यह कहानी इजिप्ट यानी मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद अनवर सादात के कत्ल (Assassination) की है। मिस्र दुनिया का ऐसा देश है जिसका क्षेत्रफल काफी बड़ा है। यहां की 80 फीसद आबादी मुस्लिम है। बाकी 20 फीसद ईसाई वगैरह है। Anwar Sadat मिश्र के तीसरे राष्ट्रपति थे।

1970 में अनवर सादात मिस्र के राष्ट्रपति बने थे। शुरू में लगा कि शायद यह ज्यादा कामयाब नहीं हो पाएंगे। मगर अनवर सादात की अलग सोच थी। इजराइल के साथ लड़ते हुए लगभग 25 साल हो चुके थे। अनवर सादात एक अलग किस्म के आदमी थे। उन्होंने मिस्र की अर्थव्यवस्था सही करने का इरादा किया और धीरे-धीरे इजराइल की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया। मिस्र एक ऐसा देश था जिसने अरब देशों में से सबसे पहले इजराइल को मान्यता दी थी।

इजराइल और अरब देशों में लड़ाई चल रही थी। जिसकी वजह से अरब देशों ने एक संगठन बनाया जिसका नाम अरब लीग रखा गया। इस लड़ाई में मिस्र अरब देशों में सबसे आगे था। उस वक्त नासिर मिस्र के राष्ट्रपति थे। इजराइल और अरब देशों की तीन लड़ाई हो चुकी थी। जिनमें तीन लड़ाई इजराइल ही जीता था।

Anwar Sadat का राष्ट्रपति बनना:-

राष्ट्रपति नासिर के मरने के बाद अनवर सादात वहाँ के राष्ट्रपति बने थे। अनवर सादात शुरू से ही अपने पास कोई सिक्योरिटी नहीं रखा करते थे। कई बार सलाहकारों के कहने की वजह से वे बॉडीगार्ड रख लिया करते थे। मगर वे एक आम आदमी की तरह जिंदगी बिता रहे थे। जिसकी वजह से वह मिस्र में खूब चर्चित थे।

मगर उनकी एक बात मिस्र के लोगों को पसंद नहीं आई। वह यह थी के अनवर सादात ने इजराइल के साथ संबंध बनाने शुरू कर दिए थे। जिसकी वजह से वहां के लोग और जो कट्टरपंथी समूह है। उनके खिलाफ होते जा रहे थे।

इजराइल के साथ समझौता:-

इसके बाद अमेरिका ने भी इन दोनों के बीच में टांग अड़ाना शुरू कर दी और जिसके बाद मिस्र ने इजराइल को एक देश के तौर पर मान्यता दे दी। जिसकी वजह से अरब लीग उसके खिलाफ हो गया और उसको अरब लीग से निकाल दिया गया।

इजराइल के साथ शांति समझौते की वजह से अनवर सादात को शांति नोबेल पुरस्कार भी दिया गया। अनवर सादात मुस्लिम शासकों में से पहले ऐसे शासक बने जिन को नोबेल पुरस्कार दिया गया।

जिस वक्त नासिर मिस्र के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने मिस्र के कट्टरपंथी समूह के जो नेता थे उनको जेल में डाल दिया गया था। मगर जब अनवर सादात मिस्र के राष्ट्रपति बने और उन्होंने इजराइल के साथ समझौता किया। जिसकी वजह से अरब लीग और मिश्री के कट्टरपंथी लोग उनके खिलाफ हो गए तो उन्होंने सोचा कि जो कट्टरपंथी समूह के नेता जेल में बंद है। उनको आजाद करके उनकी सोच बदली जाए। उनको अपनी तरफ किया जाए। जिसकी वजह से उनकी ताकत में इजाफा हो जाएगा।

assassination of anwar sadat
President Anwar Sadat

अनवर सादात में उन कट्टरपंथी समूह के नेता को आजाद कर दिया। मगर उनके सोच नहीं बदली और वह अनवर सादात के खिलाफ हो गए।

