमी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता था। वहां खून खराबा भी नहीं हुआ करता था। हाजी मस्तान की एक खासियत थी। यहां तक कि एक नसीहत थी। अगर (If) गलत काम भी करो तो उसमें किसी आम आदमी को ना घसीटो। जिसका उससे कोई लेना-देना नहीं हो और ना ही किसी को तंग करो, ना किसी को परेशान करो।

Haji Mastan के दौर में और भी डॉन हुआ करते थे। जिनमें से Karim Lala और वर्धराजन भी शामिल थे। जो हाजी मस्तान के साथ ही मिलकर काम किया करते थे।  यह तीनों डॉन अपने अपने अलग-अलग इलाकों में काम कर रहे थे। किसी में कोई मतभेद भी नहीं था। इनमें कभी लड़ाई भी नहीं हुई। उस वक्त Karim Lala और वृद्धा राजन के शराब के अड्डे और जुए अड्डे चला करते थे। मगर हाजी मस्तान का स्मगलिंग का धंधा था। जिसमें वह गोल्ड इलेक्ट्रॉनिक की चीजें वगैरह की स्मगलिंग किया करता था। जिससे जनता को नुकसान पहुंचे जैसे ड्रक्स और हथियार वह इन चीजों की स्मगलिंग नहीं किया करता था।

हाजी मस्तान की पैदाइश-

आज की कहानी मुंबई के डॉन Haji Mastan की है । जिसका जन्म तमिलनाडु के बनाई कुला जो तमिलनाडु में एक गांव है । वहां पर 1 मार्च 1926 को हाजी मस्तान का जन्म हुआ था । हाजी मस्तान का असली नाम मस्तान हैदर था । वह एक गरीब परिवार में था उसका बाप किसान था पर जमीन इतनी नहीं थी कि जिससे खेती-बाड़ी करके पूरा परिवार पाला जा सके । कई-कई बार ऐसा हुआ करता था कि दो-दो दिन तक घर में खाना नहीं बना करता था ।

हाजी मस्तान के पिता जिस वक्त हाजी मस्तान 8 साल का था, उसको लेकर मुंबई आ जाते हैं, सोचते हैं कि शहर में जाकर कुछ काम करेंगे तो घर की हालत सुधरेगी । मुंबई आने के बाद हाजी मस्तान के वालिद एक साइकिल रिपेयरिंग की दुकान खोल लेते हैं । वहीं पर मस्तान हैदर मिर्जा उसी दुकान पर काम करने लगा ।

वहां पर एक साइकिल मैकेनिक के तौर पर वहां काम करने लगा । धीरे-धीरे वक्त बीत गया पर आमदनी उतनी नहीं हो रही थी । हाजी मस्तान की उम्र अब 18 साल हो चुकी थी । वह इस वक्त भी साइकिल की दुकान पर ही काम कर रहा था ।वहाँ पर जिस सड़क के किनारे यह दुकान थी किरा फोर्ट मार्केट है मुंबई में  वहां पर अक्सर कई बार दिन भर में कई महंगी गाड़ियां गुजरा करती थी तो अक्सर हाजी मस्तान उन गाड़ियों को बहुत हसरत भरी नजरों से देखा करता था । वह यही सोचा करता था कि 1 दिन मेरे पास भी ऐसी गाड़ी होगी और जो यह मकान बने हुए हैं इस तरह का मेरा भी एक बंगला होगा।

haji mastan
Haji Mastan

Smuggling की शुरुआत-

लेकिन कमाई उतनी हो नहीं रही थी और 10 साल बीत चुके थे इसी दौरान साइकिल की दुकान पर काम करते हुए कुछ लोगों से उसकी दोस्ती हो जाती है। उनमें से कुछ ने राय दी कि तू यहां पर जितने पैसे कमाता है। इससे अच्छा तो तू बंदरगाह पर जाकर कुली बन जा वहां पर तो इससे अच्छे पैसे कमा लेगा। पहली बार दोस्तों के कहने पर मस्तान हैदर मिर्जा अपने वालिद के साथ यह काम छोड़कर बंदरगाह पर चला जाता है। वहां पर कुली बन जाता है और वहां पर कुली का काम शुरू कर देता है।

