इंग्लैंड जैसी जगह पर जहां की पुलिस काफी अच्छी मानी जाती है। वहां पर एक क्राइम होता है। क्राइम होने के बाद जो मुजरिम है। इस देश को छोड़ कर भाग जाता है। वह किसी दूसरे देश में पहुंच जाता है। पुलिस उसे पकड़ने की पूरी कोशिश करती है। मगर पकड़ नहीं पाती। काफी वक्त बीत गया था। आखिर में मां-बाप यह फैसला करते हैं। वह अपनी बच्ची के गुनहगार को पकड़ने के लिए खुद उस देश में जाएंगे। वहां के लोगों से और पुलिस से मदद मांगेंगे। उनका यह फैसला कितना सही साबित होता है। ये Hannah Foster Murder की कहानी है।

ये बात 14 March 2003 की है। यह कहानी इंग्लैंड में एक जगह की है। यह कहानी है 17 साल की एक छात्रा Hannah Foster मेडिसिन की पढ़ाई करना चाहती थी। जो अभी एक स्कूल में थी। जो एक ब्राइट स्टूडेंट थी।

14 मार्च 2003 को Hannah Foster अपने दोस्तों के साथ पार्टी के लिए निकली थी। पार्टी से निकलने के बाद रात करीब 10:50 पर उसका जो दोस्त था। वह बस पकड़कर अपने घर चला जाता है। Hannah Foster पैदल ही घर जाने का फैसला करती है। जहां पर वह पार्टी थी। वहां से Hannah Foster के घर की दूरी तकरीबन आधा किलोमीटर की थी। यहां से Hannah Foster निकल कर अपने घर की तरफ जाती है।

Hannah Foster Murder
Hannah Foster

मगर तभी एक सैंडविच वैन वहां पर पार्किंग में खड़ी थी। अचानक वैन का ड्राइवर देखता है। एक लड़की सड़क पर अकेले जा रही हैं। ड्राइवर ने काफी शराब पी रखी थी। जब लड़की उसके करीब आती है। वह लड़की को जबरदस्ती उठाकर वैन में डाल लेता है। Hannah को जान से मारने की धमकी देता है। इसके बाद वह वहां से वैन कहीं और खड़ी कर देता है।

इधर 15 मार्च की सुबह हाना की मां की आंख खुलती है। वह देखती है, कि Hannah Foster घर में नहीं है। वह उसको कॉल करती है। Hannah के पास रिंग जाती है।वो उठाती नहीं है। उसको को मैसेज करती है। पूछती है, कहां है। लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया।

यह आसपास में पूछते हैं। इसमें काफी वक्त गुजर जाता है। आखिर में सुबह 9:30 बजे Hannah Foster के पिता पुलिस स्टेशन में चले जाते हैं। वहां पर रिपोर्ट लिखवा देते हैं। उनकी बेटी रात से लापता है। पुलिस रिपोर्ट लिखने के बाद पुलिस Hannah Foster की छानबीन शुरु कर देती है। लेकिन कोई सुराग नहीं मिलता। 15 मार्च यूं ही बीत जाता है।

उसके बाद 16 मार्च को इसी शहर के बाहर एक बच्चा सड़क के किनारे झाड़ी में एक लाश देखता है। वह पुलिस को फोन करता है। पुलिस वहां पर पहुंच जाती है। पता चलता है कि यह लाश Hannah Foster की है।

अब Hannah Foster की लाश मिलते ही हड़कंप मच जाता है। जब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आती है। पता चलता है, कि उसका रेप करके कत्ल कर दिया गया है। उसकी मौत गला दबाने से हुई है। पुलिस के ऊपर भी दबाव आ जाता है। वह इसकी तहकीकात शुरू करती है। आसपास के तमाम सीसीटीवी कैमरे चेक करती है। उस जगह के सीसीटीवी कैमरे चेक करती है। जहां पर आखरी बार Hannah Foster को Murder से पहले उसके दोस्तों ने छोड़ा था।