इस बीच अनवर सादात ने इजरायल का दौरा भी किया था। जिसकी वजह से अरब लीग उसके और मुखालिफ हो गया था। इस मिश्री के लोग भी उसके मुखालिफ हो गए थे। इस बात पर अनवर सादात की पत्नी कहती है। जब से उन्होंने इजरायल का दौरा किया है। तब से मुझे डर लगता है, कि जब भी वह बाहर जाते हैं। उनके वापस आने तक उन्हें डर लगा रहता है।

इसके बाद वहां के जो कट्टरपंथी समूह थे। उन्होंने मिस्र की सेना में कट्टरपंथी सोच के लोगों को भर्ती करना शुरू कर दिया। इसके लिए उन्होंने सेना के एक लेफ्टिनेंट जिनका नाम खालिद इस्लाम बोली था। उनका जहन तब्दील किया। उनके जरिये वह सेना में अपनी सोच के लोगों को भर्ती करने लगे थे।

उनके भर्ती करने का मकसद यह था कि वक्त आने पर इनका इस्तेमाल किया जा सके। इसके लिए उन्होंने सेना में अपने लोगों को भर्ती करना शुरू कर दिया।

उनका जो प्लान था वह यह था कि सेना के मुख्यालय, स्टेट सिक्योरिटी का मुख्यालय और टेलीफोन एक्सचेंज के मुख्यालय को अपने कब्जे में लिया जाए। उसी वक्त मिस्र के राष्ट्रपति का भी कत्ल किया जाए। उसके लिए इन्होंने एक दिन चुना वह दिन 6 अक्टूबर 1981 था।

इसकी वजह यह थी कि 6 अक्टूबर को मिस्र का विजय परेड दिवस होता है। उस दिन आर्मी के सभी हेड वहां पर होते हैं। बाकी सिक्योरिटी के हेड भी वहां पर मौजूद होते हैं। यहां तक कि मिस्र के राष्ट्रपति भी उस परेड में मौजूद होते हैं। इसी वजह से इन्होंने 6 अक्टूबर का दिन चुना था।

मगर परेड के मैदान में राष्ट्रपति को मारना मुश्किल था। क्योंकि उस वक्त बहुत ज्यादा सैनिक वहां पर मौजूद होंगे और यहां तक कि आर्मी के तमाम चीफ और सिक्योरिटी की भी वहां पर मौजूद होंगे। इस बीच राष्ट्रपति का कत्ल करना मुश्किल था। लेकिन ते यह किया गया की उसी परेड में राष्ट्रपति का कत्ल करना है।

उस परेड के लिए राष्ट्रपति अनवर सादात ने इंग्लैंड के एक दर्जी से अपनी ड्रेस सिलाई थी। जिसको वह उस परेड में पहन कर जाते। जब उन्होंने वो ड्रेस पहनी तो उसके अंदर उन्होंने बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं पहनी थी। इस पर उनकी पत्नी ने उन्हें टोका भी था कि वह बुलेट प्रूफ जैकेट पहने।

मगर उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि उनकी ड्रेस की शो बिगड़ जाएगी। वह मोटे लगेंगे। क्योंकि जब वह इजराइल के दौरे पर गए थे तो उस वक्त भी वे बुलेट प्रूफ जैकेट में मोटे लग रहे थे। उनका लुक बिगड़ रहा था।

अनवर सादात बिना बुलेट प्रूफ जैकेट के ही परेड में चले गए। वहां पर बीच में कुर्सी पर बैठ गए। उनके चारों तरफ बाहर के देशों से आए हुए लोग भी मौजूद थे। वहां के सिक्योरिटी की चीफ भी उनके पास ही बैठे हुए थे। मिस्र के उपराष्ट्रपति Hosni Mubarak भी उन्हीं के पास बैठे हुए थे। कई मुल्कों से आए हुए मेहमान भी वहीं मौजूद थे।

इसके बाद परेड में सभी अपने-अपने करतब दिखाने लगे। उस वक्त आसमान में लड़ाकू विमानों का करतब चल रहा था। उसके बाद तोपों की कला दिखानी थी। मगर अचानक से कुछ ट्रक मैदान में आ गए। ट्रक भी इसी शो का हिस्सा थे। ट्रक अपने रुट पर चलने लगे मगर अचानक एक ट्रक उनमें से अपने रास्ते से हट कर अनवर सादात की तरफ बढ़ने लगा।

