एक ऐसी कहानी जिसे लोग World Biggest Bank Robbery के नाम से जानते है। मगर हकीकत कुछ और ही है। बैंक में इतने रुपए थे। उन के लिए तीन बड़े-बड़े ट्रक को वह अपने साथ लेकर गए थे। करीब 5 घंटे बैंक के अंदर से रुपए निकालने और ट्रक में लोड करने में लगते हैं। 5 घंटे के बाद पता चलता है। इस बैंक से करीब 8 हजार करोड़ रुपए निकले है।

यह कहानी इराक की है। इराक की राजधानी बगदाद की यह कहानी है। सन 2000 के बाद इराक में उथल-पुथल शुरू हो चुका था। परमाणु बम और जैविक हथियार को लेकर अमेरिका लगातार इराक पर दबाव डाल रहा था। हालांकि असल खेल तेल का था। अमेरिका चाहता था कि सद्दाम हुसैन उसकी बात माने। मगर सद्दाम हुसैन अमेरिका की शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं था। इन चीजों को लेकर अमेरिका और इराक में ठन गई थी। अमेरिका का इल्जाम था। इराक परमाणु बम बना रहा है। इसको लेकर बड़े दबाव थे। कई बार तलाशी हुई मगर इराक के पास से कभी कोई परमाणु बम नहीं मिला। मगर उसी की आड़ में अमेरिका ने इराक पर हमला करने का फैसला कर लिया था।

यह बात 2003 की है। इससे पहले इराक में जो मॉनिटरिंग सिस्टम था। यानी बैंक का जितना भी सिस्टम था। वह ब्रिटिश से जुड़ा हुआ था। उन्हीं के जरिए सब कुछ चला करता था। मगर बाद मे इराक का अपना बैंक सिस्टम बना। यह सिस्टम सद्दाम हुसैन के आने के बाद बना था। उसकी नई तरीके से सभी चीजें की गई।

इसके बाद इराकी सरकार के अंडर में वहां के बैंक आ गए। उन्हीं में से एक सेंट्रल बैंक ऑफ इराक जो इराक की सरकार का मैन बैंक था। यह सेंट्रल बैंक ऑफ इराक की कहानी है। सद्दाम हुसैन का अहसास था। अमेरिका उस पर हमला जरूर करेगा। इसीलिए दोनों मुल्कों में अपनी-अपनी तैयारियां चल रही थी।

सद्दाम हुसैन को इस बात का भी अहसास था। अगर हमला होता है। मगर उस वक्त तक यह अहसास नहीं था। किस तरीके का हमला हो सकता है। सद्दाम हुसैन ने सोचा कि अगर इराक की अमेरिका के साथ लड़ाई होती है। जो इराक का पैसा है। वह किसी महफूज जगह पर रखा जाए। लेकिन यह दूसरी बात है।

world biggest bank robbery
Qusay Saddam Hussein

असल में कहानी 18 मार्च 2003 को शुरू होती है।  18 मार्च की सुबह ठीक 4:00 बजे सद्दाम हुसैन का बेटा। जिसका नाम Qusay Hussein था। वहां का डिफेंस जनरल था। उसका हेड भी था। सद्दाम के दो बेटे थे। जिनमें से एक Qusay Hussein था। 18 मार्च की सुबह 4:00 बजे सद्दाम हुसैन के पर्सनल सेक्रेटरी आबिद आबिद महमूद के साथ अपने घर से निकलता है। वह सेंट्रल बैंक ऑफ इराक जाने के लिए निकलता है।

जिसका मुख्यालय बगदाद में था। जिसका तमाम खजाना बगदाद में ही था। सेंट्रल बैंक की एक खासियत थी। जहां पर तमाम पैसे रखे हुए थे। इसकी बिल्डिंग क्यूब की तरह बनी हुई थी। इस पूरी बिल्डिंग में कोई भी खिड़की नहीं थी। इस पूरी बिल्डिंग में कोई दूसरा दरवाजा नहीं था। इस बैंक में अंदर जाने और बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था। इसका मतलब यह था कि अगर कोई इस पर हमला करता है। उसका वहां से निकलना लगभग नामुमकिन था। लेकिन 18 मार्च 2003 की सुबह वहां पर Qusay Saddam Hussein पहुंचते हैं।

साथ में सद्दाम हुसैन का पर्सनल सेक्रेटरी था। इसके बाद उस बैंक के अंदर सिर्फ तीन लोग और थे। जिनमें से एक सेंट्रल बैंक ऑफ इराक के डायरेक्टर थे। एक इराक के फाइनेंस मिनिस्टर थे। एक इराकी खजाने के डायरेक्टर थे। कुल मिलाकर यह पांच लोग थे। बैंक में जाने के बाद जो सद्दाम हुसैन का P.A. था। वह डायरेक्टर को एक खत देता है। जिसमें सिर्फ दो लाइन लिखी हुई थी। वो लाइने यह थी। इस बैंक में जो पैसे हैं। उसको किसी दूसरे महफूज ठिकाने पर लेकर जाना है। ये नेशनल सिक्योरिटी का इशू है। बस यही दो लाइनें थी।

सेंट्रल बैंक ऑफ इराक के Head ने इस पर्चे को पढ़ा। पढ़ने के बाद कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचाता। वह इस लिए कि क्योंकि बैंक हुक्मरान ही जब दस्तखत करके भेज रहा है। अब उनके पास कोई रास्ता ही नहीं बचा था।

इसके बाद देखा गया। Qusay Hussein जब बैंक के अंदर पहुंचे। उनके साथ तीन बड़े-बड़े ट्रक भी आए थे। उन तीन ट्रकों में तीनों ड्राइवर थे। इसके अलावा और कोई नहीं था।