कैमरे से पुलिस को 7 गाड़ी जो वहां से गुजरी थी। उन पर शक हो जाता है। पुलिस छानबीन करती है। लेकिन कोई सुराग नहीं मिलता। इस दौरान वहां के क्राइम शो पर यह खबर आती है। वह पुलिस से मिली हुई खबर को दिखाता है। वह इन गाड़ियों के जो सीसीटीवी फुटेज थे उनको दिखाता है।

इत्तेफाक से उन गाड़ियों को देखकर जो एक एक कर्मचारी है। जल हॉट फूड में काम करता है। वह पहचान लेता है। वह कहता है, कि यह गाड़ी कल रात यहां से निकली थी। वह पुलिस को कॉल कर देता है। अब पुलिस उन 7 गाड़ियों में से 6 गाड़ियों को छोड़ देती है। जब पता किया गया कि इस गाड़ी को कौन चला रहा था। पता चलता है इस वैन के ड्राइवर का नाम Maninder Pal Singh Kohli है। जो एक भारतीय था। इंग्लैंड में 1993 से रह रहा था। वह एक तरीके से इंग्लैंड का नागरिक हो गया था।

अब Hannah Foster के Murder में मनिंदर पाल सिंह कोहली का पहली बार नाम सामने आता है। अभी तक छानबीन में 4 दिन निकल चुके थे। अगले दिन सुबह जब मनिंदर पाल सिंह कंपनी आता है। वह कहता है, कि उसके काफी दर्द है। वह आज काम नहीं कर पाएगा। उसको छुट्टी चाहिए। कंपनी उसके इस दर्द को देखते हुए छुट्टी दे देती है।

इसके बाद वह अपने एक साथी के पास जाता है। उससे कहता है, कि उसकी मां भारत में बहुत बीमार है। मुझे कुछ पैसे दे दो मुझे हवाई जहाज का टिकट खरीदना हैं। उसका दोस्त उसके लिए मना कर देता है। फिर यह वहां अपने घर जाता है। जहां पर इसने शादी की थी। इसके वहां पर दो बच्चे थे। जो इसकी वाइफ थी। वह ब्रिटिस्ट थी। यह वहां से अपने ससुर से मां की बीमारी के नाम पर पैसे ले लेता है।

18 मार्च 2003 को यह इंडिया चला आता है। भारत आने के बाद ही चंडीगढ़ जाता है। चंडीगढ़ से गायब हो जाता है। इसके बाद इसका कोई सुराग नहीं मिलता। अब पुलिस के सामने कई चीजें थी। जब उसकी वैन की पुलिस ने तलाशी ली। पुलिस को कुछ सबूत मिले। वहां पर पुलिस को Hannah Foster के बाल मिले। कुछ नमूने भी वहां से उठाए गए।

इसके बाद पुलिस मनिंदर पाल के घर जाती है। उसके बच्चों से डीएनए टेस्ट करती है। इन दोनों का डीएनए मैच कर जाता है। अब सबूत पुख्ता हो गया था। उस वैन में उस वक्त मनिंदर पाल था।

इसी दौरान में पुलिस को एक और चीज पता चलती है। 14 मार्च 2003 को जब यह वाक्य हुआ। वहां के Emergency नंबर पर एक कॉल आई थी। जो 50 सेकंड तक चली। यह कॉल Hannah Foster ने Murder से पहले की थी। Hannah Foster ने चुपके से वहां के emergency नंबर पर कॉल की थी। मगर मनिंदर पाल की डर की वजह से कुछ बोल नहीं पा रही थी। यह कॉल तकरीबन 50 सेकेंड तक चली। मगर जो उस वक्त वहां ऑपरेटर था। उसने कुछ आवाज ना सुनने की वजह से 50 सेकंड के बाद कॉल काट दी। अगर उस वक्त वह ऑपरेटर इस बात को समझ जाता कि कोई खतरे में है। उस जगह पर पहुंचकर शायद Hannah Foster की जान बचाई जा सकती थी।

Hannah Foster के मोबाइल और बाकी चीज भी पुलिस को बरामद हो गई थी। उसको किसी बैग में लपेटकर झाड़ी में फेंक दिया गया था।