वहीं पर उसकी एक लड़के से और दोस्ती हो जाती है, क्योंकि (Because) वह लड़का देखता है कि मस्तान हैदर काफी तेज है तो वह कहता है कि तू कुछ पैसे कमाना चाहेगा तो मस्तान पूछता है, कि कैसे तो उसने बताया कि यहां पर बहुत सारी चीजें स्मगलिंग से आती है। तुझे अपने कपड़ों में छुपा कर उसे बाहर तक पहुंचाना है क्योंकि (Because)  वहां पर कस्टम वाले होते हैं और तुझे बंदरगाह से सामान बाहर पहुंचाना है तो उसने कहा ठीक है। उस वक्त स्मगलिंग में सिर्फ सोना चांदी और इलेक्ट्रॉनिक की चीजें जो बाहर से आया करती थी और घड़ी की स्मगलिंग हुआ करती थी।

Don Haji Mastan ने इस तरह जो बाहर से सामान आया करता था-

हाजी मस्तान ने इस तरह (This way) जो बाहर से सामान आया करता था उसको बंदरगाह से बाहर निकालना शुरू कर दिया ।  इससे उसे काफी आमदनी होने लगी इसी बीच काम करते हुए बंदरगाह पर क्योंकि पानी के जहाज से काफी लोग आया करते थे तो उसे एक अरब दोस्त मिला और उसका नाम शेख मुहम्मद अल गालिब था वह जो शेख मुहम्मद अल गालिब था। गोल्ड स्मंगलिंग का काम किया करता था तो इत्तेफाक से हैदर मिर्जा मस्तान से उसकी मुलाकात होती है। वह उसे अपने साथ काम करने के ऑफर देता है। हाजी मस्तान मान जाता है, और इसके बाद यह स्मगलिंग का काम उसके साथ शुरू कर देता है।

शेख मुहम्मद अल गालिब की गिरफ्तारी और रिहाई-

एक ऐसी ही खेप में शेख मोहम्मद अल गालिब सोना लेकर बंदरगाह पर पहुंचता है, और उसे यह सोना हाजी मस्तान को देना था। मगर कोई कस्टम ऑफिसर को मुखबरी (Informant) कर देता है, तो शेख मुहम्मद अल गालिब को पकड़ लिया गया मगर तब तक उसने काफी सोना हाजी मस्तान को दे दिया था । इसके बाद शेख मोहम्मद अल गालिब को 3 साल की सजा हो जाती है। वह 3 साल जेल में बिताता है। 3 साल जेल में बिताने के बाद जब वह बाहर आता है। वह उसी बंदरगाह पर पहुंचता है। उसके बाद वह हाजी मस्तान से मिलता है। वहां पर मिलने के बाद हाजी मस्तान उसको अपने घर पर ले जाता है।

वहां पर ले जाकर उसको वह जो सोने का बॉक्स था वह उसको दिखाता है। वह ऐसा का ऐसा ही बॉक्स रखा हुआ था जैसा उसे मिला था। यह देखकर शेख मुहम्मद अल ग़ालिब खुश हो जाता है और उसमें से आधा सोना हाजी मस्तान को दे देता है और मिर्जा की जिंदगी यहीं से पलट जाती है। वह काफी अमीर हो जाता है। अब उसको इसके सारे गुण मालूम हो गए थे, कि स्मगलिंग का काम कैसे होता है, तो अब धीरे-धीरे यह सारी चीजें होती गई और स्मगलिंग में हाजी मस्तान का नाम बढ़ता चला गया अब मिर्जा को अपने शौक पूरे करने की बारी आई।

Don Haji Mastan के शौक और प्यार-

क्योंकि उसे लंबी लंबी गाड़ियों का शौक था तो उसने सबसे पहले मर्सिडीज गाड़ी खरीदी और एक अच्छे से एरिया में उसने एक बंगला लिया। फिल्मों का वह काफी बड़ा शौकीन था तो बॉलीवुड में उस वक्त जितने भी स्टार थे उनके साथ बैठना, उठना और उनके साथ फोटो खिंचवाने का शौक पूरा करने लगा। इस स्मगलिंग के सफर में इसने इतने पैसे कमा लिए थे वह एक तरीके से डॉन बन चुका था।