इसके बाद बैंक के स्टाफ से कहा गया। जितनी जल्दी हो सके सभी पैसे निकाल ले। इसके बाद बैग में भर-भर कर पैसे निकालने शुरू कर दिए। जो पैसे बैंक के अंदर से एक-एक करके ट्रक में डालने शुरू कर दिए। रकम इतनी ज्यादा थी करीब 5 घंटे लगे थे। पैसों को ट्रक में लोड करने में। जब ट्रक में पैसे रखने की जगह नहीं बची। काफी पैसे बैंक में ही छोड़ने पड़े थे। Qusay Hussein पैसे लेकर निकल जाता है।

वहां से पैसा निकालने के कुछ घंटों बाद अमेरिका का पहला मिसाइल बगदाद पर गिरता है। जंग शुरू हो जाती है। अमेरिका की फौज जब तक इराक में पहुंचती है। जो सद्दाम हुसैन के दुश्मन थे। उनके जरिए अमेरिका को पता चलता है। जो इराक का सेंट्रल बैंक है। उसके बाहर तीन ट्रक देखे गए हैं। उन ट्रकों में बैग भर-भर के पैसा ले जाया गया है। उस वक्त सद्दाम हुसैन का बेटा Qusay Hussein बैंक में मौजूद था।

अमेरिका लगातार इराक पर हमला कर रहा था। कुछ वक्त के बाद अमेरिका का सेंट्रल बैंक ऑफ इराक पर भी कब्जा हो गया। इसके बाद सद्दाम हुसैन के जो दुश्मन थे। उनसे पूछताछ की गई। पता चला कि करीब 1 बिलियन डॉलर और यूरो इस बैंक से अमेरिका के हमला करने से कुछ देर पहले निकाल कर ले जाया गया है। अब ट्रक आखिरकार कहां गए। इन तीन ट्रकों की तफ्तीश की गई।

यह खबर है, कि यह सद्दाम हुसैन के खुफिया ठिकानों की तरफ गए हैं। लेकिन कुछ पुख्ता तौर पर आया कि यह सीरिया के बॉर्डर की तरफ जाते हुए देखे गए हैं। सीरिया में भी सद्दाम हुसैन के अच्छे ताल्लुक हैं। यह माना गया कि सीरिया के बॉर्डर के जरिए। इन पैसों को बाहर ले जाया गया है। इसके बाद अमेरिका ने एक-एक करके ठिकानों पर हमला करना शुरू कर दिया।

जब सद्दाम हुसैन के महल पर हमला किया गया। उनके घर पर कुछ पैसे मिले। शायद लगा कि यह उसी बैंक के पैसे हैं। मगर बाद में पता चला कि सद्दाम हुसैन के दूसरे बेटे को कैश रखने का शौक है। यह बैंक के पैसे नहीं थे। सद्दाम हुसैन के अपने पैसे थे। इसके अलावा दो तीन जगह से और पैसे मिले। बहुत सारे पैसे जनता के पास मिले। अमेरिकी फौजियों ने वहां की अवाम से लूटपाट शुरू कर दी थी।

अलग-अलग स्थानों से पैसे तो मिले पर यह पुख्ता सबूत नहीं था। यह वही पैसे है। जो बैंक से निकाले गए थे। शायद यह भी हो सकता है, कि सद्दाम हुसैन के बेटों के अपने पैसे हो।

एक बात यह भी सामने आई थी। सद्दाम हुसैन ने यह पैसे इसलिए निकाले थे। जिस वक्त अमेरिका से लड़ाई होगी। उस वक्त यह पैसा इराक के काम आएगा। दूसरी बात यह थी। सद्दाम हुसैन को एहसास हो गया था कि अगर अमेरिका हमला करता है। अमेरिका से जीतना मुश्किल है। जो अभी सरकारी खजाने में है, उसको लेकर यहां से निकला जाए।

अमेरिका के इस हमले में सद्दाम हुसैन के दोनों बेटे मारे गए। तकरीबन 8 महीनों के बाद सद्दाम हुसैन एक बनकर से गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। उसके बाद उनको फांसी हो गई।

कुछ लोग कहते हैं, कि यह पैसा अमेरिका की फौज के हाथों में पहुंच गया। उन्होंने यह पैसा छुपा लिया था। क्योंकि रकम बहुत बड़ी थी। उन्होंने इस बात को किसी से नहीं बताया था। कुछ लोग यह भी कहते हैं। वह पैसा सद्दाम हुसैन के परिवार तक पहुंचा दिया गया था। क्योंकि एक साथ तमाम पैसा बरामद नहीं हुआ था। इसीलिए कोई पुख्ता सबूत किसी के पास नहीं था। यह पैसा आखिरकार कहां गया। इस बात का कुछ पता नहीं चला कि किसके पास कितना पैसा पहुंचा है।

कुछ लोग तो इसे World biggest bank robbery के तौर पर मानते हैं। मगर सद्दाम हुसैन ने यह पैसा इराक की जनता के लिए वहां से निकाला था। इत्तेफाक से अमेरिका ने वहां पर हमला कर दिया था। इसलिए इसको बैंक डकैती कहना भी मुनासिब नहीं है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है। इसे World biggest bank robbery के नाम पर माना गया। जो उस सेंट्रल बैंक ऑफ इराक के नाम पर है।

अमेरिका ने इसे World Biggest Bank Robbery का नाम दे दिया। मगर यह कहना मुश्किल है, कि सद्दाम हुसैन के बैठो ने पैसा चोरी किया था। क्योंकि उस वक्त अमेरिका का खतरा था। हो सकता है, कि उन्होंने वह पैसा किसी सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के लिए निकाला हो। उनका ख्याल हो कि ये पैसा अमेरिका के साथ जंग में इराक के काम आएगा।