जब तक पुलिस मनिंदर पाल सिंह की सच्चाई को समझ पाती। वह जब तक इंग्लैंड को छोड़ चुका था। वह इंडिया आ चुका था। अब मुश्किल यह थी। इसको कैसे पकड़ा जाए। वहां की पुलिस ने भारतीय पुलिस से संपर्क किया। मदद मांगी मगर शुरुआत में यहां से कोई मदद नहीं मिली। इस वजह से काफी वक्त बीत गया था।

चंडीगढ़ पुलिस ने कुछ तफ्तीश की थी। उसने उसके परिवार का पता किया था। परिवार से पता चला था। वह यहां आया था। मगर वह घर पर नहीं था। वह घर से जा चुका था। उसके बाद वह कहां गया किसी को मालूम नहीं था। जब मनिंदर पाल सिंह England में था। वह पगड़ी पहना करता था। उसका हुलिया बिल्कुल अलग था। हिंदुस्तान आने के बाद उसने अपना होलिया बिल्कुल बदल दिया था। मगर तब तक भारत की मीडिया में Hannah Foster की कोई खबर आई नहीं थी। लोगों को भी कुछ मालूम नहीं था।

इंग्लैंड की पुलिस, Indian पुलिस से मदद मांगती रही। मगर कुछ फायदा नहीं हो रहा था। वक्त बीता जा रहा था। इसी के बाद Hannah Foster के मां-बाप काफी परेशान थे। उनकी बेटी का कातिल कानून से दूर है। यह बात उनको परेशान कर रही थी।

जब उन्हें लगा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा। वह 3 महीने बाद Hannah Foster के मां-बाप ने फैसला किया। वह खुद भारत आएंगे। अपनी बेटी के कातिल को तलाश करेंगे। वह 10 जुलाई 2004 को भारत आ जाते हैं। सबसे पहले यह चंडीगढ़ जाते हैं। चंडीगढ़ में मीडिया से बात करके प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। सारी चीजें बता देते और कहते हैं, कि बेटी के कातिल को सामने लाने में मदद करें। वहां पर कुछ खबरें छपी थी। उसके बाद वह दिल्ली आ जाती।

दिल्ली आने के बाद वे प्रेस क्लब में कॉन्फ्रेंस करती हैं। अपनी पूरी आपबीती बताती है। उसकी बेटी का कत्ल कैसे हुआ था। कातिल भारत आ चुका है। हम उसे तलाश करने के लिए यहां आए हुए हैं। अब उसके बाद तमाम टीवी चैनल और अखबारों में मनिंदर पाल सिंह की तस्वीरें चलनी शुरू हो जाती है।

Hannah Foster के मां-बाप शहरों में जाते। मनिंदर पाल की तस्वीर मीडिया के जरिए लोगो तक पहुंचा दी। इसको ढूंढने में हमारी मदद कीजिए। उस वक्त तक पुलिस ने बाकायदा कोहली की गिरफ्तारी के ऊपर 50 लाख का इनाम घोषित कर दिया था। जो भी कोहली की सूचना देगा उसको 50 लाख का इनाम मिलेगा।

Hannah Foster के मां-बाप के भारत आने के बाद उसकी खबर धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचना शुरू हुई। लोगों को लगा कि एक 17 साल की लड़की का कातिल हिंदुस्तानी है। वह हिंदुस्तान में आकर छुपा हुआ है। Hannah Foster के मां बाप के हिंदुस्तान आने के 5 दिन बाद दार्जीलिंग (वेस्ट बंगाल का एक शहर ) से एक कार ड्राइवर लोकल पुलिस को फोन करता है। जो कि पुलिस से रिटायर हो चुका था। मगर वह कार ड्राइवर उसको जानता था। ड्राइवर जैसे ही यह बात उस पुलिस अफसर को बताता हैv जो रिटायर हो चुका था। उस पुलिस अफसर को भी शक होता है। जिस तरीके से उस ड्राइवर ने बताया था।  एक ब्रिटिस्ट है जो काफी दिनों से यहां रह रहा है। उसे लगता है, कि हो ना हो वह छुपने के लिए यहां आया होगा।