उसे हमेशा सफेद कपड़े पहनने का शौक था तो वह हमेशा सफेद कपड़े पहन के रखता था। सिगरेट और सिंगार पीने का शौकीन था और सिगरेट भी 555 कि पिया करता था। क्योंकि फिल्म इंडस्ट्रीज से काफी लगाव था तो उसने जब मधुबाला को पहली बार देखा तो उसको उससे प्यार हो गया। वह से शादी करना चाहता था और यह बात कहीं ना कहीं मधुबाला तक भी पहुंच गई थी।

उसे मालूम था कि ऐसा हो नहीं पाएगा तो वह प्यार एक तरफा ही था। मधुबाला ने कभी हाजी मस्तान से प्यार नहीं किया। इसी बीच बॉलीवुड में उसे एक लड़की दिखाई दी जिसका नाम सोना था उसकी शक्ल मधुबाला से काफी मिला करती थी तो उसे लगा कि मधुबाला ना सही पर मधुबाला की हमशक्ल ही सही तो फिर उसको सोना से प्यार हो गया तो उसने सोना की कई फिल्मों में पैसा भी लगाया उसको प्रमोट करने की कोशिश की मगर सोना फिल्मों में चली नहीं आखिर (finally) में लेकिन हाजी मस्तान ने सोना से शादी कर ली।

हाजी मस्तान का चढ़ाव-

इस दौरान में हाजी मस्तान का कद और शोहरत लगातार बढ़ता जा रहा था और बिना गोली चलाएं बिना लड़े वह एक तरह से मुंबई का डॉन हो चुका था। इस बीच वृद्धा राजन भी साउथ वापस लौट गया और करीम लाला का धंधा भी सिमटने लगा कुछ नया गैंग आ गए जैसे दाऊद इब्राहिम और पठान यह जो अभी थे हाजी मस्तान के चेले ही थे। क्योंकि हाजी मस्तान ने इन सब को बताया कि स्मगलिंग कैसे होती है और बगैर किसी भेदभाव के हाजी मस्तान की बात को मानना होता था।

क्योंकि हाजी मस्तान को यह सब अपना गुरु माना करते थे। इस दौरान में हाजी मस्तान कभी गिरफ्तार भी नहीं हुआ। Because वह हमेशा पुलिस और कस्टम अधिकारी को बहुत महंगे तोहफे दिया करता था। उनको खरीद लिया करता था। जो कस्टम अधिकारी और पुलिस वाले नहीं बिका करते थे। वह उनका ट्रांसफर करा दिया करता था । उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक चली गई थी।

एक अधकारी के बारे में हाजी मस्तान की सोच-

मुंबई पुलिस ने इस बारे में एक बात बताई थी। एक कस्टम अधिकारी जो Don Haji Mastan को काफी परेशान कर रहा था। यह करीब 1974 की बात है। वह किसी भी तरीके से हाजी मस्तान के सामान को पकड़ लिया करता था। हाजी मस्तान को बहुत नुकसान हो रहा था। हाजी मस्तान ने उसे खरीदने की कोशिश की वह काफी ईमानदार था। वह नहीं बिका। बाद में हाजी मस्तान ने राजनीति में अपना संपर्क किया और उस अधिकारी का वहां से तबादला करा दिया।  जब उसका तबादला हुआ और वह अधिकारी एयरपोर्ट से अपने घर जा रहा था।

ट्रांसफर का पेपर उसे 1 दिन पहले मिल गया था। उसने सोचा कि नई जगह जॉइनिंग करने से पहले घर होकर आ जाता हूं। वह एयरपोर्ट गया और फ्लाइट में बैठ गया। जब वह फ्लाइट में बैठा इतने में हाजी मस्तान एयरपोर्ट पर उस फ्लाइट में जाता है और उस अधिकारी से ऑल द बेस्ट कहता है। जबकि (while) हाजी मस्तान पर इंग्लिश नहीं आती थी। जो कोई भी हाजी मस्तान से इंग्लिश में बातें किया करता था। वह सबको या-या में जवाब दिया करता था और उस अधिकारी से भविष्य के लिए विश किया और हाथ मिला कर वापस आ गया।