वो ट्रक आगे आते-आते अचानक से रुक गया। वहां बैठे हुए तमाम लोग घबरा गए। क्योंकि वह ट्रक इसी अंदाज में रुका था। बल्कि उस ट्रक को रोका गया था।

लेफ्टिनेंट इस्लाम बोली थी उसी ट्रक में मौजूद थे। उन्होंने ही ट्रक के ड्राइवर के सर पर बंदूक लगाकर उस ट्रक को रुकवाया था।

Anwar Sadat की हत्या (Assassination):-

ट्रक के रुकने के बाद 3 गोले अनवर सादात की तरफ फेंके गए। जिनमें से दो गोले फट गए और एक नहीं फटा। इसके बाद उस ट्रक में से लेफ्टिनेंट खालिद उतरे और उन्हीं के साथ ट्रक के पीछे से 15 आदमी और उतरे और वह अनवर सादात के स्टेज की तरफ बढ़ने लगे।

अनवर सादात ने सोचा कि शायद यह भी इस परेड का हिस्सा है। वह लोग अनवर सादात की तरफ बढ़ते रहे। उन्होंने फिर 3 गोले छोड़े जिनमें से दो फटे और एक नहीं फटा। इसके बाद उन्होंने अनवर सादात पर गोली चलाना शुरु कर दी। लेफ्टिनेंट खालिद सबसे आगे गोली चला रहे थे।

30 सेकंड तक तो किसी को मालूम ही नहीं हुआ कि आखिर यह क्या हो रहा है। 30 सेकंड के बाद जब देखा कि राष्ट्रपति अनवर सादात जख्मी हालत में नीचे पड़े हुए हैं। तब जाकर वहां की सिक्योरिटी फोर्स ने एक्शन लिया और उन लोगों में से जो गोली चला रहे थे कुछ लोग जख्मी हो गए।

क्योंकि वहां की सिक्योरिटी फोर्स यह समझ रही थी कि शायद यह गोली चलाना में परेड का ही हिस्सा है। वहां के जो चीफ लोग बैठे हुए थे। उनकी बंदूक खाली थी। वो सिर्फ फॉर्मेलिटी के लिए वहां पर अपनी गन लेकर बैठे हुए थे।

इसके बाद फौरन राष्ट्रपति अनवर सादात को अस्पताल ले जाया गया। मगर उनकी वहां पर मौत हो गई। उसी अस्पताल में लेफ्टिनेंट खालिद इस्लाम बोली को भी ले जाया गया। क्योंकि वह भी गोली लगने से जख्मी हो गए थे।

इसके बाद लेफ्टिनेंट खालिद से पूछा गया कि इसके पीछे कौन है और क्या क्या मकसद है। उनको यह बता कर पूछा गया कि अनवर सादात अभी जिंदा है। वह सही होते ही इस पर एक्शन लेंगे। मगर लेफ्टिनेंट खालिद ने यह कहकर टाल दिया की 34 गोली तो मैंने ही अनवर सादात के मारी है। उनका बचना नामुमकिन है।

इसके बाद पता चलता है कि इसके पीछे मुस्लिम ब्रदर हुड वगैरा का हाथ है। उन्होंने इस वजह से अनवर सादात को मारा है कि अनवर सादात ने इजरायल के साथ समझौता किया था।

मगर इस कत्ल के बाद वहां की सेना एक्टिव हो जाती है। इन लोगों का जो अगला मिशन था। उसको नाकाम बना दिया जाता है। इस गोलीबारी में बाहर के आए हुए मेहमान भी जख्मी हो गए थे। इसमें कुछ लोगों को पकड़ा भी गया और उनसे बाद में पूछताछ की गई।

इस तरह से मिस्र के एक राष्ट्रपति Anwar Sadat का उसी की सेना के सामने हत्या (assassination) हो जाना एक सनसनीखेज हत्या से कम नहीं है।

One Reply to “मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद अनवर सादात के सनसनीखेज कत्ल की कहानी”

  • Rajib Nag
    Rajib Nag
    Reply

    Do you have an audio CD of Crime Tak? Or any kind of audio means to listen to this popular programme.

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