क्योंकि मनिंदर पाल ने अपना पूरा हुलिया बदल लिया था। मगर उसका चेहरा उससे मिल रहा था। वह पुलिस अफसर ड्राइवर से कहता है। मुझे उससे एक बार मिलाओ। इसके बाद पुलिस वाला वहां जाता है और देखता है।

उस पुलिस अफसर को भी लगा कि हां यह वही शख्स है। यह पहली पुख्ता जानकारी सामने आई थी। इसके बाद क्योंकि भारत के मीडिया में यह खबर फैल रही थी।  मनिंदर पाल भी चौकस हो गया था। और दार्जिलिंग से नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था। मगर उस पुलिस अफसर ने उसे पहले ही देख लिया था। वहां के लोकल पुलिस के जरिए मनिंदर पाल को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद शुरू में तो उसने काफी मना किया। मेरा नाम कुछ और है, क्योंकि वहां पर उसने अपना नाम माइक डेविस बताया था।

मगर जब काफी देर तक पूछताछ हुई। उसने स्वीकार कर लिया कि हां वही मनिंदर पाल है। वह यहां इंग्लैंड से भाग कर आया था। पुलिस से बचने के लिए वह Darjeeling में नए नाम से रह रहा था।

इस खुलासे के बाद फौरन Hannah Foster के मां-बाप को पता चल जाता है। वह मीडिया को शुक्रिया कहते हैं। उसको दिल्ली लाया जाता है। दिल्ली लाने के बाद उसको तिहाड़ जेल में रखा जाता है। अब उसको इंग्लैंड भेजने की लड़ाई शुरू हो जाती है। क्योंकि Hannah Foster के मां-बाप वापस उसको लेने के लिए आए थे। इस पर इंग्लैंड में मुकदमा चले। मगर इसी चक्कर में 3 साल बीत जाते हैं।

इसी बीच उसने NDTV इंग्लिश न्यूज़ चैनल को इंटरव्यू में अपना जुर्म कबूल किया था। उसने बताया था कि उस रात मैं एक डिलीवरी के लिए जा रहा था। मैं नशे में था। मैंने देखा कि Hannah Foster अकेली सड़क पर आ रही है।  मैंने उसको पकड़ लिया। उसका बलात्कार किया। मैंने Hannah Foster से कहा था। तुम यह बात पुलिस को नहीं बताओगी। मगर वह नहीं मानी। मैंने उसका गला दबाकर हत्या कर दी।

3 साल के बाद आखिरकार 28 जुलाई 2007 को कोहली को भारतीय अदालत की इजाजत से इंग्लैंड भेजा गया। यह मनिंदर पाल सिंह पहला शख्स था। जिसे इंग्लैंड में भारत से किसी जुर्म के लिए भेजा गया। यह एक इतिहास बन गया था। इंग्लैंड पहुंचते ही वहां की पुलिस मनिंदर पाल को गिरफ्तार कर लेती है। उस पर कत्ल, बलात्कार और अगवा करने का मुकदमा दर्ज हो जाता है।

वहां जाने के बाद यह अपनी कहानी बदल देता है। यह कहता है। मुझे 3 लोगों ने जबरदस्ती उस लड़की का बलात्कार करने के लिए कहा था। मैंने यह मजबूरी में किया था। मगर उसकी यह बातें बेकार चली जाती है। क्योंकि तमाम सबूत उसके खिलाफ थे। आखिरकार लंबा मुकदमा चला। 25 नवंबर 2008 को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। जिसमें कोहली को 24 साल की सजा सुनाई गई। जिसमें से 2 साल उसकी गिरफ्तारी के निकल चुके थे। जो 22 साल बच्चे थे। मगर यह 24 साल बगैर किसी जमानत के थे।

जिस ड्राइवर ने यह मुखबरी दी थी। उसको बाकायदा इनाम के पैसे मिले। उसने दार्जिलिंग में Hannah Foster के नाम से एक स्कूल खोल लिया। यह बात जब Hannah Foster के मां-बाप को पता चली। वह कुछ दिन के बाद भारत आये। उस ड्राइवर से मिले । वह जब भी भारत आते हैं, तो वह उसी ड्राइवर को Hire (रखते ) करते हैं। अपने लोगों से मिलकर उस हेल्प की मदद की।

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