Don Haji Mastan की गिरफ्तारी-

उसके बाद (After that) 1974 में एक महाराष्ट्र के मंत्री के दबाव (Pressure) में दिल्ली में धरने पर बैठ जाते हैं। Don Haji Mastan की गिरफ्तारी की मांग करते हैं। जिसके बाद दबाव में आकर महाराष्ट्र पुलिस से कहा जाता है कि हाजी मस्तान की गिरफ्तार किया जाए। हाजी मस्तान को गिरफ्तार किया जाता है, मगर (But) उसको जेल नहीं ले जाया गया। बल्कि उसको एक कोल्हापुर में गेस्ट हाउस में रखा गया। वहां पर हर ऐसो आराम की चीजें मुहैया कराई गई। दो पुलिस अफसर बाकायदा ड्यूटी पर थे। अभी तक हाजी मस्तान जेल नहीं गया था। अब जो गिरफ्तारी हुई थी।उस में भी गेस्ट हाउस में ही रखा गया था।

लेकिन (But) इसके 1 साल बाद ही इधर (here) देश में इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी (Emergency) लगा देती है, तो सभी नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हो जाती है। इंदिरा गांधी ने भी तब तक हाजी मस्तान के बारे में काफी सुना हुआ था। उस वक्त मुंबई में भी नेता की गिरफ्तारी शुरू हो गई थी। हाजी मस्तान गायब हो गया था। मगर पुलिस उसको ढूंढ लेती है और हाजी मस्तान को गिरफ्तार कर लिया जाता है।

इसके बाद उसको जेल में डाल दिया जाता है और मिर्जा ने इंदिरा गांधी तक मैसेज भेजा कि आप मुझे रिहा करवा दे और बदले में जितना पैसा चाहोगी मैं आपको दे दूंगा लेकिन इंदिरा गांधी ने मना कर दिया जेल जाने के बाद पहली बार Don Haji Mastan की मुलाकात जयप्रकाश नारायण से होती है, और कहते हैं कि इस जेल में हाजी मस्तान करीब 18 महीने बंद रहा और इन्हीं 18 महीने ने मिर्जा मस्तान को बदल दिया और बदलने की सबसे बड़ी वजह थी जयप्रकाश नारायण।

Don Haji Mastan का शियासत में कदम-

वहां पर जेपी नारायण ने कसम दिलाई थी कि तुम अब कोई भी ऐसा काम नहीं करोगे जो देश के खिलाफ हो। मस्तान मिर्जा ने भी  यह कसम खाई थी कि अब मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा। 18 महीने जेल में बिताने के बाद हाजी मस्तान बाहर आया। इस दौरान जब चुनाव हुए तो इंदिरा गांधी उस चुनाव में हार गई। जनता पार्टी की जीत हुई।   जनता की सरकार आने के बाद तकरीबन 40 कैदियों को रिहा किया गया।

जिनमें हाजी मस्तान भी शामिल था। क्योंकि उसने कोई ऐसा क्राइम तो किया नहीं था। बल्कि इमरजेंसी के दौरान कई नेताओं की मदद की थी। इसके बाद 1980 में हाजी मस्तान हज करने के लिए चला जाता है। हज करने के बाद मस्तान हैदर मिर्जा का नाम बदल जाता है। लोग उसे Haji Mastan कहना शुरू कर देते हैं। वह हज कर कोई आ चुका था। हज से वापस आने के बाद हाजी मस्तान एक राजनीतिक पार्टी का गठन करते हैं। महाराष्ट्र में उस वक्त एक दलित नेता थे। जिनका जोगेंदर कावड़े था इन्होंने उसी के साथ मिलकर पार्टी बनाई थी।

1984 में यह एक पार्टी दलित मुस्लिम सुरक्षा महासंघ के नाम से एक पार्टी का गठन करते हैं। लेकिन 1990 में इसका नाम बदलकर भारतीय अल्पसंख्यक महासंघ कर दिया जाता है। कई जगह पर निकाय वगैरह के चुनाव भी लड़ते हैं। इस पार्टी के प्रचार में दिलीप कुमार ने काफी मदद की थी। वह कई रैलियों में प्रचार के दौरान गए भी थे।  हालांकि कहते हैं कि पार्टी बनाने के बाद हाजी मस्तान को बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। मगर इन चुनाव के दौरान काले धन की काफी खपत हो गई थी। लोग कहते हैं कि उसी वक्त से चुनाव में काले धन का इस्तेमाल होना शुरू हुआ।

Don Haji Mastan के काम करने के नियम-

इस बीच दाऊद इब्राहिम लगातार हाजी मस्तान के लिए काम कर रहा था। यह जो अरुण गवली हो या छोटा राजन यह सारे उभर कर आ रहे थे। हाजी मस्तान के उत्तराधिकारी के तौर पर दाऊद इब्राहिम का नाम था।  हाजी मस्तान के बाद वही उसकी जगह लेगा। लेकिन हाजी मस्तान के दो तीन नियम थे।

  1. उसमें ड्रग्स  नहीं होगा।
  2. उस में शराब नहीं होगी।
  3. उसमें हथियार नहीं होंगे।

जब तक हाजी मस्तान पावरफुल थे जब तक यह नियम चलते रहे। हाजी मस्तान ने दाऊद इब्राहिम को एक नसीहत भी की थी। पुलिस जब तक तुम्हारे पीछे नहीं पड़ेगी जब तक के तुम आम आदमी को इस काम में ना घसीटो। अगर तुम अपना काम करते रहे तो तुम्हें पुलिस कभी भी नहीं छुएगी।

एक नियम था कि जो भी गलत काम करना हो वह रात को 9:00 बजे से लेकर सुबह के 5:00 बजे तक करना है। क्योंकि सुबह के 5:00 बजे के बाद आम आदमी बाहर आ जाते हैं। जब तुम यह करोगे तो तुम आम आदमी के बीच में नहीं आओगे और जब तुम आम आदमी के बीच में नहीं आओगे तो पुलिस तुम्हारे बीच में नहीं आएगी। लेकिन धीरे-धीरे राजनीति में आने के बाद हाजी मस्तान की पकड़ ढीली होती चली गई। उधर दाऊद इब्राहिम का कद बढ़ता चला गया। दाऊद इब्राहिम ने फिर हाजी मस्तान का गैंग ही छोड़ दिया। वह अपना खुद का गैंग चलाने लगा।

दाऊद इब्राहिम फिर व सारे काम करने लगा जो हाजी मस्तान ने उसे मना किए थे

  • ड्रग्स की स्मगलिंग।
  • शराब।
  • हथियार।
  •  यहां तक कि बॉलीवुड से पैसा भी वसूल करने लगा।

हाजी मस्तान के ऊपर बनाई गयी फिल्म-

अंडरवर्ल्ड बदलता चला गया। इसके बाद हाजी मस्तान के ऊपर एक फिल्म बनाने की राय पेश की गई। इस फिल्म की कहानी सलीम जावेद साहब ने लिखी। जिसका करैक्टर अमिताभ बच्चन ने किया। इस फिल्म का नाम दीवार था। हाजी मस्तान के जिंदगी के करैक्टर को समझने के लिए सलीम खान और अमिताभ बच्चन कई-कई बार उनके घर पर जाकर काफी वक्त बिताया करते थे। ताकि उनके इस कैरेक्टर को समझा जा सके। यह फिल्म काफी सुपरहिट हुई थी। इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन की जिंदगी बदल कर रख दी थी। इसके बाद हाजी मस्तान के ऊपर एक और फिल्म आई जिसका नाम वंस अपॉन ए टाइम था। इसमें अजय देवगन ने हाजी मस्तान का रोल किया था।

हाजी मस्तान की मौत-

1994 में हाजी मस्तान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई और वह आखिरी वक्त उसने अपने परिवार के साथ ही बिताए थे और इसी के साथ करीम लाला और वृद्धा राजन भी चल बसे थे हाजी मस्तान के परिवार में अभी दो बेटी और उसका एक गोद लिया हुआ बेटा है क्योंकि इसका कोई बेटा नहीं था तो उसने एक लड़के को गोद ले लिया था उसका नाम सुंदर है

2 Replies to “Haji Mastan, Mumbai के DON की पूरी कहानी, जिसने कभी गोली नहीं चलाई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *