आज कल हम  Artificial Intelligence के बारे में बहुत सुनते है। हर कोई Artificial Intelligence की तारीफ़ करता रहता है। मगर कोई भी Artificial Intelligence की सही से जानकारी नहीं देता। आज हम आपको के Artificial Intelligence बारे में Hindi में पूरी जानकारी देने जा रहे है। उम्मीद करते है आपको इससे बहुत मदद मिलेगी।

John McCarthy ने वर्ष 1950 में Artificial Intelligence शब्द के बारे में जाना। Artificial Intelligence क्या है और इसकी इतनी जरुरत क्यों है। आज के दौर में Artificial Intelligence की ज्यादा जरुरत पड़ने लगी है। कंपनी में Artificial Intelligence की बहुत vacancy निकल रही है। ख़ास तौर पर foreign में तो इसका अच्छा Craze चल रहा है। वहाँ पर Salary package भी अच्छा मिल जाता है। Artificial Intelligence की रोजाना न जाने कितनी ही vacancy  LinkedIn पर निकलती है।

Artificial Intelligence क्या है?

Artificial Intelligence कंप्यूटर बनाने का एक तरीका है, एक कंप्यूटर-नियंत्रित रोबोट, या एक सॉफ्टवेयर बुद्धिमानी से सोचता है, ठीक उसी तरह जिस तरह बुद्धिमान बुद्धिमत्ता सोचते हैं।

AI को अध्ययन करके पूरा किया जाता है कि मानव मस्तिष्क कैसे सोचता है, और मनुष्य कैसे सीखते हैं, निर्णय लेते हैं, और एक समस्या को हल करने की कोशिश करते हुए काम करते हैं, और फिर बुद्धिमान सॉफ्टवेयर और सिस्टम विकसित करने के आधार पर इस अध्ययन के परिणामों का उपयोग करते हैं। Machine learning भी इसी का एक हिस्सा है।

Philosophy of AI:

कंप्यूटर सिस्टम की शक्ति का उपयोग करते हुए, मानव की मांग, उसे आश्चर्य (surprise) की ओर ले जाती है, “क्या एक मशीन इंसानों की तरह सोच और व्यवहार कर सकती है?”

इस प्रकार, AI का विकास उन मशीनों में समान बुद्धिमत्ता बनाने के इरादे से शुरू हुआ जो हम मनुष्यों में उच्च पाते हैं और मानते हैं।

AI के लक्ष्य:

  • Expert Systems बनाने के लिए – वे सिस्टम जो बुद्धिमान व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, सीखते हैं, प्रदर्शित करते हैं, समझाते हैं और अपने उपयोगकर्ताओं को सलाह देते हैं।
  • मशीनों में Human Intelligence को लागू करने के लिए – ऐसे सिस्टम बनाना जो इंसानों की तरह समझें, सोचें, सीखें और व्यवहार करें।

AI में क्या योगदान है?

Artificial Intelligence एक तरह से science और technology है। जो कंप्यूटर विज्ञान, जीव विज्ञान, मनोविज्ञान, भाषा विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर आधारित है। AI का एक प्रमुख जोर मानव बुद्धि से जुड़े कंप्यूटर कार्यों के विकास में है, जैसे logic, सीखने और समस्या को हल करना।

निम्नलिखित क्षेत्रों में से, एक या एक से अधिक क्षेत्र एक Intelligent system बनाने में योगदान कर सकते हैं।

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AI के साथ और  AI के बिना Programming:

AI के बिना Programming AI के साथ Programming
AI के बिना एक कंप्यूटर प्रोग्राम उन Specific questions का उत्तर दे सकता है जो इसे हल करने के लिए हैं। AI के साथ एक कंप्यूटर प्रोग्राम Generic सवालों के जवाब दे सकता है जो इसे हल करने के लिए है।
कार्यक्रम में modification से इसकी Structure में परिवर्तन होता है। AI कार्यक्रम सूचना के अत्यधिक स्वतंत्र टुकड़ों को एक साथ रखकर नए संशोधनों को अवशोषित कर सकते हैं। इसलिए आप इसकी संरचना को प्रभावित किए बिना कार्यक्रम की जानकारी का एक मिनट का टुकड़ा भी modify कर सकते हैं।
सुधार तुरंत और आसान नहीं है। यह कार्यक्रम को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है। शीघ्र और आसान कार्यक्रम संशोधन।

AI कैसी technology है?

वास्तविक दुनिया में, ज्ञान के कुछ अनछुए गुण हैं –

  • इसकी मात्रा बहुत बड़ी है, जो ख़याल से बाहर का है।
  • यह orderly या orderly नहीं है।
  • यह लगातार बदलता रहता है।

AI तकनीक इस तरह से ज्ञान को कुशलतापूर्वक व्यवस्थित करने और उपयोग करने का एक तरीका है –

  • इसे उपलब्ध कराने वाले लोगों द्वारा विचार किया जाना चाहिए।
  • त्रुटियों को ठीक करने के लिए इसे आसानी से संशोधित किया जाना चाहिए।
  • यह कई स्थितियों में उपयोगी होना चाहिए, हालांकि यह अधूरा या गलत है।

AI के Application:

Gaming – AI रणनीतिक गेम जैसे शतरंज, पोकर, टिक-टैक-टो आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहां मशीन बड़ी संख्या में संभावित पदों के बारे में सोच सकती है।

Expert Systems – कुछ अनुप्रयोग हैं जो तर्क और सलाह प्रदान करने के लिए मशीन, सॉफ्टवेयर और विशेष जानकारी को एकीकृत करते हैं। वे उपयोगकर्ताओं को स्पष्टीकरण और सलाह प्रदान करते हैं।

Natural Language Processing – यह कंप्यूटर के साथ बातचीत करना संभव है जो मानव द्वारा बोली जाने वाली प्राकृतिक भाषा को समझता है।

Speech Recognition – कुछ बुद्धिमान प्रणालियाँ भाषा और वाक्यों और उनके अर्थों के संदर्भ में सुनने और समझने में सक्षम हैं जबकि एक मानव इससे बात करता है। यह विभिन्न लहजे, गंदे शब्द, पृष्ठभूमि में शोर, ठंड के कारण मानव के शोर में बदलाव आदि को संभाल सकता है।

Intelligent Robots – रोबोट मानव द्वारा दिए गए कार्यों को करने में सक्षम हैं। उनके पास वास्तविक दुनिया से प्रकाश, गर्मी, तापमान, गति, ध्वनि, टक्कर और दबाव जैसे भौतिक डेटा का पता लगाने के लिए सेंसर हैं। बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करने के लिए उनके पास कुशल प्रोसेसर, कई सेंसर और विशाल मेमोरी है। इसके अलावा, वे अपनी गलतियों से सीखने में सक्षम हैं और वे नए वातावरण के लिए अनुकूल हो सकते हैं।

Handwriting Recognition – हैंडराइटिंग रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर एक पेन या एक स्टाइलस द्वारा स्क्रीन पर कागज पर लिखे गए टेक्स्ट को पढ़ता है। यह अक्षरों के आकार को पहचान सकता है और इसे संपादन योग्य पाठ में बदल सकता है।

Top 8 Technology Trends के बारे में आज आपको बताने जा रहे है। Technology अब इतनी तेजी से विकसित हो रही है। जैसे-जैसे Technology developed होती है। यह तेजी से बदलाव और तरक़्क़ी को भी क़ाबिल बनाती है। जिससे तबदीली की दर में तेजी आती है। जब तक कि यह नुक्सान देने की वजह नहीं बन जाती।

Technology  पर आधारित Career एक ही रफ़्तार से नहीं बदलते। सामान्य IT Professional यह मानते हैं, कि उनका कार्य समान नहीं रहेगा। 21 वीं सदी का एक आईटी कार्यकर्ता लगातार सीखता रहता है। (out of necessity if not desire).

इसका आपके लिए क्या मतलब है? इसका मतलब है, कि Technology  के साथ-साथ update रहना। इसका मतलब है, कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए, यह जानने के लिए कि आपको कौन से skills की आवश्यकता है। आप किस प्रकार की नौकरियों के लिए योग्य होना चाहते हैं। यहां 8 Technology trends हैं। जिन्हें आपको 2020 में देखना चाहिए। कुछ नौकरियां जो इन trends द्वारा बनाई जाएंगी।

  1. Artificial Intelligence
  2. Machine Learning
  3. Robotic Process Automation or RPA
  4. Edge Computing
  5. Virtual Reality and Augmented Reality
  6. Blockchain
  7. Internet of Things (IoT)
  8. Cybersecurity

1. Artificial Intelligence (AI):

Artificial Intelligence या AI आज के दिनों  बहुत चर्चा में है। यह आज के दौर में एक top technology trends बनी हुई है। इसके अलावा, AI की अन्य Branch developed हुई हैं। जिसमें Machine Learning शामिल है। AI कंप्यूटर सिस्टम को refers करता है। जो इंसान के दिमाग की तरह काम करता है। आप की आवाज की पहचान करना, आपके चेहरे की पहचान करना इत्यादि। इन सब चीजों को अंजाम देते है। ये इन सब कामो को इंसानो से ज्यादा तेज और सही तरीके से केर सकता है।

छह में से पांच अमेरिकी हर दिन इसी या किसी दूसरे रूप में AI की services का इस्तेमाल करते हैं। जिसमे Streaming services, Navigation apps, Ride-sharing apps, Home personal assistants, Smartphone personal assistants, और smart home devices शामिल है। इसके अलावा, AI का उपयोग ट्रेनों को schedule करने, रोबोट के द्वारा काम लेना, Drone कैमरा इत्यादि के लिए किया जाता है।

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AI को हम आम तौर पर Automation के रूप में इस्तेमाल करते हैं। AI इंसानो की नौकरी के लिए खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है, कि Automation 2030 तक 73 मिलियन से अधिक नौकरियों को समाप्त कर देगा। हालांकि, Automation नौकरियों को बनाने के साथ-साथ उन्हें समाप्त भी कर रहा है। विशेष रूप से AI के क्षेत्र में: विशेषज्ञों का अनुमान है, कि 2020 तक AI में नौकरियों की संख्या 23 मिलियन हो जाएगी। कुछ लोग कहते हैं, कि AI जल्द ही बेहरीन जॉब दिलाने में लिए मदद करेगा।

2. Machine Learning:

Machine Learning एक तरह से Artificial Intelligence का हिस्सा है। Machine Learning भी top technology trends में से एक है। Machine Learning के साथ, कंप्यूटर को कुछ ऐसा करने के लिए प्रोग्राम किया जाता है। जिसे करने के लिए वे प्रोग्राम नहीं किए गए हो। वह दिए गए डाटा के तरीके से काम करते है। सामान्य तौर पर, हमारे पास सीखने के दो प्रकार, supervised और unsupervised हैं।

मशीन लर्निंग का आज actively रूप से उपयोग किया जा रहा है। मशीन लर्निंग तेजी से सभी प्रकार के उद्योगों में तैनात किया जा रहा है। जिससे skills पेशेवरों की भारी मांग पैदा हो रही है। मशीन लर्निंग मार्केट 2022 तक 8.81 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है। मशीन लर्निंग अनुप्रयोगों का उपयोग Data analysis, Data mining और Pattern recognition के लिए किया जाता है। Machine Learning पावर Web search results, Real-time advertising और Network intrusion का पता लगाने के लिए काम कर सकता है।

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हमारी ओर से अनगिनत कार्यों को पूरा करने के अलावा, यह रोजगार पैदा कर रहा है। Machine Learning की Jobs, LinkedIn पर top emerging नौकरियों में से एक है। जिसमें लगभग 2,000 जॉब लिस्टिंग पोस्ट की गई हैं। ये नौकरियां अच्छी Salary देती है। 2017 में, Machine Learning सीखने वाले Engineer के लिए औसत Salary $ 106,225 था। Machine Learning नौकरियों में engineer , developer, researchers, and data scientists शामिल हैं।

3. Robotic Process Automation or RPA:

Artificial Intelligence और Machine Learning की तरह, Robotic Process Automation, or RPA, एक और तकनीक है। जो नौकरियों को Provide कर रही है। RPA सॉफ्टवेयर के उपयोग से business processes को automatic करने के लिए है। जैसे कि interpreting applications, dealing with data, processing transactions और यहां तक ​​कि ईमेल का जवाब देना। RPA दोहराए जाने वाले कार्यों को खुद करता है। जो लोग करते थे उन बार बार के कामो को खुद ही कर लेता है। हमारे द्वारा की जाने वाली 45 प्रतिशत तक गतिविधियाँ, Financial managers, Doctor और CEO के कार्यों सहित Automatic हो सकती हैं।

Forrester Research का अनुमान है, कि Robotic Process Automation or RPA से 230 मिलियन या अधिक knowledge workers की Jobs या global workforce का लगभग 9 प्रतिशत को खतरा होगा। RPA मौजूदा नौकरियों में बदलाव करते हुए नए रोजगार भी पैदा कर रहा है। McKinsey ने पाया कि 5 प्रतिशत से कम व्यवसाय पूरी तरह से automatic हो सकते हैं। लेकिन लगभग 60 प्रतिशत आंशिक रूप से automatic हो सकते हैं।

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Future की तलाश में एक IT पेशेवर के रूप में और technology रुझानों को समझने की कोशिश करने के लिए, RPA developer, project manager, business analyst, solution architect और consultant सहित career के बहुत सारे अवसर देता है। इस तरह की नौकरी अच्छी Salary दिला सकती है। SimplyHired.com का कहना है, कि RPA में average salary $ 73,861 तक मिल जाती है। मगर ये  junior-level developers की salary का average है,  senior-level developers की salary लगभग $141,000 annually मिल जाती है। इसलिए, यदि आप RPA में career को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं, तो Robotic Process Automation (RPA) को आपको जल्दी शुरू कर देना चाहिए।

4. Edge Computing:

Cloud computing mainstream बन गई है। जिसमें AWS (Amazon Web Services), Microsoft Azure और Google Cloud बाजार में हावी हैं। Cloud computing को अपनाना अभी भी बढ़ रहा है, क्योंकि अधिक से अधिक व्यवसाय Cloud समाधान की ओर बढ़ते हैं। लेकिन यह  technology ज्यादा वक्त के लिए नहीं है।

जैसे-जैसे हम काम कर रहे हैं, Data की quantity में वृद्धि जारी है। हमें कुछ स्थितियों में cloud computing की कमियों का एहसास हुआ है। Edge computing को उन समस्याओं में से कुछ को हल करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जो cloud computing के कारण होने वाली latency को दूर करने और Processing के लिए डेटासेंटर को डेटा प्राप्त करने के लिए है। यह “किनारे पर” मौजूद हो सकता है, यदि आप करेंगे, जहां कंप्यूटिंग की आवश्यकता होती है।

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इस कारण से, edge computing  का उपयोग सीमित स्थानों पर time-sensitive data को सीमित करने के लिए किया जा सकता है या किसी Centralized स्थान से कनेक्टिविटी के लिए नहीं किया जा सकता है। उन स्थितियों में, edge computing मिनी डेटासेंटर की तरह काम कर सकती है। Edge computing Internet of Things (IoT)  उपकरणों के उपयोग में वृद्धि के रूप में वृद्धि होगी। 2022 तक, वैश्विक बढ़त कंप्यूटिंग बाजार $ 6.72 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। किसी भी बढ़ते बाजार के साथ, यह मुख्य रूप से software engineers के लिए Different नौकरियों का रास्ता खोलेगा।

5. Virtual Reality and Augmented Reality:

Virtual Reality (VR) user को environment में डुबो देता है जबकि Augmented Reality (AR) उनके environment को बढ़ाता है। हालांकि VR को मुख्य रूप से गेमिंग के लिए उपयोग किया जाता रहा है। अब तक इसका उपयोग training के लिए भी किया गया है। जैसा कि VirtualShip के साथ, U.S. Navy, Army और Coast Guard ship के कप्तानों को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक सिमुलेशन software है। Popular Pokemon Go Augmented Reality (AR) का एक उदाहरण है।

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Virtual Reality (VR) और Augmented Reality (AR) दोनों में Training, entertainment, Education, Marketing और यहां तक ​​कि एक injury (क्षति) के बाद Rehabilitation (दोबारा ठीक होना) की भी काफी संभावनाएं हैं। इस Pepsi Max bus के साथ या तो सर्जरी करने के लिए डॉक्टरों को trained करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, museum goers को एक गहन अनुभव (Intensive experience) प्रदान कर सकता है, theme parks बढ़ा सकता है, या marketing भी बढ़ा सकता है।

VR बाजार में Google, Samsung और Oculus जैसे प्रमुख हैं, लेकिन बहुत सारे स्टार्टअप बन रहे हैं और वे काम पर रखने वाले हैं। VR और AR skill वाले की मांग बढ़ेगी। VR शुरू करने के लिए (specialized knowledge) विशेष ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है। बुनियादी programming skill और एक forward-thinking (आगे की सोच वाली) मानसिकता वाला कर सकता है, हालांकि अन्य employer skill-set और hardware engineers के रूप में भी option की तलाश करेंगे।

6. Blockchain:

हालांकि अधिकतर लोग Bitcoin जैसी Crypto Currency के संबंध में Blockchain technology के बारे में सोचते हैं, लेकिन Blockchain सुरक्षा प्रदान करता है। जो कई अन्य तरीकों से उपयोगी है। सबसे सरल शब्दों में, Blockchain को उन डेटा के रूप में Described किया जा सकता है। जिन्हें आप केवल जोड़ सकते हैं, न कि हटा सकते हैं या बदल सकते हैं। इसलिए शब्द “चेन” क्योंकि आप डेटा की एक श्रृंखला बना रहे हैं। पिछले ब्लॉकों को बदलने में सक्षम नहीं होने के कारण यह इतना सुरक्षित है। इसके अलावा, Blockchain सर्वसम्मति (Consensus) से Operated हैं। इसलिए कोई भी Unit data का नियंत्रण नहीं ले सकती है। Blockchain के साथ, आपको लेन-देन की देखरेख या सत्यापन के लिए एक विश्वसनीय तृतीय-पक्ष (third-party) की आवश्यकता नहीं है।

कई Industry Blockchain को शामिल और Implemented कर रहे हैं, और जैसे-जैसे ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ता है, वैसे-वैसे skill professionals की मांग भी बढ़ जायगी। उस संबंध में, हम पहले से ही पीछे हैं। Techcrunch.com के अनुसार, ब्लॉकचेन से संबंधित नौकरियां नौकरियों की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती श्रेणी हैं। जिसमें हर एक ब्लॉकचेन डेवलपर के लिए 14 जॉब ओपनिंग हैं। जो Blockchain developer ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके architecture और solutions को developed और implemented करने में माहिर है। एक ब्लॉकचैन डेवलपर का औसत वार्षिक वेतन $ 130,000 है। यदि आप ब्लॉकचेन और उसके Applications से दूर है और इस तेजी से बढ़ते industry में अपना career बनाना चाहते हैं, तो ब्लॉकचैन सीखने और एक रोमांचक भविष्य के लिए तैयार होने का यह सही समय है।

7. Internet of Things (IoT):

कई “चीजें” अब वाईफाई कनेक्टिविटी के साथ बनाई जा रही हैं, जिसका अर्थ है कि वे इंटरनेट से और एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए, Internet of Things (IoT) भविष्य है और पहले से ही Capable devices (काबिल डिवाइस), Home appliances (घरेलू उपकरणों), कारों और बहुत अधिक से जुड़ा है और इंटरनेट पर डेटा का आदान-प्रदान करने के लिए है। हम केवल IoT के शुरुआती चरणों में हैं। 2017 में IoT उपकरणों की संख्या 8.4 बिलियन तक पहुंच गई। 2020 तक 30 बिलियन डिवाइस तक पहुंचने की उम्मीद है।

IoT

उपभोक्ताओं के रूप में, हम पहले से ही IoT का उपयोग और लाभ कर रहे हैं। हम अपने दरवाजे को दूरस्थ रूप से बंद कर सकते हैं यदि हम भूल जाते हैं। जब हम काम के लिए निकलते हैं और काम से घर के रास्ते पर अपने ओवन को पहले से गरम करते हैं, हमारे फिटबिट पर अपनी फिटनेस पर नज़र रखते हुए और Lift के साथ एक सवारी की सवारी करते हुए। लेकिन व्यवसायों को अभी और निकट भविष्य में बहुत कुछ हासिल करना है। IoT व्यवसायों के लिए बेहतर Security, Efficiency और Decision लेने में सक्षम हो सकता है क्योंकि डेटा एकत्र और विश्लेषण किया जाता है। चिकित्सा की देखभाल में तेजी ला सकता है, ग्राहक सेवा में सुधार कर सकता है और ऐसे लाभ प्रदान कर सकता है जिनकी हमने अभी तक कल्पना भी नहीं की है।

हालांकि, IoT के विकास और गोद लेने में इस वरदान के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त IT professionals को IoT नौकरियों के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जा रहा है। ITProToday के एक लेख में कहा गया है कि हमें 200,000 और IT कर्मचारियों की आवश्यकता है। IoT में career के इच्छुक किसी व्यक्ति के लिए, इसका मतलब है कि यदि आप प्रेरित हैं तो फील्ड में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। आवश्यक कौशल में IoT सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग ज्ञान, डेटा एनालिटिक्स, स्वचालन, एम्बेडेड सिस्टम की समझ, डिवाइस ज्ञान, केवल कुछ नाम शामिल हैं। आखिरकार, यह Internet of Things है, जिसका अर्थ है कि आवश्यक Skill भी हैं।

8. Cyber security:

Cyber security उभरती हुई तकनीक की तरह नहीं लग सकती है, यह देखते हुए कि यह कुछ समय के लिए है, लेकिन यह वैसे ही विकसित हो रहा है जैसे अन्य तकनीकें हैं। वह हिस्सा है क्योंकि खतरे लगातार नए हैं। जो पुरुष हैकर गैरकानूनी तरीके से डेटा एक्सेस करने की कोशिश कर रहे हैं। वे जल्द ही कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, और वे सुरक्षा के सबसे कठिन उपायों से भी गुजरते रहेंगे। यह भाग में भी है क्योंकि नई तकनीक को सुरक्षा बढ़ाने के लिए अनुकूलित किया जा रहा है। जब तक हमारे पास हैकर्स हैं, हमारे पास एक उभरती हुई तकनीक के रूप में Cyber security होगी क्योंकि यह लगातार उन हैकर्स के खिलाफ बचाव करने के लिए विकसित होगा।

trends

Cyber security पेशेवरों की मजबूत आवश्यकता के प्रमाण के रूप में, अन्य तकनीकी नौकरियों की तुलना में साइबर सुरक्षा की नौकरियों की संख्या तीन गुना तेजी से बढ़ रही है। हालाँकि, जब हम उन नौकरियों को भरने की बात करते हैं तो हम कम हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, यह भविष्यवाणी की गई कि हमारे पास 2021 तक 3.5 मिलियन अनफ़िल्टर्ड Cyber security jobs होंगे।

कई Cyber security नौकरियां six-figure incomes का भुगतान करती हैं, और भूमिकाएं नैतिक हैकर से लेकर सुरक्षा इंजीनियर तक मुख्य सुरक्षा अधिकारी तक हो सकती हैं।

एक ऐसी कहानी जिसे लोग World Biggest Bank Robbery के नाम से जानते है। मगर हकीकत कुछ और ही है। बैंक में इतने रुपए थे। उन के लिए तीन बड़े-बड़े ट्रक को वह अपने साथ लेकर गए थे। करीब 5 घंटे बैंक के अंदर से रुपए निकालने और ट्रक में लोड करने में लगते हैं। 5 घंटे के बाद पता चलता है। इस बैंक से करीब 8 हजार करोड़ रुपए निकले है।

यह कहानी इराक की है। इराक की राजधानी बगदाद की यह कहानी है। सन 2000 के बाद इराक में उथल-पुथल शुरू हो चुका था। परमाणु बम और जैविक हथियार को लेकर अमेरिका लगातार इराक पर दबाव डाल रहा था। हालांकि असल खेल तेल का था। अमेरिका चाहता था कि सद्दाम हुसैन उसकी बात माने। मगर सद्दाम हुसैन अमेरिका की शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं था। इन चीजों को लेकर अमेरिका और इराक में ठन गई थी। अमेरिका का इल्जाम था। इराक परमाणु बम बना रहा है। इसको लेकर बड़े दबाव थे। कई बार तलाशी हुई मगर इराक के पास से कभी कोई परमाणु बम नहीं मिला। मगर उसी की आड़ में अमेरिका ने इराक पर हमला करने का फैसला कर लिया था।

यह बात 2003 की है। इससे पहले इराक में जो मॉनिटरिंग सिस्टम था। यानी बैंक का जितना भी सिस्टम था। वह ब्रिटिश से जुड़ा हुआ था। उन्हीं के जरिए सब कुछ चला करता था। मगर बाद मे इराक का अपना बैंक सिस्टम बना। यह सिस्टम सद्दाम हुसैन के आने के बाद बना था। उसकी नई तरीके से सभी चीजें की गई।

इसके बाद इराकी सरकार के अंडर में वहां के बैंक आ गए। उन्हीं में से एक सेंट्रल बैंक ऑफ इराक जो इराक की सरकार का मैन बैंक था। यह सेंट्रल बैंक ऑफ इराक की कहानी है। सद्दाम हुसैन का अहसास था। अमेरिका उस पर हमला जरूर करेगा। इसीलिए दोनों मुल्कों में अपनी-अपनी तैयारियां चल रही थी।

सद्दाम हुसैन को इस बात का भी अहसास था। अगर हमला होता है। मगर उस वक्त तक यह अहसास नहीं था। किस तरीके का हमला हो सकता है। सद्दाम हुसैन ने सोचा कि अगर इराक की अमेरिका के साथ लड़ाई होती है। जो इराक का पैसा है। वह किसी महफूज जगह पर रखा जाए। लेकिन यह दूसरी बात है।

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Qusay Saddam Hussein

असल में कहानी 18 मार्च 2003 को शुरू होती है।  18 मार्च की सुबह ठीक 4:00 बजे सद्दाम हुसैन का बेटा। जिसका नाम Qusay Hussein था। वहां का डिफेंस जनरल था। उसका हेड भी था। सद्दाम के दो बेटे थे। जिनमें से एक Qusay Hussein था। 18 मार्च की सुबह 4:00 बजे सद्दाम हुसैन के पर्सनल सेक्रेटरी आबिद आबिद महमूद के साथ अपने घर से निकलता है। वह सेंट्रल बैंक ऑफ इराक जाने के लिए निकलता है।

जिसका मुख्यालय बगदाद में था। जिसका तमाम खजाना बगदाद में ही था। सेंट्रल बैंक की एक खासियत थी। जहां पर तमाम पैसे रखे हुए थे। इसकी बिल्डिंग क्यूब की तरह बनी हुई थी। इस पूरी बिल्डिंग में कोई भी खिड़की नहीं थी। इस पूरी बिल्डिंग में कोई दूसरा दरवाजा नहीं था। इस बैंक में अंदर जाने और बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था। इसका मतलब यह था कि अगर कोई इस पर हमला करता है। उसका वहां से निकलना लगभग नामुमकिन था। लेकिन 18 मार्च 2003 की सुबह वहां पर Qusay Saddam Hussein पहुंचते हैं।

साथ में सद्दाम हुसैन का पर्सनल सेक्रेटरी था। इसके बाद उस बैंक के अंदर सिर्फ तीन लोग और थे। जिनमें से एक सेंट्रल बैंक ऑफ इराक के डायरेक्टर थे। एक इराक के फाइनेंस मिनिस्टर थे। एक इराकी खजाने के डायरेक्टर थे। कुल मिलाकर यह पांच लोग थे। बैंक में जाने के बाद जो सद्दाम हुसैन का P.A. था। वह डायरेक्टर को एक खत देता है। जिसमें सिर्फ दो लाइन लिखी हुई थी। वो लाइने यह थी। इस बैंक में जो पैसे हैं। उसको किसी दूसरे महफूज ठिकाने पर लेकर जाना है। ये नेशनल सिक्योरिटी का इशू है। बस यही दो लाइनें थी।

सेंट्रल बैंक ऑफ इराक के Head ने इस पर्चे को पढ़ा। पढ़ने के बाद कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचाता। वह इस लिए कि क्योंकि बैंक हुक्मरान ही जब दस्तखत करके भेज रहा है। अब उनके पास कोई रास्ता ही नहीं बचा था।

इसके बाद देखा गया। Qusay Hussein जब बैंक के अंदर पहुंचे। उनके साथ तीन बड़े-बड़े ट्रक भी आए थे। उन तीन ट्रकों में तीनों ड्राइवर थे। इसके अलावा और कोई नहीं था।

इसके बाद बैंक के स्टाफ से कहा गया। जितनी जल्दी हो सके सभी पैसे निकाल ले। इसके बाद बैग में भर-भर कर पैसे निकालने शुरू कर दिए। जो पैसे बैंक के अंदर से एक-एक करके ट्रक में डालने शुरू कर दिए। रकम इतनी ज्यादा थी करीब 5 घंटे लगे थे। पैसों को ट्रक में लोड करने में। जब ट्रक में पैसे रखने की जगह नहीं बची। काफी पैसे बैंक में ही छोड़ने पड़े थे। Qusay Hussein पैसे लेकर निकल जाता है।

वहां से पैसा निकालने के कुछ घंटों बाद अमेरिका का पहला मिसाइल बगदाद पर गिरता है। जंग शुरू हो जाती है। अमेरिका की फौज जब तक इराक में पहुंचती है। जो सद्दाम हुसैन के दुश्मन थे। उनके जरिए अमेरिका को पता चलता है। जो इराक का सेंट्रल बैंक है। उसके बाहर तीन ट्रक देखे गए हैं। उन ट्रकों में बैग भर-भर के पैसा ले जाया गया है। उस वक्त सद्दाम हुसैन का बेटा Qusay Hussein बैंक में मौजूद था।

अमेरिका लगातार इराक पर हमला कर रहा था। कुछ वक्त के बाद अमेरिका का सेंट्रल बैंक ऑफ इराक पर भी कब्जा हो गया। इसके बाद सद्दाम हुसैन के जो दुश्मन थे। उनसे पूछताछ की गई। पता चला कि करीब 1 बिलियन डॉलर और यूरो इस बैंक से अमेरिका के हमला करने से कुछ देर पहले निकाल कर ले जाया गया है। अब ट्रक आखिरकार कहां गए। इन तीन ट्रकों की तफ्तीश की गई।

यह खबर है, कि यह सद्दाम हुसैन के खुफिया ठिकानों की तरफ गए हैं। लेकिन कुछ पुख्ता तौर पर आया कि यह सीरिया के बॉर्डर की तरफ जाते हुए देखे गए हैं। सीरिया में भी सद्दाम हुसैन के अच्छे ताल्लुक हैं। यह माना गया कि सीरिया के बॉर्डर के जरिए। इन पैसों को बाहर ले जाया गया है। इसके बाद अमेरिका ने एक-एक करके ठिकानों पर हमला करना शुरू कर दिया।

जब सद्दाम हुसैन के महल पर हमला किया गया। उनके घर पर कुछ पैसे मिले। शायद लगा कि यह उसी बैंक के पैसे हैं। मगर बाद में पता चला कि सद्दाम हुसैन के दूसरे बेटे को कैश रखने का शौक है। यह बैंक के पैसे नहीं थे। सद्दाम हुसैन के अपने पैसे थे। इसके अलावा दो तीन जगह से और पैसे मिले। बहुत सारे पैसे जनता के पास मिले। अमेरिकी फौजियों ने वहां की अवाम से लूटपाट शुरू कर दी थी।

अलग-अलग स्थानों से पैसे तो मिले पर यह पुख्ता सबूत नहीं था। यह वही पैसे है। जो बैंक से निकाले गए थे। शायद यह भी हो सकता है, कि सद्दाम हुसैन के बेटों के अपने पैसे हो।

एक बात यह भी सामने आई थी। सद्दाम हुसैन ने यह पैसे इसलिए निकाले थे। जिस वक्त अमेरिका से लड़ाई होगी। उस वक्त यह पैसा इराक के काम आएगा। दूसरी बात यह थी। सद्दाम हुसैन को एहसास हो गया था कि अगर अमेरिका हमला करता है। अमेरिका से जीतना मुश्किल है। जो अभी सरकारी खजाने में है, उसको लेकर यहां से निकला जाए।

अमेरिका के इस हमले में सद्दाम हुसैन के दोनों बेटे मारे गए। तकरीबन 8 महीनों के बाद सद्दाम हुसैन एक बनकर से गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। उसके बाद उनको फांसी हो गई।

कुछ लोग कहते हैं, कि यह पैसा अमेरिका की फौज के हाथों में पहुंच गया। उन्होंने यह पैसा छुपा लिया था। क्योंकि रकम बहुत बड़ी थी। उन्होंने इस बात को किसी से नहीं बताया था। कुछ लोग यह भी कहते हैं। वह पैसा सद्दाम हुसैन के परिवार तक पहुंचा दिया गया था। क्योंकि एक साथ तमाम पैसा बरामद नहीं हुआ था। इसीलिए कोई पुख्ता सबूत किसी के पास नहीं था। यह पैसा आखिरकार कहां गया। इस बात का कुछ पता नहीं चला कि किसके पास कितना पैसा पहुंचा है।

कुछ लोग तो इसे World biggest bank robbery के तौर पर मानते हैं। मगर सद्दाम हुसैन ने यह पैसा इराक की जनता के लिए वहां से निकाला था। इत्तेफाक से अमेरिका ने वहां पर हमला कर दिया था। इसलिए इसको बैंक डकैती कहना भी मुनासिब नहीं है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है। इसे World biggest bank robbery के नाम पर माना गया। जो उस सेंट्रल बैंक ऑफ इराक के नाम पर है।

अमेरिका ने इसे World Biggest Bank Robbery का नाम दे दिया। मगर यह कहना मुश्किल है, कि सद्दाम हुसैन के बैठो ने पैसा चोरी किया था। क्योंकि उस वक्त अमेरिका का खतरा था। हो सकता है, कि उन्होंने वह पैसा किसी सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के लिए निकाला हो। उनका ख्याल हो कि ये पैसा अमेरिका के साथ जंग में इराक के काम आएगा।

यह India के Youngest Serial Killer की कहानी है। सबसे छोटा सीरियल किलर जिसके नाम रिकॉर्ड दर्ज है। जिसे शायद पुलिस और अदालत के बारे में जानकारी नहीं थी। यहां तक की धारा 302 के बारे में भी जानकारी नहीं थी। ना इस बारे में सामने वाले का जो वो मार रहा है। उसकी जान जा रही है। जान लेना जुर्म है। उसे इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। सबसे खतरनाक बात यह है। इस सीरियल किलर के हाथों जो पहले दो क़त्ल हुए थे। कुछ लोगों को उस राज का पता चल गया था। मगर उन्होंने इस राज को छुपा लिया। उन्होंने कहा कि यह परिवार का मामला है। शायद पहले ऐसा कभी नहीं हुआ होगा।

अमरजीत के बारे में-

बिहार में एक जगह बेगूसराय है। इसी बेगूसराय में एक परिवार रहता था। वह गरीब परिवार था। उस परिवार का जो आदमी था। वह मजदूरी करके परिवार का पेट भरा करता था। उसके दो बच्चे थे। जिनमें एक बेटा और एक बेटी थी। बेटी की उम्र तकरीबन 6 महीने ही थी। बेटा 1998 में पैदा हुआ था। बेटे का नाम अमरजीत था। अमरजीत धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है। उसकी उम्र तकरीबन साढ़े सात से आठ साल की होगी।

एक दिन अचानक उसके परिवार में उसका कजन रहता था। जिसकी उम्र करीब 8 महीने थी। वहां से  उसकी लाश मिलती है। उसके सर पर किसी वजनी चीज से मारा गया था। जिससे उसका कत्ल किया गया था। परिवार के लोग देखते हैं, कि बच्चा मर चुका है।

इसी दौरान मां बाप को पता चल जाता है। अमरजीत थोड़ी देर पहले इस बच्चे के साथ था।उसके हाथ पर जिस तरह के निशान थे। उससे लग रहा था कि शायद उसने कुछ किया है। शक हो चुका था। मगर यह बात पुलिस तक नहीं जाती है। इस बात को घर वाले खुद ही दबा लेते हैं। बात रफा-दफा हो जाती है।

अमरजीत का दूसरा क़त्ल-

youngest serial killer in india
Amarjeet In 8 Years

करीब 6 महीने बीतने के बाद अमरजीत के अपने ही घर में जो उसकी छोटी बहन थी। जिसकी उम्र तकरीबन 6 महीने थी। उसकी लाश मिलती है। उसके भी सर पर जख्म थे। उसके सर को भी पत्थर से ही मारा गया था। इस बार भी घर वालों को पता चल जाता है। यह काम किसने किया है। अमरजीत के मां-बाप को पता चल जाता है। उनकी बेटी को उसी के भाई ने मारा है। मगर इसको भी परिवार का मामला मानते हुए कोई पुलिस के पास नहीं जाता।

उन्हें लगता है, कि बेटी तो मर गई। अगर बेटे के खिलाफ भी रिपोर्ट कर दी। वह भी पुलिस में चला जाएगा। इस दूसरे कत्ल के राज को भी घरवाले छुपा लेते हैं। 6 महीने के अंदर एक साढ़े सात साल का बच्चा दो कत्ल कर चुका था। किसी भी कानून को इस बारे में खबर नहीं लगती। शिवाय मां-बाप और चाचा के।

अमरजीत का तीसरा क़त्ल और India का Youngest Serial Killer बनना-

कुछ वक्त बीतने के बाद। तकरीबन 3 महीने के बाद। इन्हीं के गांव में कुछ दूरी पर एक और बच्ची थी। जिसकी उम्र 1 साल थी। उसका नाम खुशबू था। खुशबू अपनी मां के साथ एक प्राइमरी स्कूल में खुले में लेटे हुए थी। कुछ देर के बाद माँ घर के किसी जरूरी काम से बेटी को वही छोड़ कर चली जाती है। वह सोचती है, कि कुछ देर में तो वह वापस आ जाएगी। उसके जाने के दौरान में ही वह देखती है। अमरजीत स्कूल के पास में ही है। वह यह देख कर चली जाती है। वह अमरजीत को नजरअंदाज कर देती है।

कुछ देर के बाद जब वह वापस लौटती है। वह देखती है, कि जहां पर वह अपनी बच्ची को लेटा कर गई थी। वह वहां पर नहीं थी। स्कूल के आसपास में देखती है। वह कहीं नहीं मिलती। वह जब अमरजीत से पूछती है। अमरजीत हंसता रहता है। वो कुछ नहीं बताता। उसके बाद वह चारों तरफ देखती है। उसके बाद घरवालों को बताती है। घर वाले सब मिलकर उसको ढूंढ रहे थे। पर खुशबू का पता नहीं चलता।

अब उस स्कूल के पास अगर किसी को देखा था। वह अमरजीत था। उसे लगा कि जब हो गई थी तो खुशबू के पास अमरजीत था। उसके सिवा वहां कोई और नहीं था। जब सब जगह देख लिया। खुशबू नहीं मिली। खुशबू के घर वाले पुलिस में जाकर रिपोर्ट लिखवा देते हैं।

रिपोर्ट लिखवाने के बाद वह घर आ जाते हैं। पुलिस को जो पहले दो कत्ल हुए थे। उनके बारे में पता तो था मगर यह नहीं पता चला था। यह कत्ल किसने किए थे। क्योंकि उनके कत्ल की उनके घर वालों ने पुलिस में रिपोर्ट ही नहीं लिखवाई थी।

पुलिस को उड़ते-उड़ते  खबर तो मिल ही गई थी। यहां पहले भी तो बच्चों का कत्ल हो चुका है। लोग दहशत में हैं। अब यह तीसरी बच्ची गायब है। कहीं इसके साथ भी कुछ अनहोनी ना हो जाए। उससे मामला और भी बिगड़ जाए। पुलिस ने सतर्कता दिखाई। फौरन खुशबू को तलाश करने में लग गई।

अमरजीत पर क़त्ल का शक-

खुशबू की मां ने पुलिस को बताया कि मुझे अमरजीत पर पूरा शक है। क्योंकि इसके अलावा वहां पर कोई और मौजूद नहीं था। पुलिस वाले ने शुरू में तो हल्के में लिया। एक 8 साल का बच्चा क्या बताएगा। जब खुशबू की मां ने ज्यादा दबाव दिया। पुलिस ने सोचा चलो इनकी दिल की तसल्ली के लिए अमरजीत को बुलाकर भी पूछताछ कर लेते हैं। इसके बाद पहली बार पुलिस अमरजीत के पास जाती है।

अमरजीत लगातार पुलिस वालों के सामने हंस रहा था। सिर्फ हंसता ही जा रहा था। शायद उसे मालूम नहीं था। पुलिस क्या है। पुलिस वालों के भी अजीब लग रहा था। अमरजीत से पूछ रहे थे कि तुमने खुशबू को कहीं देखा है। अमरजीत हंसता ही जा रहा था। कुछ बता नहीं रहा था। उसने फिर अचानक पुलिस वालों से कहा कि मुझे अगर बिस्कुट दोगे तो मैं बताऊंगा।

क़त्ल का राज खुलना-

पुलिस को इस बारे में अंदाजा भी नहीं था। इसलिए पुलिस ने सोचा कि चलो इसको बिस्कुट तो दे ही देते हैं। हो सकता है यह कुछ बता ही दें। पुलिस ने गांव के किसी आदमी को भेजकर अमरजीत के लिए बिस्कुट मंगवा लिए। इसके बाद पुलिस वाले ने उस बच्चे को बिस्कुट दिया। अमरजीत ने बिस्कुट का पैकेट खोलकर बिस्कुट खा लिए। फिर पुलिस वालों ने पूछा कि अब बताओ। अमरजीत बिस्कुट खाने के बाद हंसा। फिर बोला कि मैंने उसे खपरैल से मारकर सुला दिया। पुलिस वालों को समझ नहीं आया। उन्होंने पूछा कि कहां सुलाया।

पुलिस वालों को भी मजाक लग रहा था। उन्होंने फिर पूछा कि सही बताओ क्या किया। अमरजीत ने कहा कि मैंने खपरैल से मारा और सुला दिया। फिर पुलिस वालों ने पूछा कहां सुलाया। उसने कहा मुझे बिस्किट खिलाओ। पुलिस वालों ने फिर बिस्किट मंगाए। उसको बिस्कुट दिए। बिस्कुट खाने के बाद वह बोला कि चलो मैं दिखाता हूं। मैंने खुशबू को कहां सुलाया है। अब पुलिस पीछे-पीछे थी और बच्चा आगे आगे था।

अब जहां पर खुशबू की मां उसको छोड़ कर आई थी। उसी स्कूल के पास खेत में कुछ झाड़ियां थी। अमरजीत वहां तक गया। झाड़ी के पास जाकर रुक गया। उसने कहा मैंने खुशबू को यहां सुलाया है। पुलिस वाले आगे बढ़े। उन्होंने देखा कि एक छोटा सा गड्ढा है। उस गड्ढे के ऊपर कुछ पत्ते रखे हुए थे।

पुलिस को खुशबू की लाश मिलना-

पुलिस ने जैसे ही बस गड्ढे के ऊपर से वह झाड़ हटाए तो देखा अंदर खुशबू की लाश है। जब पुलिस खुशबू की लाश देखती है। उनके पैरों तले जमीन निकल जाती है। वह सोचते हैं, कि एक बच्चा जो हंसते ही जा रहा है। बिस्कुट मांग रहा है। कहता है, कि मैंने खपरैल से मारकर सुला दिया। मौका ए वारदात पर खुद लेकर गया था। लाश की बरामद कराता है। अब पुलिस वाले बच्चे को देख रहे हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।

अब पुलिस को खुशबू की लाश मिल गई थी। क्योंकि खुशबू की लाश मिलने की वजह वह बच्चा था। पुलिस को यकीन हो गया था। शायद खुशबू का कत्ल इस अमरजीत ने किया है।

अप पुलिस वाले उससे फिर पूछते हैं। तूने और किस-किस को खपरैल मारकर सुलाया है। तब उसने 2 नाम और लिए। एक अपनी बहन का और एक अपने चाचा के लड़के का। अमरजीत ने कहा मैंने उन दोनों को भी ऐसे ही मार कर सुलाया था।

जो पहले दो कत्ल हुए थे। पुलिस वाले अब उनके परिवार को बुलाते हैं। अमरजीत के मां बाप पहले से ही पुलिस थाने में थे। क्योंकि उनके बेटे से पूछताछ हो रही थी। उसके चाचा को बुलाया जाता है। तब वह पूरी कहानी बताते हैं। करीब 6 और 9 महीने पहले इसने सबसे पहला क़त्ल अपने चाचा के लड़के का किया था। क्योंकि यह घर का मामला था। इसीलिए हमने किसी को बताया नहीं था। दूसरा का दिल इसने अपनी सगी बहन का किया था। जो 6 महीने की थी। हमें यह भी पता था मगर परिवार का मामला होते हुए हमने किसी को नहीं बताया था।

अब पुलिस उस बच्चे से उसी के तरीके से पूछताछ कर रही थी। पुलिस ने पूछा आखिरकार तुमने इन सबको क्यों सुलाया था। अमरजीत ने कहा कि मुझे मजा आता है। उसने कहा कि जब यह डरते हैं और जखम दिखता है। मुझे बहुत अच्छा लगता है। अब यह सारी चीज सुनने के बाद पुलिस को भी लगा कि यह बच्चा नॉर्मल नहीं है। इसके बाद उसकी जांच कराई गई। जांच में पता चला कि इस बच्चे का दिमाग सही नहीं है। उसमें कुछ कमी है।

बच्चे के बारे में मेडिकल रिपोर्ट-

जो मेडिकल रिपोर्ट आई थी। उसमें यह आया था। इस बच्चे के अंदर किसी को तकलीफ में देखना किसी को मुसीबत में देखना और किसी को दर्द में चिल्लाना उसका देखना उसको मजा देता था। क्योंकि इसे मजा आता था। इसलिए यह बच्चा उनको तकलीफ देता था। दिल्ली के AIMS के डॉक्टरों ने भी इस बच्चे की जांच की थी। पटना के तमाम एक्सपर्ट है। उन्होंने भी इसकी जांच की। फिर पता चला कि इस बच्चे के अंदर दिमागी रूप से एक बीमारी है। जिसमें अपने सामने अपने से कम उम्र बच्चों को जब यह देखता है, कि वह रो रहे हैं। उनके जिस्म से खून निकलता है। उसको बड़ा सुकून मिलता है।

पता करने से यह भी पता चला था। यह पहले से ही गुमसुम रहता है। इसको दूसरों को तकलीफ में देखने से मजा आता है। यहां तक कि जब पुलिस वाले उसे पूछताछ कर रहे थे। वह हंस रहा था।इसमें भी उसे मजा आ रहा था। क्योंकि उससे उस बारे में पता कर रहे थे। जिस काम में उसे मजा आया था। फिर मेडिकल टीम की रिपोर्ट आई। इसका दिमागी संतुलन सही नहीं है। इसने एक साथ तीन क़त्ल किये।

 India के Youngest Serial Killer के बारे में अदालत का फैसला-

अब कानून यह कहता है। इस बच्चे की उम्र सिर्फ 8 साल है। यह बालिग नहीं था। अब पुलिस को यह था कि अगर इसे किसी दूसरे बच्चों के साथ रखेंगे। उन बच्चों की जान को भी खतरा है। इसी वजह से पुलिस ने अदालत से दरख्वास्त की और कहा कि इसको किसी अलग कमरे में रखा जाए। इसका दिमाग सही करने के लिए इलाज किया जाए। अदालत के कहने पर उसके लिए एक अलग कमरा तैयार किया गया। उसको वहां निगरानी में रखा गया। यह कहीं  फिर कोई कांड ना कर दे।

इसके बाद एक मेडिकल रिपोर्ट और आई थी। इसको कत्ल करना सही या गलत का पता नहीं  था।  इसलिए उसे कत्ल करना कोई गलत काम नहीं लग रहा था। इसीलिए उसे मज़ा आ रहा था।

3 साल से ज्यादा उसका कैद में नहीं रख सकते थे। लेकिन इस बच्चे की दिमागी हालत को देखते हुए काफी बहस हुई। कहा गया कि अगर 3 साल के बाद उसको छोड़ दिया गया। यह अपनी खुशी के लिए और भी कत्ल कर दे। तीसरी बात यह थी कि जब वह बाहर आएगा। लोग उसको किलर के नाम से बुलाएंगे। वह वैसे ही गुस्से में बेकार हो जाएगा। हो सकता है वह किसी का कत्ल ही कर दे।

इसको मिनी किलर के नाम से तो लोग बुलाने ही लगे थे। आखिर में फिर यह हुआ की 18 साल पूरे होने तक इसको डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। यह रिपोर्ट गोपनीय  थी। कहते हैं, कि 2015 में इसको वहां से छोड़ दिया गया। उसके बाद यह कहां है। किसी को मालूम नहीं है। अब यह एक नए नाम के साथ और एक नई पहचान के साथ रह रहा है। यह एक गोपनीय रखा गया है। क्योंकि अगर इस बारे में किसी को पता चल गया तो फिर वहां पर भी दहशत बैठ जाएगी। इस तरह India के Youngest Serial Killer में अमरजीत का नाम दर्ज हो गया।

इंग्लैंड जैसी जगह पर जहां की पुलिस काफी अच्छी मानी जाती है। वहां पर एक क्राइम होता है। क्राइम होने के बाद जो मुजरिम है। इस देश को छोड़ कर भाग जाता है। वह किसी दूसरे देश में पहुंच जाता है। पुलिस उसे पकड़ने की पूरी कोशिश करती है। मगर पकड़ नहीं पाती। काफी वक्त बीत गया था। आखिर में मां-बाप यह फैसला करते हैं। वह अपनी बच्ची के गुनहगार को पकड़ने के लिए खुद उस देश में जाएंगे। वहां के लोगों से और पुलिस से मदद मांगेंगे। उनका यह फैसला कितना सही साबित होता है। ये Hannah Foster Murder की कहानी है।

ये बात 14 March 2003 की है। यह कहानी इंग्लैंड में एक जगह की है। यह कहानी है 17 साल की एक छात्रा Hannah Foster मेडिसिन की पढ़ाई करना चाहती थी। जो अभी एक स्कूल में थी। जो एक ब्राइट स्टूडेंट थी।

14 मार्च 2003 को Hannah Foster अपने दोस्तों के साथ पार्टी के लिए निकली थी। पार्टी से निकलने के बाद रात करीब 10:50 पर उसका जो दोस्त था। वह बस पकड़कर अपने घर चला जाता है। Hannah Foster पैदल ही घर जाने का फैसला करती है। जहां पर वह पार्टी थी। वहां से Hannah Foster के घर की दूरी तकरीबन आधा किलोमीटर की थी। यहां से Hannah Foster निकल कर अपने घर की तरफ जाती है।

Hannah Foster Murder
Hannah Foster

मगर तभी एक सैंडविच वैन वहां पर पार्किंग में खड़ी थी। अचानक वैन का ड्राइवर देखता है। एक लड़की सड़क पर अकेले जा रही हैं। ड्राइवर ने काफी शराब पी रखी थी। जब लड़की उसके करीब आती है। वह लड़की को जबरदस्ती उठाकर वैन में डाल लेता है। Hannah को जान से मारने की धमकी देता है। इसके बाद वह वहां से वैन कहीं और खड़ी कर देता है।

इधर 15 मार्च की सुबह हाना की मां की आंख खुलती है। वह देखती है, कि Hannah Foster घर में नहीं है। वह उसको कॉल करती है। Hannah के पास रिंग जाती है।वो उठाती नहीं है। उसको को मैसेज करती है। पूछती है, कहां है। लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया।

यह आसपास में पूछते हैं। इसमें काफी वक्त गुजर जाता है। आखिर में सुबह 9:30 बजे Hannah Foster के पिता पुलिस स्टेशन में चले जाते हैं। वहां पर रिपोर्ट लिखवा देते हैं। उनकी बेटी रात से लापता है। पुलिस रिपोर्ट लिखने के बाद पुलिस Hannah Foster की छानबीन शुरु कर देती है। लेकिन कोई सुराग नहीं मिलता। 15 मार्च यूं ही बीत जाता है।

उसके बाद 16 मार्च को इसी शहर के बाहर एक बच्चा सड़क के किनारे झाड़ी में एक लाश देखता है। वह पुलिस को फोन करता है। पुलिस वहां पर पहुंच जाती है। पता चलता है कि यह लाश Hannah Foster की है।

अब Hannah Foster की लाश मिलते ही हड़कंप मच जाता है। जब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आती है। पता चलता है, कि उसका रेप करके कत्ल कर दिया गया है। उसकी मौत गला दबाने से हुई है। पुलिस के ऊपर भी दबाव आ जाता है। वह इसकी तहकीकात शुरू करती है। आसपास के तमाम सीसीटीवी कैमरे चेक करती है। उस जगह के सीसीटीवी कैमरे चेक करती है। जहां पर आखरी बार Hannah Foster को Murder से पहले उसके दोस्तों ने छोड़ा था।

कैमरे से पुलिस को 7 गाड़ी जो वहां से गुजरी थी। उन पर शक हो जाता है। पुलिस छानबीन करती है। लेकिन कोई सुराग नहीं मिलता। इस दौरान वहां के क्राइम शो पर यह खबर आती है। वह पुलिस से मिली हुई खबर को दिखाता है। वह इन गाड़ियों के जो सीसीटीवी फुटेज थे उनको दिखाता है।

इत्तेफाक से उन गाड़ियों को देखकर जो एक एक कर्मचारी है। जल हॉट फूड में काम करता है। वह पहचान लेता है। वह कहता है, कि यह गाड़ी कल रात यहां से निकली थी। वह पुलिस को कॉल कर देता है। अब पुलिस उन 7 गाड़ियों में से 6 गाड़ियों को छोड़ देती है। जब पता किया गया कि इस गाड़ी को कौन चला रहा था। पता चलता है इस वैन के ड्राइवर का नाम Maninder Pal Singh Kohli है। जो एक भारतीय था। इंग्लैंड में 1993 से रह रहा था। वह एक तरीके से इंग्लैंड का नागरिक हो गया था।

अब Hannah Foster के Murder में मनिंदर पाल सिंह कोहली का पहली बार नाम सामने आता है। अभी तक छानबीन में 4 दिन निकल चुके थे। अगले दिन सुबह जब मनिंदर पाल सिंह कंपनी आता है। वह कहता है, कि उसके काफी दर्द है। वह आज काम नहीं कर पाएगा। उसको छुट्टी चाहिए। कंपनी उसके इस दर्द को देखते हुए छुट्टी दे देती है।

इसके बाद वह अपने एक साथी के पास जाता है। उससे कहता है, कि उसकी मां भारत में बहुत बीमार है। मुझे कुछ पैसे दे दो मुझे हवाई जहाज का टिकट खरीदना हैं। उसका दोस्त उसके लिए मना कर देता है। फिर यह वहां अपने घर जाता है। जहां पर इसने शादी की थी। इसके वहां पर दो बच्चे थे। जो इसकी वाइफ थी। वह ब्रिटिस्ट थी। यह वहां से अपने ससुर से मां की बीमारी के नाम पर पैसे ले लेता है।

18 मार्च 2003 को यह इंडिया चला आता है। भारत आने के बाद ही चंडीगढ़ जाता है। चंडीगढ़ से गायब हो जाता है। इसके बाद इसका कोई सुराग नहीं मिलता। अब पुलिस के सामने कई चीजें थी। जब उसकी वैन की पुलिस ने तलाशी ली। पुलिस को कुछ सबूत मिले। वहां पर पुलिस को Hannah Foster के बाल मिले। कुछ नमूने भी वहां से उठाए गए।

इसके बाद पुलिस मनिंदर पाल के घर जाती है। उसके बच्चों से डीएनए टेस्ट करती है। इन दोनों का डीएनए मैच कर जाता है। अब सबूत पुख्ता हो गया था। उस वैन में उस वक्त मनिंदर पाल था।

इसी दौरान में पुलिस को एक और चीज पता चलती है। 14 मार्च 2003 को जब यह वाक्य हुआ। वहां के Emergency नंबर पर एक कॉल आई थी। जो 50 सेकंड तक चली। यह कॉल Hannah Foster ने Murder से पहले की थी। Hannah Foster ने चुपके से वहां के emergency नंबर पर कॉल की थी। मगर मनिंदर पाल की डर की वजह से कुछ बोल नहीं पा रही थी। यह कॉल तकरीबन 50 सेकेंड तक चली। मगर जो उस वक्त वहां ऑपरेटर था। उसने कुछ आवाज ना सुनने की वजह से 50 सेकंड के बाद कॉल काट दी। अगर उस वक्त वह ऑपरेटर इस बात को समझ जाता कि कोई खतरे में है। उस जगह पर पहुंचकर शायद Hannah Foster की जान बचाई जा सकती थी।

Hannah Foster के मोबाइल और बाकी चीज भी पुलिस को बरामद हो गई थी। उसको किसी बैग में लपेटकर झाड़ी में फेंक दिया गया था।

जब तक पुलिस मनिंदर पाल सिंह की सच्चाई को समझ पाती। वह जब तक इंग्लैंड को छोड़ चुका था। वह इंडिया आ चुका था। अब मुश्किल यह थी। इसको कैसे पकड़ा जाए। वहां की पुलिस ने भारतीय पुलिस से संपर्क किया। मदद मांगी मगर शुरुआत में यहां से कोई मदद नहीं मिली। इस वजह से काफी वक्त बीत गया था।

चंडीगढ़ पुलिस ने कुछ तफ्तीश की थी। उसने उसके परिवार का पता किया था। परिवार से पता चला था। वह यहां आया था। मगर वह घर पर नहीं था। वह घर से जा चुका था। उसके बाद वह कहां गया किसी को मालूम नहीं था। जब मनिंदर पाल सिंह England में था। वह पगड़ी पहना करता था। उसका हुलिया बिल्कुल अलग था। हिंदुस्तान आने के बाद उसने अपना होलिया बिल्कुल बदल दिया था। मगर तब तक भारत की मीडिया में Hannah Foster की कोई खबर आई नहीं थी। लोगों को भी कुछ मालूम नहीं था।

इंग्लैंड की पुलिस, Indian पुलिस से मदद मांगती रही। मगर कुछ फायदा नहीं हो रहा था। वक्त बीता जा रहा था। इसी के बाद Hannah Foster के मां-बाप काफी परेशान थे। उनकी बेटी का कातिल कानून से दूर है। यह बात उनको परेशान कर रही थी।

जब उन्हें लगा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा। वह 3 महीने बाद Hannah Foster के मां-बाप ने फैसला किया। वह खुद भारत आएंगे। अपनी बेटी के कातिल को तलाश करेंगे। वह 10 जुलाई 2004 को भारत आ जाते हैं। सबसे पहले यह चंडीगढ़ जाते हैं। चंडीगढ़ में मीडिया से बात करके प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। सारी चीजें बता देते और कहते हैं, कि बेटी के कातिल को सामने लाने में मदद करें। वहां पर कुछ खबरें छपी थी। उसके बाद वह दिल्ली आ जाती।

दिल्ली आने के बाद वे प्रेस क्लब में कॉन्फ्रेंस करती हैं। अपनी पूरी आपबीती बताती है। उसकी बेटी का कत्ल कैसे हुआ था। कातिल भारत आ चुका है। हम उसे तलाश करने के लिए यहां आए हुए हैं। अब उसके बाद तमाम टीवी चैनल और अखबारों में मनिंदर पाल सिंह की तस्वीरें चलनी शुरू हो जाती है।

Hannah Foster के मां-बाप शहरों में जाते। मनिंदर पाल की तस्वीर मीडिया के जरिए लोगो तक पहुंचा दी। इसको ढूंढने में हमारी मदद कीजिए। उस वक्त तक पुलिस ने बाकायदा कोहली की गिरफ्तारी के ऊपर 50 लाख का इनाम घोषित कर दिया था। जो भी कोहली की सूचना देगा उसको 50 लाख का इनाम मिलेगा।

Hannah Foster के मां-बाप के भारत आने के बाद उसकी खबर धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचना शुरू हुई। लोगों को लगा कि एक 17 साल की लड़की का कातिल हिंदुस्तानी है। वह हिंदुस्तान में आकर छुपा हुआ है। Hannah Foster के मां बाप के हिंदुस्तान आने के 5 दिन बाद दार्जीलिंग (वेस्ट बंगाल का एक शहर ) से एक कार ड्राइवर लोकल पुलिस को फोन करता है। जो कि पुलिस से रिटायर हो चुका था। मगर वह कार ड्राइवर उसको जानता था। ड्राइवर जैसे ही यह बात उस पुलिस अफसर को बताता हैv जो रिटायर हो चुका था। उस पुलिस अफसर को भी शक होता है। जिस तरीके से उस ड्राइवर ने बताया था।  एक ब्रिटिस्ट है जो काफी दिनों से यहां रह रहा है। उसे लगता है, कि हो ना हो वह छुपने के लिए यहां आया होगा।

क्योंकि मनिंदर पाल ने अपना पूरा हुलिया बदल लिया था। मगर उसका चेहरा उससे मिल रहा था। वह पुलिस अफसर ड्राइवर से कहता है। मुझे उससे एक बार मिलाओ। इसके बाद पुलिस वाला वहां जाता है और देखता है।

उस पुलिस अफसर को भी लगा कि हां यह वही शख्स है। यह पहली पुख्ता जानकारी सामने आई थी। इसके बाद क्योंकि भारत के मीडिया में यह खबर फैल रही थी।  मनिंदर पाल भी चौकस हो गया था। और दार्जिलिंग से नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था। मगर उस पुलिस अफसर ने उसे पहले ही देख लिया था। वहां के लोकल पुलिस के जरिए मनिंदर पाल को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद शुरू में तो उसने काफी मना किया। मेरा नाम कुछ और है, क्योंकि वहां पर उसने अपना नाम माइक डेविस बताया था।

मगर जब काफी देर तक पूछताछ हुई। उसने स्वीकार कर लिया कि हां वही मनिंदर पाल है। वह यहां इंग्लैंड से भाग कर आया था। पुलिस से बचने के लिए वह Darjeeling में नए नाम से रह रहा था।

इस खुलासे के बाद फौरन Hannah Foster के मां-बाप को पता चल जाता है। वह मीडिया को शुक्रिया कहते हैं। उसको दिल्ली लाया जाता है। दिल्ली लाने के बाद उसको तिहाड़ जेल में रखा जाता है। अब उसको इंग्लैंड भेजने की लड़ाई शुरू हो जाती है। क्योंकि Hannah Foster के मां-बाप वापस उसको लेने के लिए आए थे। इस पर इंग्लैंड में मुकदमा चले। मगर इसी चक्कर में 3 साल बीत जाते हैं।

इसी बीच उसने NDTV इंग्लिश न्यूज़ चैनल को इंटरव्यू में अपना जुर्म कबूल किया था। उसने बताया था कि उस रात मैं एक डिलीवरी के लिए जा रहा था। मैं नशे में था। मैंने देखा कि Hannah Foster अकेली सड़क पर आ रही है।  मैंने उसको पकड़ लिया। उसका बलात्कार किया। मैंने Hannah Foster से कहा था। तुम यह बात पुलिस को नहीं बताओगी। मगर वह नहीं मानी। मैंने उसका गला दबाकर हत्या कर दी।

3 साल के बाद आखिरकार 28 जुलाई 2007 को कोहली को भारतीय अदालत की इजाजत से इंग्लैंड भेजा गया। यह मनिंदर पाल सिंह पहला शख्स था। जिसे इंग्लैंड में भारत से किसी जुर्म के लिए भेजा गया। यह एक इतिहास बन गया था। इंग्लैंड पहुंचते ही वहां की पुलिस मनिंदर पाल को गिरफ्तार कर लेती है। उस पर कत्ल, बलात्कार और अगवा करने का मुकदमा दर्ज हो जाता है।

वहां जाने के बाद यह अपनी कहानी बदल देता है। यह कहता है। मुझे 3 लोगों ने जबरदस्ती उस लड़की का बलात्कार करने के लिए कहा था। मैंने यह मजबूरी में किया था। मगर उसकी यह बातें बेकार चली जाती है। क्योंकि तमाम सबूत उसके खिलाफ थे। आखिरकार लंबा मुकदमा चला। 25 नवंबर 2008 को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। जिसमें कोहली को 24 साल की सजा सुनाई गई। जिसमें से 2 साल उसकी गिरफ्तारी के निकल चुके थे। जो 22 साल बच्चे थे। मगर यह 24 साल बगैर किसी जमानत के थे।

जिस ड्राइवर ने यह मुखबरी दी थी। उसको बाकायदा इनाम के पैसे मिले। उसने दार्जिलिंग में Hannah Foster के नाम से एक स्कूल खोल लिया। यह बात जब Hannah Foster के मां-बाप को पता चली। वह कुछ दिन के बाद भारत आये। उस ड्राइवर से मिले । वह जब भी भारत आते हैं, तो वह उसी ड्राइवर को Hire (रखते ) करते हैं। अपने लोगों से मिलकर उस हेल्प की मदद की।

आज की कहानी “Jassi और Mithu की Love Story” की कहानी है। जिस तरीके से हम फिल्मों में देखा करते थे। अमीरी गरीबी की दीवार, गांव बिरादरी, समाज वह सारी चीजें हैं। मगर यहां पर सरहद भी है। एक तरफ हिंदुस्तान और दूसरी तरफ कनाडा है। यह पहली नजर का प्यार है। उसका जो अंजाम होता है। उसको लेकर कनाडा तक में इंसाफ की मांग उठती है। उन में से एक लगभग 20 साल से सिर्फ इंतजार कर रहा है। वह भी एक चीज के लिए कि जिससे उसने प्यार किया। उसके साथ जो कुछ हुआ। उसके गुनाहगारों को वह एक बार फांसी पर चढ़ते हुए देख ले।

यह कहानी जस्सी और मिट्ठू की है। जस्सी यानी जसविंदर कौर सिद्धू। उसके मां-बाप पंजाब के थे। मगर उसकी पैदाइश कनाडा में हुई थी। वह अरबपति घराने से थी। उसके मां-बाप भी कनाडा में ही रहते थे। दूसरी तरफ मिट्ठू था। जिसका नाम सुखविंदर सिद्धू उर्फ़ मिट्ठू सिद्धू था। यह काउंके कला पंजाब का रहने वाला है। यह गरीब घराने से था। इसने टेंपो भी चलाया था। इन दोनों की यह लव स्टोरी शुरू होती है।

जस्सी और मिट्ठू की मुलाकात और Jassi Mithu की Love Story की शुरुआत-

बात 1994 की है। जस्सी कनाडा से हिंदुस्तान अपने ननिहाल आती है। वह यहां पर घूमने के लिए आई थी। साथ में अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए भी वह यहां आई थी। काउंके कला पंजाब में एक जगह है। वह वहां पहुंच जाती है। काउंके कला पहुंचने के बाद वहीं पर उसकी मुलाकात पहली बार मिट्ठू से होती है।

jassi mithu love Story
जस्सी और मिट्ठू

जब वह गांव आई क्योंकि गांव में टेंपो चलते हैं। वह उसी टाइम टेंपो में अपनी मां और मौसी के साथ बैठी हुई थी। टेंपो में वह पीछे की तरफ बैठी हुई थी। उसी वक्त वहां एक स्टैंड पर खड़ा हुआ मिट्ठू। क्योंकि उसे भी उसी गांव जाना था। वह भी काउंके कला का ही रहने वाला था। दौड़कर वह भी टेंपो में चढ़ जाता है। वह टेंपो के पीछे लटक जाता है।

उसी टेंपो पर दोनों की पहली मुलाकात होती है। दोनों की नजरें मिलती है। मिट्ठू का कहना था कि पता नहीं उस पहली मुलाकात में कुछ ऐसा हुआ कि यह दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं। इसके बाद टैंपू अपनी मंजिल पर पहुंचता है। दोनों उतर जाते हैं। इत्तेफाक से जस्सी के नानी के घर का एक दरवाजा मिट्ठू के घर के पास ही खुलता था।

अगले दिन जस्सी गांव का दौरा करने के इरादे से स्कूटी उठाती है। इत्तेफाक से स्कूटर खराब हो जाता है। उसको इत्तेफाक से मिट्ठू मिल जाता है। वह उस स्कूटर को सही कर देता है। फिर दोनों में मुलाकात होती है। इसके बाद जस्सी अपनी मौसी के साथ एक साड़ी की दुकान में जाती है। मिट्ठू भी उसका पीछा करता हुआ वहां पहुंच जाता है। वहां पर भी वे दोनों मिलते हैं। जस्सी मुस्कुराती है। चुपचाप से वह कॉफी पी रही थी। वह मिट्ठू की तरफ कॉफी भी बढ़ा देती है। इस तरीके से इन दोनों की बातचीत का सिलसिला शुरू हो जाता है।

जस्सी और मिट्ठू का प्यार का इज़हार-

कुछ वक्त के बाद दोनों एक दूसरे से इजहार भी कर देते हैं। जस्सी और मिट्ठू दोनों एक दूसरे से साफ-साफ कह देते हैं। वह एक दूसरे से प्यार करते हैं। धीरे-धीरे यह दोनों इसी ख्वाब की जिंदगी में जी रहे थे। Jassi Mithu की Love Story सही चल रही थी। अचानक जस्सी के लौटने का दिन आ जाता है। उसे कनाडा वापस जाना था। क्योंकि वह वहां पर पढ़ाई कर रही थी। उसे वहां पर पढ़ाई करके वकील बनना था। जब जाने की बात आती है। मिट्ठू उदास हो जाता है। यहां तक कि जस्सी भी नहीं जाना चाहती थी। इस वजह से वह अपना पासपोर्ट फाड़ देती है। ताकि वह वहां पर ना जा पाए।

मगर जस्सी के घर वाले अमीर थे। इस वजह से 15 दिन के अंदर पासपोर्ट तैयार हो जाता है। ना चाहते हुए भी जस्सी को पंजाब से कनाडा जाना पड़ता है। जिससे Jassi Mithu की Love Story  बीच में रह जाती है। मगर जस्सी मिट्ठू से इस बात का वादा करती है। वह जल्दी वापस आएगी। दोनों शादी करेंगे और वापस जाकर कनाडा में ही बस जाएंगे। उसके जाने के बाद एक दोनों खत से संपर्क में रहते हैं। क्योंकि बात 1994 की है। उस वक्त सोशल मीडिया का जमाना नहीं था। टेक्नोलॉजी इतनी आगे की नहीं थी।

इसके अलावा गांव में एक PCO भी था। उस PCO पर महीने में एक बार जस्सी का फोन आता था। क्योंकि जस्सी ने खत के जरिए मिट्ठू को वक्त का बता रखा था। इस वजह से पाबंदी के साथ मिट्ठू वक्त पर वहां पहुंच जाया करता था। दोनों में काफी बात हुआ करती थी। धीरे-धीरे वक्त बीतने लगा करीब 5 साल बीत जाते हैं।

जस्सी और मिट्ठू का छुप के शादी करना-

1999 में वह दोबारा वापस आती है। इसी दौरान पता चलता है, कि जस्सी के घरवाले उसके लिए लड़का देख रहे हैं। उसकी शादी हो जाएगी। यह बात वह मिट्ठू को बताती है। फिर दोनों तय करते हैं। वह गुपचुप तरीके से शादी कर लेंगे। उसके बाद वे दोनों एक गुरुद्वारे में जाकर शादी कर लेते हैं। 15 मार्च 1999 को दोनों की शादी हो जाती है। मगर इस शादी के राज को दोनों छुपा कर रखते हैं।

जस्सी मिट्ठू से वादा करती है। वह उसको कनाडा बुलाएगी और दोनों साथ रहेंगे। इसी वादे के साथ जस्सी कनाडा वापस लौट जाती है। उसके बाद भी फोन पर बात जारी थी। इसके बाद जस्सी मिट्ठू के कागज तैयार करने की कोशिश करती है। वह वहां से Apply कर देती है। इधर मिट्ठू के पास गांव में पेपर आ जाते हैं।

शादी के राज का पता चल जाना-

इसी दौरान मिट्ठू का एक खास दोस्त जो उनकी शादी का गवाह था। यह राज जस्सी के ननिहाल में बता देता है। वह बताता है, कि इन दोनों ने 15 मार्च 1999 को एक गुरुद्वारे में शादी की है। यह बात जस्सी के मामा को पता चल जाती है। जस्सी के मामा एक अमीर शख्स थे। उसी गांव के रहने वाले थे। जब उनको यह बात पता चलती है। फिर हैसियत बीच में आ जाती है। उनको बहुत गुस्सा आता है। फिर जस्सी के मां-बाप को बता दिया जाता है।

मिट्ठू पर झूटी FIR-

फिर मां के इशारे पर यह कहा जाता है, कि की शादी को खत्म करके इन को अलग कर दिया जाए। पहला कदम यह उठाया जाता है, कि अपनी हैसियत का इस्तेमाल करते हुए जस्सी के मामा मिट्ठू के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट लिखवा देते हैं।

रिपोर्ट ये थी कि मिट्ठू ने जस्सी के साथ जबरदस्ती करके शादी की है। जस्सी के मामा का नाम सुरजीत सिंह था। वह पुलिस वाले को पैसा देते हैं। पुलिस वाले मुकदमा दर्ज कर लेते हैं। इसके बाद पुलिस मिट्ठू और उसके दोस्त को गिरफ्तार कर लेती है। इसके बाद इस गिरफ्तारी की खबर कनाडा में बैठी हुई जस्सी को मिल जाती है। जस्सी किसी तरीके से नंबर का इंतजाम करती है। कनाडा से ही पुलिस को एक फैक्स कर देती है। वह बताती है, कि मिट्ठू ने उसके साथ जबरदस्ती शादी नहीं की है। हम दोनों ने अपनी मर्जी से शादी की है। हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। उसने मुझे कभी भी भगवा नहीं किया।

मिट्ठू को पुलिस द्वारा परेशान करना-

इसके बाद पुलिस वालों को मजबूरी में मिट्ठू और उसके दोस्तों को छोड़ना पड़ा। मगर पुलिस अलग तरीके से परेशान करने लगी। इधर जस्सी के रिश्तेदार मिट्ठू पर लगातार दबाव बनाने लगे। उसके ऊपर ड्रक्स का इल्जाम लगाया। उसके भाई के ऊपर चोरी का इल्जाम लगा दिया। यहां तक कि एक बलात्कार का इल्जाम लगा दिया। उन्होंने एक लड़की को तैयार किया था। उससे पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई थी। कि मिट्ठू ने उसके साथ बलात्कार किया है। बलात्कार के इल्जाम में मिट्ठू को गिरफ्तार कर लिया जाता है। मगर तकदीर देखिए जिस लड़की ने मिट्ठू पर यह इल्जाम लगाया था। जब उसे मिट्ठू और जस्सी की कहानी पता चलती है। वह इमोशनल हो जाती है। वह फिर पुलिस में जाकर कहती है। मुझसे दबाव देकर झूठी गवाही और झूठा मुकदमा बनवाया गया। मिट्ठू ने मेरा कोई बलात्कार नहीं किया है। इसके बाद मिट्ठू को छोड़ दिया जाता है।

जस्सी का मिट्ठू को छुड़ाना-

इसी दौरान जब मिट्ठू और उसके रिश्तेदार को परेशान किया जा रहा था। मिट्ठू बार जेल में बंद था। जस्सी से रहा नहीं गया। उसने तय किया कि वह भारत वापस आएगी। इस बार अपने प्यार को वापस लेकर जाएगी। मुसीबत में उसका साथ देगी। वह वापस पंजाब आ जाती है। आने के बाद वह बाकायदा पुलिस और अदालत में जाकर कहती है। हम दोनों ने शादी की है। मेरे घरवाले बगैर मतलब के इसको झूठे इल्जाम हमें परेशान कर रहे हैं।

इसके बाद पुलिस को मिट्ठू को छोड़ना पड़ा था। मगर इसके बाद जस्सी ने अपने घर वालों को ही दुश्मन बना लिया था। इसके बाद मिट्ठू और जस्सी की जान पर खतरा बन जाता है। इन दोनों को मारने की बात आ जाती है। मिट्ठू के घर वाले इसके बाद उसे वहां से निकाल देते हैं। इसके बाद वे दोनों अलग-अलग जगह पर भटकते रहते हैं।

इसके बाद मिट्ठू के रिश्तेदार उसकी मदद करते हैं। मलेर कोटला एक जगह है। वहां पर उनको रहने के लिए भेज देते हैं। दोनों वहां पर छुप कर रह रहे थे। एक दिन जस्सी कहती है। मैं काफी थक गई हूं और बोर हो रही हूं। मुझे तुम्हारे साथ स्कूटी पर बाहर घूमना है। मिट्ठू के रिश्तेदार उनको समझाते हैं। जस्सी के मामा लगातार तुम्हें तलाश कर रहे हैं। मगर मिट्ठू जस्सी की बात को नहीं टालता है। वह जस्सी की खुशी के लिए जस्सी को स्कूटर पर बिठा कर निकल जाता है।

जस्सी और मिट्ठू पर हमला-

थोड़ी दूर के बाद मलेर कोटला के बाहर उन्हें एक गाड़ी दिखाई देती है। जो एक अजीब सी गाड़ी थी। मिट्ठू उन्हें देखकर अपनी गाड़ी रोक लेता है। वह सोचता है, कि शायद कुछ हो गया है। उन्हें मदद की जरूरत है। बिट्टू जैसे ही गाड़ी रोकता है। जीप के पीछे से 2 लोग आते हैं। उनके हाथ में तलवार थी। उनके आने के बाद पीछे से और चार पांच लोग आ जाते हैं। वह मिट्ठू पर टूट पड़ते हैं। मिट्ठू अब उनकी तलवार की जद में था। वह खून से लथपथ हो गया था। जस्सी लगातार मदद मांग रही है। मगर वहां कोई मदद के लिए नहीं था।

जब उन्हें लगा कि मिट्ठू का मर चुका है। वह जस्सी को उठाकर गाड़ी में डाल कर ले जाते हैं। जो चार्जशीट और F.I.R है। उसके हिसाब से जब वह जस्सी को लेकर निकले। उन्होंने जस्सी की बात उसकी मां से कराई थी। जस्सी रो रही थी। यह बार-बार कह रही थी कि मां मैं आपको नहीं छोडूंगी।  मैं आपके इस राज को पास कर दूंगी। मैं पुलिस में सब कुछ बताऊंगी। मां फिर उन लोगों से कहती है। थोड़ी देर के बाद फिर दोबारा बात करना। इसके बाद वह बात कराते है। जस्सी फिर उसी बात को दोहराती है।

जस्सी का क़त्ल-

जब जस्सी की मां को लगा कि यह मानेगी नहीं। जस्सी की मां ने उन 7 लोगों से कहा कि जस्सी को भी मार डालो। इसके बाद वह जस्सी को लुधियाना के पास एक फार्म हाउस में ले जाते हैं। वहां जाने के बाद तलवार और बीयर की बोतल से जस्सी का गला काट देते हैं। इसके बाद उसकी लाश को वही नदी में फेंक देते हैं।

इधर गलती से वह मिट्ठू को मुर्दा समझ कर गए थे। मगर मिट्ठू तब तक जिंदा था। उधर से 2 लोग गुजर रहे थे। जब उन्होंने देखा कि मिट्ठू खून से लथपथ है। वह उसको उठाकर अस्पताल ले गए। लगभग 15 दिन तक मिट्ठू कोमा में था। जब 15 दिन के बाद उसे होश आया। होश आने के बाद उसने पूछा जस्सी कहाँ है। उसके रिश्तेदारों ने बताया कि उस दिन के बाद से उसका कुछ पता नहीं है। इसके बाद इस ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई। मेरे ऊपर हमला हुआ था। वह लोग जस्सी को उठाकर ले गए।

जस्सी की लाश मिलना-

इसके बाद इधर जस्सी की लाश मिल जाती है। लाश मिलने के बाद मिट्ठू बदहवास हो जाता है। वह पुलिस में रिपोर्ट लिखवा देता है। उसके कहने पर पुलिस छानबीन करती है। अलग-अलग लोगों को गिरफ्तार करती है। पकड़ने के बाद पता चलता है। जस्सी की मां मलकीत जो कनाडा में थी। जस्सी के मामा सुरजीत सिंह इन दोनों ने मिलकर इस प्लानिंग को अंजाम दिया था। उन लोगों ने 7 लाख में मिट्ठू की सुपारी ली थी।

उस वक्त मलेर कोटला इलाके में एक इंस्पेक्टर हुआ करता था। यह कहा गया था कि अगर तुम इसकी लाश को यहां पर डाल दोगे। उस केस को मैं खुद संभाल लूंगा। इसी वजह से मिट्ठू की लाश को वहां पर फेंका गया था। जिसको मुर्दा समझ कर छोड़ गए थे। उस पुलिस इंस्पेक्टर को भी गिरफ्तार किया गया था। जिन्होंने 7 लाख में मिट्ठू की सुपारी ली थी। आखिर में जब जस्सी की मां ने कहा था। जस्सी को भी खत्म कर दो। सुपारी की रकम दोगुना हो गई थी। यानी 7 लाख से 14 लाख हो गई थी।

कातिलों की गिरफ्तारी-

इसके बाद इन को गिरफ्तार किया जाता है। वह सब बताते हैं, कि उनको सुपारी सुरजीत सिंह ने दी थी। उनमें से एक बताता है, कि उन्होंने जस्सी की मां से उसकी बात कराई थी। जस्सी कि मां ने ही फोन पर बताया था। कुछ देर के बाद कॉल करके बताऊंगी जस्सी का क्या करना है । जब दोबारा कॉल किया था। यह कहा था, कि जस्सी को भी मार डालो। उसकी मां के कहने पर ही हमने जैसी को मारा था।

इसके बाद सुरजीत सिंह और जस्सी की मां इसमें मुलजिम हुए। उस इंस्पेक्टर को भी गिरफ्तार किया गया। क्योंकि जस्सी की मां और मामा कनाडा में थे। इस इंस्पेक्टर और उन लोगो को उम्र कैद की सजा हो गई। लेकिन मामा और मां कानून के शिकंजे से दूर कनाडा में थे। फिर कानून लंबी लड़ाई चलती रही। मिट्ठू अदालत के चक्कर काटता रहा। मिट्ठू ने यह तय कर लिया था। वह अपनी जस्सी के गुनहगारों को किसी कीमत पर नहीं बख्सेगा।

उसकी कहानी मीडिया के जरिए अलग-अलग जगह पर आई। यहां तक की बात कनाडा तक पहुंच गई। इसके बाद Justice For Jassi एक मुहिम चल गई थी। वहां के अखबारों और मीडिया में यह बात सामने आई। जिससे Jassi और Mithu की Love Story की कहानी वहां पर छपने लगी। उसको लेकर पब्लिक में गुस्सा शुरू हो गया। कनाडा की सरकार पर इतना दबाव पड़ा उन दोनों को भारत भेजने पर मजबूर हो गए।

इधर CBI और पंजाब पुलिस के कहने पर सरकार ने जस्सी के मामा और मां को भारत को सौंपने की अर्जी दी। सालों तक यह बात ऐसे ही लटकी रही। क्योंकि इसमें कनाडा की पुलिस आ गई थी। वह कह रही थी। भारत की पुलिस की जो रिपोर्ट है। उसमें कुछ कमी है। इसके बाद मामला अदालत में चला गया। इधर जस्सी को इंसाफ देने के लिए लगातार दबाव पड़ रहा था।

अदालत का फैसला-

इसके बाद अदालत ने फैसला किया कि इन दोनों ने जो गुनाह किया है। इनकी उनको सजा मिलनी चाहिए। इसलिए इनको भारत भेजना चाहिए। आखिरकार करीब 18 साल के बाद कानून की जीत हो जाती है। इसके बाद मलकीत कौर और सुरजीत सिंह जस्सी के मामा और मां उन दोनों को भारत भेजा जाता है। वह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते हैं। पंजाब पुलिस की टीम वहां पर पहुंच जाती है। वह उनको लेकर पंजाब आ जाती है। उनके खिलाफ अगवा करना, कत्ल करना, और साजिश रचने के तहत मुकदमा दर्ज हो जाता है। अब यह दोनों जेल में है। क्योंकि यह लंबे वक्त से भागे हुए थे। इन दोनों पर मुकदमा चल रहा है।

जाँच करने वाले अधिकारी को रिशवत देना-

उस वक्त जो इस मामले की जांच कर रहे थे। जिन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर को भी गिरफ्तार किया था। उनका कहना था कि जब वह इस केस की जांच कर रहे थे। जस्सी के मामा और मां कनाडा में थे। तब उन्होंने इस पुलिस अफसर के पास एक ब्लैंक चेक भेजा था। उन्होंने कहा था। इस चेक में जितनी रकम चाहो तुम भर सकते हो। बस तुम्हारा काम इतना है, कि इस केस को हल्का कर दो यहां तक कि खत्म ही कर दो। तब इस पुलिस अफसर ने कहा था। पंजाब पुलिस का हर पुलिस वाला बिकाऊ नहीं होता। उस बैलेंस चेक को छोड़ दिया था।

मिट्ठू को रिशवत देना-

जब लगा कि मिट्ठू नहीं मानेगा। मिट्ठू को भी यही ऑफर दिया गया था। यह ऑफर 2012 में दिया गया था। उसे 14 एकड़ जमीन बहुत अच्छी जगह पर और एक करोड रुपए कैश। यह ऑफर उसको पंजाब के लोकल MLA के जरिए दिया गया था। मिट्ठू का जवाब था। जिस हैसियत का मैं हूं। जिस हैसियत की जस्सी थी। हम दोनों में जमीन आसमान का फर्क था। मगर जस्सी ने इस फर्क को किनारे करते हुए मुझसे मोहब्बत की और शादी की।

उसने मेरे लिए जो कुछ किया। वह अहसान मैं कभी नहीं भूलूंगा। यह चाहे कितने करोड़ रुपए  ही क्यों ना हो उसकी कीमत की भरपाई नहीं हो सकती। मिट्ठू ने इस ऑफर को ठुकरा दिया। आज इस मामले को करीब 21 साल हो चुके हैं। मिट्ठू आज भी पंजाब में है। आज भी वह अदालत के चक्कर काट रहा है। उसकी सिर्फ एक तमन्ना है, कि जस्सी के कातिल को फांसी की सजा मिले। वह यह देखना चाहता है, तो ये Jassi और Mithu की Love Story थी।

यह कहानी 1990 की नागपुर की है। यह Gangster Akku Yadav की कहानी है। उस वक्त भी काफी क्राइम हुआ करता था। नागपुर में एक इलाका कस्तूरबा नगर, जहां के लोग काफी परेशान थे। इस बस्ती में करीब 300 परिवार रहा करते थे। सब छोटा-मोटा काम किया करते थे। ज्यादा पैसा उनके पास नहीं था। मगर अपनी जिंदगी जी रहे थे।

मगर 1990 के दशक में एक शख्स वहां पर उठता है। जिसका नाम भारत कालीचरण था। मगर भारत कालीचरण के नाम से लोग उसे कम जानते थे। जब तक वह छोटा था। क्राइम की दुनिया में नहीं आया था। तब तक लोग उसे भारत कालीचरण कहा करते थे। मगर  जुर्म की दुनिया में कदम रखने के बाद उसका नाम बदल गया। उसका नया नाम Akku Yadav रखा गया।

धीरे-धीरे छोटे-मोटे क्राइम करते-करते बड़े क्राइम करने लगा। उसके पीछे पुलिस का भी हाथ था। लोकल लीडर का भी हाथ था। वह उसको अपने फायदे के लिए बढ़ावा दिया करते थे। उसके बाद वह बेलगाम होता चला गया। खासतौर से इस बस्ती में उसके आतंक और खौफ का परचम लहराने लगा। जब जो मन में आता वह कर दिया करता था। कोई सुनवाई भी नहीं हुआ करती थी। पूरी बस्ती में खासतौर से औरतों पर उसकी गंदी नजर हुआ करती थी।

जब उसे लगा कि वह ताकतवर हो गया है। पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। इसके अलावा जो नेता है। उनका हमेशा उसके सर पर हाथ है। धीरे-धीरे उसका हौसला इतना बढ़ गया। उसने इस बस्ती की औरतों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया। एक-एक करके उसने इस बस्ती की औरतों को अपना हवस का शिकार बनाया। बेचारी बहुत सारी औरत, पुलिस के पास गई। मगर पुलिस वालों ने कोई मदद नहीं की। एक औरत के साथ जब इस ने रेप किया। उस औरत ने शर्म की वजह से खुद को तेल डालकर जला लिया था। वह बाकी बस्ते के लोगों से नजर नहीं मिला पा रही थी।

gangster akku yadav
अक्कू यादव

Gangster Akku Yadav ने करीब 10 साल के अपने इस आतंक के दौर में तकरीबन 40 से ज्यादाऔरतों को अपनी हवस का शिकार बनाया। कई औरतों को तो उसने रेप करने के बाद चाकू से गोदकर मार डाला। जो वहां का थाना था। वहां पर Gangster Akku Yadav के खिलाफ दर्जनों शिकायत दर्ज थी। लेकिन पुलिस ने कभी कुछ नहीं किया। इससे उसका हौसला बढ़ता चला गया।

बस्ती के लोगों का कत्ल करना औरतों का बलात्कार करना उसकी आदत बन गई थी। एक दौर यह आया जब Akku Yadav बस्ती में आया करता था। बस्ती की औरतें अपने घरों में छिप जाया करती थी। मर्द उससे नजरें नहीं मिलाया करते थे। क्योंकि पता नहीं वह कब किसको मार डाले। जो बच्ची थी और बड़ी हो रही थी। उनके मां-बाप अक्कू यादव और उसके आदमियों से हमेशा उनको बचा कर रखा करते थे। जुल्म अपने चरम पर था। अब कोई यादव की यह दरिंदगी चलती रहे। इन 10 सालों में न किसी नेता न किसी पुलिस वाले ने कुछ किया।

ऐसा लगने लगा कि शायद यह इस बस्ती की तकदीर बन गई है। मगर तभी अचानक एक हादसा होता है। 10 साल के बाद 2004 में जो इस बस्ती में परिवार रहते थे। उनमें से एक परिवार मधुकर और उसकी पत्नी अलका इसी बस्ती में रहती थी। इन 300 परिवारों में से एक लौता परिवार था। जिसने अपने बच्चे को पढ़ने के लिए बस्ती से बाहर निकाला।

मधुकर और अलका चाहते थे। उनकी बच्ची उसे पढ़ लिखकर कुछ बने। इसी लिए वह अपनी कमाई का ज्यादातर हिस्सा उस पर खर्च कर रहे थे। उषा ने कॉलेज में जाकर होटल मैनेजमेंट का कोर्स करना शुरू किया। क्योंकि वह शुरू से ही होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के लिए कहा करती थी।

कुछ लोगों ने अक्कू यादव के खिलाफ आवाज भी उठाई थी। मगर उनकी लाशें रेलवे ट्रैक के पास पड़ी हुई मिली थी। अक्कू यादव की दहशत पूरी बस्ती में बैठ गयी थी।

इधर उषा के कॉलेज की छुट्टी होने के बाद बस्ती वापस आ जाती है। इत्तेफाक से जब उषा घर आई हुई थी। Gangster Akku Yadav के कुछ लोग जो उसके घर के बराबर में एक परिवार रहता था। उसने पुलिस में कुछ शिकायत कर दी थी। जब अक्कू यादव के लोगों को यह बात पता चली। वह वहां पहुंचकर उषा के पड़ोस में रहने वाले घर पर हमला कर देते हैं। मूसा उस वक्त घर के अंदर थी। जब पड़ोसी चिल्ला रहे थे। वह बाहर आती है। वह देखती है, कि बहुत सारे लोग गुंडागर्दी कर रहे हैं। उनके पड़ोसी को पीट रहे हैं। वह उनके बीच में आ जाती है। उषा काफी बहादुर थी। उसे लगा कि यह तो जुल्म है। उसने उन लोगों को धमकाया।

उषा अपने घर वापस आकर पुलिस को कॉल कर देती। वह 100 नंबर पर कॉल करके पुलिस को वहां बुला लेती है। जब पुलिस आती है, तो अक्कू यादव के लोग डर जाते हैं। देख लेने की धमकी के साथ वहां से वापस चले जाते हैं। उनके जाने के बाद Gangster Akku Yadav को जब यह बात पता चलती है। बस्ती की एक लड़की ने पुलिस को बस्ती में बुलाया। यादव कुछ घंटे के बाद करीब 50 लोगों को लेकर बस्ती में वापस आता है। वह उषा के घर के बाहर आकर खड़ा हो जाता है। एक बोतल तेजाब से भरी हुई उषा के घर के दरवाजे पर मार देता है। उसके बाद घरवालों को गाली देकर बुलाते हैं।

उषा के घर वाले बाहर आते हैं। वह कहता है, कि अगर आज के बाद तुम ने पुलिस को कॉल किया। हमारे बीच में आई तो तुम्हारा भी रेप कर दिया जाएगा। तुम्हारे मां बाप को मार दिया जाएगा। उसने उसकी बात का पलट कर जवाब दिया। उसने कहा तुम अभी रुको मैं पुलिस को फोन करके बुलाती हूं। Gangster Akku Yadav ने फिर धमकी दी। मगर वह अंदर फोन करने के लिए चली गई। उषा को फोन करने से रोकने के लिए तब तक कुछ लोग घर के अंदर घुस आए थे। उषा तब भी नहीं रुकी। उसने घर के गैस का सिलेंडर खोल दिया। माचिस हाथ में ले ली। उसने कहा अगर तुम में से एक भी आगे आया। मुझे हाथ लगाया। मैं माचिस की तीली जला दूंगी। सिलेंडर फट जाएगा। तुम सब भी मारे जाओगे। अक्कू यादव समेत सारे लोग घबरा गए थे।

इसी दौरान में बस्ती के लोग भी अपने घरों से देख रहे थे। उषा लगातार माचिस हाथ में लिए उनको धमका रही थी। इस बहादुरी को देखते हुए पहली बार अक्कू यादव की हालत खराब हो जाती है। वह अपने लोगों को साथ लेकर वापस चला जाता है। यह एक मामला कस्तूरबा नगर बस्ती की तकदीर को पलट देता है। पहली बार बस्ती के लोगों ने देखा कि Gangster Akku Yadav इतने लोगों को लेकर आया। एक लड़की की धमकी के वजह से अपने आदमी को लेकर वापस चला गया।

बस्ती के लोगों को लगा Gangster Akku Yadav भी डर सकता है। जब उसे एक लड़की डरा सकती है। हम क्यों नहीं डरा सकते। यहां से बस्ती के लोगों को हौसला मिल गया। इसके बाद वह सारे बस्ती वाले इखट्टा होते हैं। कहते, हैं कि हम इतने सालों से जुल्म सह रहे हैं। कब तक सहेंगे। अब बहुत हो चुका है। हमें अक्कू यादव का मुकाबला करना चाहिए।

अब उन्होंने फैसला कर लिया था। उनको अक्कू यादव का मुकाबला करना है। अगले दिन यह लोग इकट्ठा हो जाते हैं। इन्हें मालूम था कि, अक्कू यादव घर पर ही है। यह अक्कू यादव के घर पर धावा बोल देते हैं। मगर अक्कू यादव उस वक्त वहां मौजूद नहीं था। उसके घर को आग लगा देते है। अक्कू यादव के गुंडे वहां पर मौजूद थे। गांव वालों को देखकर उनकी भी हालत खराब हो जाती है। वहां से भागने लगते हैं। उनको गांव वाले पीटते हैं, लेकिन अपनी जान बचाकर वहां से मैं भाग जाते हैं। अक्कू यादव का घर जला दिया गया था। भागते हुए लोगों से गांव वालों ने कहा था। अगर अक्कू यादव हमें अब दिखा तो हम उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

जब यह बात शाम को कोई यादव के कानों में पहुंचती है। वह घबरा जाता है। उसे लगता है, कि शायद गांव वाले उसे नहीं छोड़ेंगे। वह सोचता है, कि कुछ दिनों के लिए माहौल शांत कर दिया जाए। उसे लगता है, कि गांव वाले उसे ढूंढ कर मार देंगे। वह अपनी जान बचाने के लिए पुलिस स्टेशन पहुंचकर अपने आप को सरेंडर कर देता है। उसने सरेंडर इसलिए नहीं किया था। वह सजा भुगतना चाहता था। उसने सिर्फ गांव वालों से बचने के लिए पुलिस को सरेंडर किया था।

गांव वालों को इस बात का पता चल गया था। गांव वालों को लगा कि वह जान बचाने के लिए गया है। मगर वह किसी भी दिन जमानत पर आकर किसी से भी बदला ले सकता है। यह बात गांव वालों को समझ आ गई थी।

तभी एक पेशी की तारीख आती है। यह तारीख 13 अगस्त 2004 थी। नागपुर के जिला अदालत में अक्कू यादव को पेश होना था। गांव वाले तक खबर वकीलों के जरिए पहुंच गई थी। शायद इस पेशे के दौरान अक्कू यादव को जमानत मिल जाए। वह रिहा हो जाएगा। रिहा होने के बाद वह गांव वालों से बदला लेगा।

यह खबर 12 अगस्त 2004 की है। जब गांव वालों को यह बात पता चली थी। गांव वालों को पता था कि आपको यादव को 13 अगस्त 2004 को दोपहर में 7 नंबर पर पेश होना है। इस बात से गांव-गांव की औरतों के दिलों में आग भर गई। कि वह कैसे बाहर आ सकता है। पूरे गांव ने एक बैठक की और उन्होंने तय किया कि अब अक्कू यादव का फैसला अब अदालत नहीं करेगी। अक्कू यादव का फैसला अब हमें करना है।

13 अगस्त 2004 को कस्तूरबा नगर बस्ती की 200 औरतें अदालत पहुंच जाती है। इन सभी औरतों के हाथ में लाल मिर्च का पाउडर था। सभी औरतों के हाथ में चाकू था। जिस तरीके का भी नुकीला हथियार था। उसको अपने साथ ले लिया था। उन सबको उन्होंने अपने कपड़ों के अंदर छुपाया हुआ था। वह अदालत पहुंच गई। पुलिस को जब तक इस बारे में कुछ भनक नहीं थी।

जब पुलिस वालों ने इन सब को देखा तो वह भी चौंक गए। इन औरतों ने बताया कि हम सिर्फ तारीख पर आए हैं। औरतों को यादव के खिलाफ गवाही देनी है। पता चला की गवाही ऐसे नहीं दी जाती। उसके लिए तारीख होती ।है मगर पुलिस को इनके इरादों के बारे में कुछ भी शक नहीं था। दोपहर को लंच के बाद अक्कू यादव की सुनवाई थी। शायद उस को जमानत मिल जाती। लंच के बाद पुलिस को यादव को लेकर अदालत पहुंच जाती है।

जब अक्कू यादव अदालत के अंदर जा रहा था। मगर उन्होंने अभी तक कुछ नहीं किया था। मगर अचानक चलते-चलते अक्कू यादव की नजर उन औरतों में से एक औरत पर पड़ती है। यह वही औरत थी। जिसका अक्कू यादव पहले बलात्कार कर चुका था। उसको देखते ही अक्कू यादव कहता है। तू वेश्या है। तब तक औरतें शांतिपूर्ण तरीके से खड़ी हुई थी। शायद वह अदालत के फैसले का इंतजार कर रही थी। उसके बाद कुछ कदम उठाती।

जैसे ही अक्कू यादव ने उस औरत के बारे में यह बात कही। जिसका वह पहले भी रेप कर चुका था। उस औरत को बहुत गुस्सा आ गया। उसने अपना चप्पल निकालकर पुलिस के बीच ही उसको चप्पल से मारना शुरू कर दिया। जैसे ही वह उसको चप्पल मार रही थी। पुलिस उसको हटाने लगी। उन 200 औरतों के लिए यह मौका सही था। अब अचानक वे औरते पुलिस और अक्कू यादव को घेर लेती है। वह जो लाल मिर्च का पाउडर लेकर आई थी। वह पुलिस वालों की आंखों में डाल देती है। ताकि वह कुछ देख ना सके।

क्योंकि पुलिस वालों की आंखों में मिर्च का पाउडर जा चुका था। वे परेशान हो गए थे। तभी वे औरतें अक्कू यादव की आंख में मिर्च का पाउडर डाल देती है। अपने हाथों में खंजर जो लेकर आई थी। वह निकाल लेती है। अक्कू यादव को जब खंजर नजर आते हैं। वह अपनी जान बचाकर भागने की कोशिश करता है। मगर औरते उसे घेर लेती है। मगर कोर्ट के अंदर जितना जिसको मौका मिला अक्कू यादव को दौड़ा-दौड़ा कर चाकू मारती है। अदालत का कमरा और दीवार अक्कू यादव के खून से लथपथ हो जाता है।

5 मिनट तक जिसको जरा सा मौका मिला उसने अक्कू यादव को उस तरीके से मारा। 5 मिनट से ही कम वक्त में अक्कू यादव का फैसला हो चुका था। 7 नंबर के कमरे में फैसला होना था। उस कमरे से थोड़ा ही बाहर जज की बजाय उन 200 औरतों ने अक्कू यादव का फैसला किया। जो 10 साल तक उसका जुल्म सहती रही।

यह सब होने के बाद पुलिस फोर्स वहां पर पहुंची जाती है। मगर सब औरते जा चुकी थी। मगर पुलिस को उषा की कहानी मालूम थी। क्योंकि पुलिस को अक्कू यादव ने बताया था। पुलिस ने इस मामले का जिम्मेदार उषा को ही बना दिया। क्योंकि इस भीड़ में तो किसी को पहचानना मुमकिन नहीं था। उषा का पुलिस को पता था। उसी को पुलिस ने मुजरिम मान लिया। जैसे ही पुलिस ने उषा को गिरफ्तार किया। उसके साथ कुछ औरतों को भी गिरफ्तार किया था। जैसे ही यह खबर बस्ती के लोगों तक और आसपास की बस्ती तक अखबारों के जरिए पहुंची तो पूरा नागपुर गुस्से में आ गया।

जिस शख्स ने सालों तक बस्ती वालों पर जुल्म किया। आज उसी के क़त्ल में उस लड़की को गिरफ्तार किया गया। जिसने बस्ती वालों का हौसला बढ़ाया। इस बात से गुस्सा  लोगों ने पुलिस थाने के सामने धरना प्रदर्शन किया। जिससे मजबूर होकर पुलिस ने उषा को आजाद कर दिया। क्योंकि अदालत में कत्ल हुआ था। मुकदमा तो बनना ही था। इस लिए पुलिस ने 100 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। लेकिन आखिर में अट्ठारह के खिलाफ 302 का मुकदमा चलाया गया।

करीब 10 साल तक यह मुकदमा चला। 2014 में अदालत का फैसला आया। इन अट्ठारह की अट्ठारह औरतों को बरी कर दिया गया। क्योंकि इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था। पुलिस ने पूरी कोशिश की थी। खास तौर पर उषा को घेरने की तो पुलिस ने काफी कोशिश की थी। मगर पुलिस को कोई सबूत नहीं मिला था। क्योंकि पूरी बस्ती एक हो गई थी। यहां तक कि शहर भी एक हो चुका था। यह सब देखकर अदालत भी भावना समझ चुकी थी। सबूत के अभाव में सब को बरी कर दिया गया।

एक भारतीय है, जिसको पहली बार अमेरिका में फांसी की सजा मिली है। उसके दो बार डेथ वारंट जारी हो चुके हैं। जिसको अमेरिका में उसके जुर्म के लिए मौत की सजा सजा दी गई है। यह Raghunandan द्वारा Saanvi के Murder की कहानी है। रघुनंदन आंध्र प्रदेश में पैदा हुआ था। वह बचपन से ही पढ़ने लिखने में तेज था। इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर साइंस में उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। अच्छी नौकरी की तलाश में अपनी पत्नी के साथ अमेरिका पहुंच जाता है। अमेरिका के Pension Valia में उसको नौकरी मिलती है।

वहां अपार्टमेंट किंग ऑफ पर्शिया पर वह अपनी पत्नी के साथ रहने लगता है। इत्तेफाक से यह केस 2012 का है। उसकी पत्नी उस वक्त गर्भवती थी। रघुनंदन को वहां जाकर जुए की लत लग गई थी। वह कसीनो में जाया करता था। काफी पैसे में हार चुका था। जुए  में लगभग 10 से 12 हजार डॉलर हार चुका था। जिसको लेकर वह काफी परेशान रहता था। लेकिन नौकरी साथ चल रही थी।

तभी 20 अक्टूबर 2012 को जिस अपार्टमेंट में वह रहता था। उस अपार्टमेंट में एक और परिवार रहता था। जो भारतीय था। वह भी आंध्रप्रदेश से ही था। एक अपार्टमेंट में रहने की वजह से दोनों में मुलाकात होती है। क्योंकि दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। दोनों में दोस्ती भी हो जाती है। उस फैमिली की इकलौती बेटी थी। उसकी बेटी का नाम सानवी था। उस दिन उन्होंने एक पार्टी रखी थी। अभिनंदन भी उस पार्टी में आया था। बाकी वहाँ के रहने वाले लोग जो आंध्र प्रदेश से थे। वहां पहुंच जाते हैं। पार्टी के दौरान रघुनंदन और उसकी पत्नी की मुलाकात उसके दोस्त से होती है। वह बातचीत करते हैं। एक दूसरे के बारे में जानने की कोशिश करते हैं।

पड़ोसी का नाम वेंकट था। इसी बातचीत के दौरान रघुनंदन को पता चलता है। उसका दोस्त और उसकी पत्नी लता दोनों जॉब करते हैं। जो 10 महीने की बेटी सानवी घर में थी। उसकी देखभाल वेंकट की मां करती थी। रघुनंदन को एहसास होता है। दोनों पति-पत्नी यूएस में जॉब करते हैं। अच्छा खासा कमा लेते होंगे। क्योंकि रघुनंदन कसीनो में काफी पैसे हार चुका था। इसी बातचीत के दौरान वह पूछता है। जब तुम बाहर रहते हो तो तुम्हारी बेटी का क्या होता है। वेंकट बताता है। हम दोनों जॉब पर बाहर रहते हैं।  उसकी दादी उसकी देखभाल करती है। घर पर कोई नहीं होता।

Saanvi murder Raghunandan
Raghunandan

रघुनंदन घर पहुंच जाता है। उसको पैसे की सख्त जरूरत थी। कहीं ना कहीं से उसे पैसे का इंतजाम करना था। अब उसकी नजरों में वेंकट के घर की कहानी गूंज रही थी।उसने वेंकट के घर में अच्छे खासे जेवरात भी देखे थे। अगले 24 घंटे तक सोचने के बाद उसके दिमाग में एक आईडिया आता है। अगर मैं वेंकट आकर घर में जाऊं। उसकी 10 महीने की बच्ची को अगवा कर लिया जाये तो मुझे फिरौती के तौर पर काफी पैसे मिल सकते हैं।

22 अक्टूबर को वह दिन में वेंकट के घर में जाता है। वहां जाकर घंटी बजाता है। सत्यवती जो उस बच्ची की दादी थी। वह दरवाजा खोलती है। रघुनंदन घर के अंदर दाखिल हो जाता है। यह अपने साथ एक चाकू लेकर गया था। इसका इरादा यह था। वह किसी तरीके से सानवी को उठाकर अगवा करके ले जाएगा। मगर उसके इरादे को दादी भाग लेती है। दोनों में हाथापाई हो जाती है।

अपने आप को बचाने के लिए रघुनंदन दादी पर हमला कर देता है। दादी के ऊपर चाकू के तीन गहरे वार कर देता है। दादी की वहीं पर मौत हो जाती है। अब वह घबरा जाता है। वह सानवी को उठाता है। क्योंकि सानवी चीख रही थी। वह एक रूमाल निकालकर सानवी के मुंह में डाल देता है। लेकिन वो रुमाल सानवी के मुंह में अटकता नहीं है। बार-बार निकलने लगता है। रघुनंदन सोच रहा था। इसका मुंह बंद करना जरूरी है। उस वक्त और बाकी चीजें नहीं थी।

सानवी के मुंह से आवाज ना निकले। इस वजह से उसके मुंह में रुमाल डाल कर ऊपर से टॉवल बांध देता है। इससे बच्चे का दम घुटने लगता है। इसी दौरान उसे घर में जो भी जेवर मिलते हैं। वह उठा लेता है। घर से नीले कलर का बैग मिलता है। वह उसको उठा लेता है। उस बैग से जो भी पैसे और जेवर मिले उसको रख लेता है। साथ में सानवी को भी उसी बैग में बंद कर लेता है। बंद करने के बाद वह बैग लेकर घर से बाहर निकलता है। क्योंकि वह उसी अपार्टमेंट में रहता था। उसके बाद वह जिम जाता है।

जिम जाने के बाद वॉशरूम के पास में उसको एक खाली जगह मिलती है। वह बैग को वहां पर रख देता है। रघुनंदन को पता था। जिस तरीके से उसने सानवी का मुंह बांधा है। वह बैग में बंद है। वह जिंदा नहीं बची होगी। सानवी की मौत हो चुकी थी। रघुनंदन बैग रखकर चला गया था। इधर शाम होते ही वेंकट अपनी पत्नी के साथ घर वापस लौटता है। दरवाजा खुला हुआ था। वेंकट की मां की लाश दरवाजे के पास ही खून से लथपथ पड़ी थी। दोनों घबरा जाते हैं। मां को हॉस्पिटल ले जाने के लिए मदद मांगते हैं। थोड़ी देर के बाद उनका ख्याल आता है, कि उनकी 10 महीने की बच्ची सानवी भी यही पर है। ढूंढने के बावजूद भी घर पर नहीं मिलती। तब तक पड़ोसी पुलिस को खबर कर देते हैं।

इसकी तफ्सीस से शुरू हो जाती है। इस दौरान पुलिस को घर से एक Ransom Note (फिरौती के लिए लिखा हुआ कागज) मिलता है। कंप्यूटर से निकला हुआ यह प्रिंट आउट था। Ransom Note (Paper) के ऊपर जो लिखा हुआ था। सानवी को मैंने अगवा कर लिया है। अगर आपने 50 हजार डॉलर नहीं दिए तो बच्ची को मार दिया जाएगा। इतना लिखने के बाद उसने नीचे वेंकट और उसकी पत्नी का नाम लिख दिया था।

साथ में यह भी बताया था। एक कॉन्प्लेक्स पर आपको पैसे लेकर आना है। पुलिस इस Ransom Note (फिरौती के लिए लिखा हुआ कागज) को देखती है। उसी के हिसाब से पति-पत्नी को तैयार करती है। आप उस जगह पर जाओ। यह दोनों पति-पत्नी वहां पर पहुंच जाते हैं। मगर पैसे लेने कोई नहीं आया था। वह दोनों वहां से वापस आ जाते हैं। 2 दिन के बाद किसी की उस बैक पर नजर पड़ जाती है। वह पुलिस को बताता है। इस तरह से सानवी की लाश भी मिल जाती है।

इस दौरान सानवी और सानवी की दादी की मौत की खबर पूरे अपार्टमेंट में फैल चुकी थी। वह सब मिलकर सानवी को ढूंढ रहे थे। उनमें रघुनंदन भी शामिल था। रघुनंदन ने बाकायदा सानवी के 200 से ज्यादा प्रिंटआउट निकाले थे। जगह-जगह लेकर घूम रहा था। आपने कहीं इस लड़की को देखा है। वह इस तलाश में सबसे आगे था।

मगर सानवी की लाश मिल चुकी थी। मगर कातिल का कुछ पता नहीं था। आसपास सब तलाश कर लिया गया था। मगर कोई सुराग नहीं मिला था। इसी दौरान पुलिस उस Ransom Note पर फोकस करती है। क्योंकि वह एक प्रिंटआउट था। किसी के हाथ की लिखी हुई राइटिंग  पता नहीं चल सकी थी। मगर Ransom Note देखकर पुलिस किसी नतीजे पर पहुंचती है। वह वेंकट और उसकी पत्नी को बुलाती है। वह पूछती है, कि इस पेपर पर जो नाम लिखा है। शिवा वह कौन है, और यह लता कौन है।

सानवी के पिता वेंकट बताते हैं। असल में उनका जो पूरा नाम वेंकट कोंडा शिवा प्रसाद विन्ना है। बीवी का नाम चीचू लता विन्ना है। उसे यह पता चला कि उस पेपर पर जो नाम थे वे दोनों Nick Name नाम थे।

तब पुलिस ने दिमाग लगाया और कहा कि आप हमें उन लोगों के लिस्ट दो जो आपको इन नामों से बुलाते हैं। बाकी किसी नाम से आपको नहीं बुलाते। पति-पत्नी ने अपने दिमाग पर बहुत जोर डाला। इसके बाद उन्होंने एक लिस्ट तैयार की। वह लिस्ट पुलिस को दी। यही लोग हैं, जो हमें इन नामों से बुलाते हैं। उस लिस्ट में से पुलिस ने हर एक के बारे में जानकारी इकठ्ठा करनी शुरू कर दी।

22 अक्टूबर को यह लोग कहां-कहां मौजूद थे। उस लिस्ट में से एक नाम रघुनंदन का भी था। पुलिस ने उन सब को एक-एक करके पूछताछ करनी शुरू कर दी। क्योंकि रघुनंदन भी उसी अपार्टमेंट में रहता था। रघुनंदन को बुलाकर भी पूछताछ की गई। उससे पूछा गया कि 22 अक्टूबर को आप कहां थे।  रघुनंदन ने सारी बात बतानी शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने रघुनंदन की पत्नी से पूछने का इरादा किया। 22 अक्टूबर को यह कहा था।

पता चला कि 22 अक्टूबर को रघुनंदन ऑफिस गया हुआ था। मगर उसकी पत्नी ने एक अजीब बात बताई। रघुनंदन अपने लंच और डिनर को लेकर काफी पंक्चुअल है। उसूल का पक्का है। जितने बजे उसका वक्त होता है। उतने ही बजे वह लंच और डिनर करता है। 22 अक्टूबर को पहली बार उसने अपना उसूल तोड़ा। 22 अक्टूबर को उसने पहली बार वक्त से पहले लंच किया। पुलिस ने कहा इसमें कौन सी बड़ी बात है। मगर उसकी पत्नी ने कहा कि जब से मैं इनके साथ हूं, कई वाक्य हुए मगर उन्होंने अपना उसूल नहीं तोड़ा। यह बात पुलिस को काफी अजीब लगी।

उसके बाद पुलिस ने 22 अक्टूबर के पूरे दिन के रूटीन को खंगालना शुरू कर दिया। उसमें कई ऐसी चीज पता चली। जिसमें रघुनंदन ने पुलिस से झूठ बोली थी। वह सब चीजें बाद में साफ होती चली गई। अब रघुनंदन को लगा कि वह फंस जाएगा। आखिरकार उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने कहा मुझे कसीनो जाने की लत लग गई थी। मैं काफी पैसा हार चुका था।

पार्टी में मिलने के बाद मुझे लगा। इनके पास काफी सारे पैसे होंगे। यह मुझे 50 हजार डॉलर आराम से दे सकते हैं। इसीलिए मैंने सानवी को अगवा करने का फैसला किया। ताकि सानवी को अगवा कर लूंगा। पैसे लेकर सानवी को घर पहुंचा दूंगा। मेरा उन दोनों को मारने का कोई इरादा नहीं था। मगर शिवा की मां सामने आ गई। वह गवाह बन जाती। मुझे मजबूरी में उनको मारना पड़ा। सानवी चीख पड़ती और मैं पकड़ा जाता। इसी वजह से मैंने उसके मुंह में रुमाल डाल दिया। ऊपर से टॉवल बांध दिया। दम घुटने से उसकी मौत हो गई थी।

इसके बाद रघुनंदन पर मुकदमा चलाया गया। 2014 में रघुनंदन को मौत की सजा दी गई। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। मगर सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा को कम करने से इनकार कर दिया था। उसकी मौत की सजा बरकरार रही।  2016 में उसकी मौत की तारीख तय हुई। मगर उसकी मौत नहीं हुई। फिर 23 तारीख उसकी मौत की तारीख तय हुई। मगर उसकी मौत नहीं हुई। वहां पर मौत की सजा देने का नियम यह है।  एक जहर का इंजेक्शन उसको लगा दिया जाता है।

दो बार वह मौत से बच गया। उसकी यह वजह है इस Pension Valia में एक गवर्नर है। जिनका नाम टॉम वॉल है। टॉम वॉल मौत की सजा के खिलाफ है। 2015 से इन्होंने अपने इस राज्य में मौत की सजा को रोक रखा है। इस पर फैसला होना अभी बाकी है। पिछले 20 सालों में Pension Valia में किसी को मौत की सजा नहीं दी गई। सजा सुनाई तो गई मगर दी नहीं गई।

1976 से लेकर अब तक 3 लोगों को मौत की सजा मिली है। किसी को अभी तक यह सजा दी नहीं गई। Pension Valia के इस गवर्नर की वजह से दो बार रघुनंदन की मौत की सजा टल गई। अब भी इंतजार है, कि उस फैसले का क्या होगा। उसी पर सबकी नजर है।

इसमें दो बात सामने हैं। हो सकता है कि रघुनंदन मौत की सजा से बच जाए। उस को उम्र कैद की सजा हो जाए। हमेशा के लिए वह जेल में कैद रहे। यह भी हो सकता है, कि उसको मौत की सजा दी जाए। मगर इन दोनों चीजों पर फैसला होना अभी बाकी है। यह फैसला कब होगा यह कहना मुश्किल है।

दिल्ली पुलिस का एक अफसर किसी केस की तफ्तीश के लिए कश्मीर जाता है। कश्मीर में उसकी बीएसएफ के एक अफसर से मुलाकात होती है। वहां पर उससे दिल्ली के बारे में बातें होती है। आतंकवाद को लेकर वहां पर बातें होती है। इसके बाद एक आतंकवादी जो एनकाउंटर में मारा गया। उसकी डायरी मिलती है। इस डायरी को वह पुलिस अफसर देखता है। इस डायरी को पढता है। बहुत सारी ऐसी डायरी थी। उसकी इन्हीं डायरो में से एक डायरी के आखिरी पन्ने पर एक ईमेल था। दिल्ली पुलिस का वह अफसर उस ईमेल आईडी को लेकर दिल्ली चला आता है। उस ईमेल आईडी के बाद आने वाले दिनों में जो कुछ होता है। पुलिस छानबीन में यह अपने आप में एक मिसाल है। कैसे दिल्ली में एक बड़ा हमला होने से बच गया। यह Delhi Police crack a code & foil terror attack at India Gate की कहानी है।

इस कहानी की जड़ में इंडिया गेट है। इंडिया गेट बहुत खूबसूरत जगह है। कितनी बार हम इंडिया गेट पर गए हैं। अगर आप इंडिया गेट गए हो इंडिया गेट के आसपास काफी सुरक्षा रहती है। मगर पहले ऐसा नहीं था। 2003 से पहले जो इंडिया गेट है। उसके बिल्कुल नीचे तक आप जा सकते थे। इंडिया गेट को हाथ से छू कर भी दे सकते थे। लेकिन इस एक कहानी ने इंडिया गेट की पूरी तस्वीर बदल कर रख दी।

इंडिया गेट को अगर आप करीब से देखें तो तकरीबन 70000 सोल्जर्स के उस पर नाम लिखे हुए हैं। जो अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। यह तकरीबन 1914 से लेकर 1921 तक अंग्रेजो के खिलाफ जंग थी। उन्हीं में शहीद हुए लोगों के नाम यहाँ लिखे हुए हैं। इसीलिए इसको वॉर मेमोरियल कहते हैं। 1921 में इंडिया गेट बनना शुरू हुआ था। 1931 में बन कर तैयार हो चुका था।

दिल्ली पुलिस में एक स्पेशल डिपार्टमेंट है। जिस तरीके से सभी राज्य की पुलिस में अलग स्पेशल सेल होता है। कहीं पर सीआईडी, एटीएस एसटीएफ होता है। मगर दिल्ली पुलिस में एक स्पेशल सेल है। 1986 में स्पेशल सेल को बनाया गया था। उसकी वजह यह थी कि तब कश्मीर में आतंकवाद बढ़ रहा था। दिल्ली में भी खतरा हो सकता है, तो आतंकवाद से निमटने के लिए दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल सेल बनाई गई।

उसी स्पेशल सेल के अफसर की यह कहानी है। इस स्पेशल सेल में एक इंस्पेक्टर प्रदीप कुशवाहा हुआ करते थे। यह बात 2002 की है। जब पार्लियामेंट अटैक हो चुका था। इसका कनेक्शन सीधा कश्मीर से जुड़ा हुआ था।

2002 सर्दियों में स्पेशल टीम के इंस्पेक्टर प्रदीप कुशवाहा किसी केस के बारे में कश्मीर जाते हैं। कश्मीर जाने के बाद वह वहां के तमाम लोकल पुलिस से मिलते हैं। BSF से भी मिलते हैं। इसी दौरान बीएसएफ के एक डिप्टी कमांडर से प्रदीप कुशवाहा की मुलाकात होती है। उस मुलाकात के दौरान जो डिप्टी कमांडर कुछ एनकाउंटर कर चुका था। जब प्रदीप कुशवाहा वहां पहुंचे तो उससे पहले उसने वहां पर एंकाउंटर किए थे। जिसमें दो टेरेरिस्ट मारे गए थे। उसमें से एक टेररिस्ट के पास से कुछ डायरी बरामद हुई थी।

क्योंकि प्रदीप कुशवाह दिल्ली से गए हुए थे। उस डिप्टी कमांडर ने उन डायरी को भी दिखाना शुरू किया। प्रदीप कुशवाहा ने उन डायरियो को ध्यान से देखा। कई ऐसी डायरी थी जिनको प्रदीप कुशवाहा ने पढ़ा।  एक डायरी पर आकर उनकी नजर रुक जाती है। एक डायरी का आखिरी पन्ना था। उस आखिरी पन्ने पर एक ईमेल आईडी थी।

उन्होंने इस ईमेल आईडी को नोट किया। वापस दिल्ली आ गए। उस वक्त स्पेशल सेल के जो Head नीरज कुमार थे। जो बाद में कमिश्नर बने। करीब 2 साल तक यह DCP रहे। वहां से लौटने के बाद प्रदीप कुशवाह उस ईमेल आईडी पर काम करना शुरू कर देते हैं। क्योंकि उन्हें कुछ शक था। जो ईमेल आईडी वह लेकर आए थे। वह ईमेल xxxx@hotmail.com थी।

उस ईमेल आईडी के आईपी के जरिए वह पता लगाने की कोशिश करते हैं। आईपी का सीधा मतलब यह है, कि कहां से मैसेज भेजा गया और कहां भेजा गया। वह उस आईपी ऐड्रेस को ट्रेस करना शुरू कर देते हैं। शुरू में तो ऐसा लगा कि यह सब ऐसे ही है। जब उन्होंने ट्रेस करना शुरू किया। उनको एक अजीब सी चीज पता चली। वह यह पता चला कि इस आईपी एड्रेस को दिल्ली में कोई शख्स किसी अलग-अलग साइबर कैफे से इस्तेमाल कर रहा है। जब उन्होंने इस साइबर कैफे के बारे में पता करना शुरू किया।

पहला जो पता चला कि इस ईमेल से एक मेल किया गया है। जो पहाड़गंज से किया गया है। 3 फरवरी को दूसरा मेल किया गया। वह दरियागंज के एक कैफे से किया गया। इसके ठीक 3 दिन बाद 7 फरवरी को तीसरा मेल किया गया। यह मोती बाग से किया गया था। फिर एक-दो दिन बाद ऐसे ही मेल आए। वह जो कुछ भी कर रहा था। वह सब सेंट्रल दिल्ली लोकेशन के थे।

प्रदीप कुशवाहा यह सब जानकारी अपने सर को देते हैं। उनको भी इस बारे में शक हो जाता है। इसके बाद दिल्ली के स्पेशल सेल ने सीरियस लेकर इसकी जांच करना शुरू कर दी। अब धीरे-धीरे यह पता चला कि कि जो भी यह मेल कर रहा है। वह एक कैफे में सिर्फ एक बार ही जाता है। तमाम कैफे का दौरा किया गया।  2002 में सीसीटीवी कैमरे का इतना दौर नहीं था। तो कोई खास कामयाबी नहीं मिली। मगर इससे एक चीज तो पता चल गई थी, कि कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है।

उस मेल को पढ़ने के बाद तो ऐसा लग रहा था। जैसे कोई अपनी गर्लफ्रेंड से बात कर रहा है। क्योंकि इसमें ऐसे ही मैसेज लिखे हुए थे। मगर एक मेल आया। जिसमें लिखा हुआ था।

इसमें एक मैच के बारे में लिखा हुआ था। क्या आपके पास फुटबॉल है? इस फुटबॉल का क्या करना है? आप बेहतर जानते हो और मैच की तारीख आपको जल्दी बता देंगे। यह मेल उसमें लिखा हुआ था। इसके बाद फिर एक मेल आता है। आपकी जिम्मेदारी है। मैच की तारीख फिक्स होने तक खिलाड़ियों का ध्यान रखना। आपके जिममें है, कि कोई बात होगी तो क्या करना है। आप अच्छी तरह जानते हैं।

इसके बाद फिर एक मेल आता है। मैच की तारीख तय हो गई है। वर्ल्ड कप का फाइनल 25 को तय हुआ है। टाइम वही है। बेस्ट ऑफ लक।इस सब में चाचू नाम का एक शब्द बार-बार लिखा हुआ रहा था। जब उसको डिकोड करने की कोशिश की गई। पता चला यह चाचू  कोई और नहीं बल्कि जकी उर रहमान लखवी है। जकी उर रहमान लश्कर-ए-तैयबा का मास्टरमाइंड था।

जब पता चला कि यह चाचू जकी उर रहमान लखवी है। टेंशन बढ़ गई। जरूर कुछ गड़बड़ है। यह कुछ प्लान कर रहा है। पुलिस अपनी छानबीन कर रही थी। इसी दौरान एक और मेल आता है। इस बार का मेल स्पेशल सेल का भी दिमाग घुमा कर रख देता है। वह इसलिए इस बार जो पूरा मेल था। वह कोड में था। उसमें कुछ भी नहीं लिखा हुआ था। सिर्फ चित्र बने हुए थे। जैसे:- .0123456789.0123598746.256.364.56 ऐसा करके यह पूरा एक मैसेज था। अब इसमें एक भी अल्फाबेट नहीं था। सिर्फ न्यूमेरिकल ही था।

अब स्पेशल सेल को लगा कि अगर इस कोड को डिकोड न किया गया तो गड़बड़ हो जाएगी। नीरज कुमार कमिश्नर के पास गए। कहा कि एक मैसेज है। जो डिकोड नहीं हो रहा। जो डिकोड करना बहुत जरूरी है। उस वक्त यूएसए में एक मास्टर माइंड थे। जो इस कोड को डिकोड कर सकते थे। इस कोड को यूएस में भेजा गया। उन्होंने वहां से अपने चार्ज बताएं। कितने रुपए लगेंगे एक बिल भेज दिया। यह बिल नीरज कुमार, जो डीसीपी थे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर को दिया। वह अच्छा खासा पैसा था। कमिश्नर ने कहा इतनी जल्दी तो Approval नहीं मिल सकता। क्योंकि इसके लिए होम मिनिस्ट्री से भी परमिशन लेनी पड़ेगी। इसमें थोड़ा वक्त भी लगेगा। इतना वक्त नहीं था।

इधर नीरज कुमार अपने तरीके से उसको डिकोड करने में लगे हुए थे। मगर नाकाम रहे। उधर मिनिस्ट्री की तरफ से डॉलर में पैसे देने की मंजूरी नहीं मिली थी।

यह सारी चीजें चल रही थी। अचानक 19 या 20 फरवरी 2003 की बात है। प्रदीप कुशवाहा के दफ्तर में एक दोस्त आता है। जो उनके स्कूल के वक्त का था। वह इधर बेरोजगार था। कोई काम नहीं मिल रहा था।

वह सीधा प्रदीप कुशवाहा से मिलने के लिए पहुंच गया। प्रदीप कुशवाहा उस वक्त काफी परेशान थे। क्योंकि वह इस केस को हैंडल कर रहे थे। इस खतरे का भी अंदाजा था। पता नहीं दिल्ली में क्या होगा। लेकिन यह पता नहीं चल रहा था कि क्या होगा, कब होगा और कहां होगा।क्योंकि एक मैसेज है, उसको डिकोड करना है।

इसी परेशानी के दौरान उनका दोस्त उनके पास दफ्तर पहुंच जाता है। विवेक ठाकुर नाम था। बातचीत के थोड़ी देर बाद विवेक ठाकुर को एहसास हो जाता है। उसका दोस्त परेशान है। वह पूछता है, कि क्या बात है। प्रदीप कुशवाह ने बताया कि ऐसे-ऐसे बात है। प्रदीप कुशवाहा को भी पता था। यह कंप्यूटर का जानकार है। उन्होंने बताया कि एक मैसेज है। जो डिकोड नहीं हो पा रहा। मंत्रालय से इसकी परमिशन नहीं दे रहा कि इसको यूएसए में डिकोड कराया जा सके।

अचानक विवेक ठाकुर कहता है। वह मैसेज क्या है। मुझे दिखाओ मैं कोशिश करता हूं। प्रदीप कुशवाहा कहते हैं, कि यह नहीं हो पाएगा। मैंने पूरी कोशिश कर ली है।

ठाकुर बोलता है। कोई बात नहीं कम से कम एक बार मुझे देकर तो देखो। ठाकुर उसमें लग जाता है। कई घंटे बीत गए। वह बार-बार कहता रहा कि मैं इसको कर दूंगा पर हो नहीं रहा था। इधर नीरज कुमार भी काफी परेशान थे। क्योंकि वक्त बिलकुल नहीं था। वह प्रदीप कुशवाहा से बार-बार पूछ रहे हैं।

इसी उसमें लगभग शाम हो जाती है। प्रदीप कुशवाह ऑफिस से निकल कर बाहर आते हैं। उनको पुलिस मुख्यालय में बुलाया जाता है। जो आईटीओ के पास है। मगर इनका दफ्तर उस वक्त अशोक विहार था।

प्रदीप कुशवाहा ऑफिस से बाहर आते हैं। देखते हैं कि उनका दोस्त अभी बैठा हुआ है। वह उस कोड को हल करने की कोशिश कर रहा है। अब वह से पूछते हैं, कि कुछ हुआ। वह बोला कि हुआ तो नहीं पर इसको मैं कर दूंगा। वह कहते हैं, कि जब तक होना जाए तो मुझे मत बताओ कि कर दूंगा।

प्रदीप कुशवाहा कहते हैं, तुम इसमें कोशिश करो। मैं पुलिस मुख्यालय जा रहा हूं। विवेक ठाकुर कहता है, कि मैं भी साथ चलता हूं। क्योंकि मुझे लगता है, कि मैं 40 से 45 मिनट में इसको हल कर दूंगा। प्रदीपकुशवाहा उसको अपनी गाड़ी में बैठा लेते हैं। ट्राफिक में पहुंचते-पहुंचते पुलिस मुख्यालय आ जाता है। तब तक कुछ नहीं हुआ था। वह दोनों गाड़ी से उतरते हैं। वह तब भी लगा हुआ था। जैसे ही गाड़ी से उतरकर पुलिस मुख्यालय की सीढ़ी पर चढ़ते हैं। विवेक ठाकुर चीखते हुए कहता है। मैंने कर दिया प्रमोद कुशवाहा को यकीन नहीं हुआ था। वह कहते हैं, कि बताओ कि यह क्या है।

वह फिर बताता है। उसने बताया कि यह जो भी नंबर है। यह दरअसल इस तरीके से काम कर रहा है। यह जीरो जो है, उन्होंने अंग्रेजी के ‘A’ के लिए लिया है। 1 जो है, वह ‘B’ के लिए लिया है। 3 जो है, वह ‘C’ के लिए लिया है। इस तरीके से यह ‘J’ तक जाते हैं। जो 9 नंबर थे। जैसे ही ‘K’ आता है। वह फिर से जीरो हो जाता है। फिर जो ‘L’ होगा वह 1 हो जाएगा। जो ‘M’ होगा वह 2 हो जाएगा। इसके बाद जैसे ही ‘U’ आएगा वह जीरो हो जाएगा।

इन शब्द में ऐसा कुछ नहीं था। सिर्फ हर शब्द के बाद एक पॉइंट लगा हुआ था। उसके बाद जब उसने उसको डिकोड किया और अंडर लाइन किया। वह INDIA GATES लिखा हुआ था। शायद उनकी एक स्पेलिंग मिस्टेक थी। वह दरअसल INDIA GATE लिखा हुआ था।

दूसरा जो उभर कर आया। वह 25 फरवरी 2003 आया। इनका जो टारगेट था। वह 25 फरवरी 2003 को इंडिया गेट पर हमला करना था। इंडिया गेट से पार्लियामेंट के दूरी मुश्किल से 2 किलोमीटर होगी।

इसके बाद खुलासा हुआ। प्रदीप कुशवाहा को यकीन हुआ। यही दरअसल इसका कोड था। वह खुशी के मारे भागते हुए नीरज कुमार के पास पहुंचते हैं। नीरज कुमार को बताते हैं, कि इस कोड का डिकोड ये है।

जो बेरोजगार शख्स अपने दोस्त से मिलने के लिए यूं ही आता है। उसने ऐसा काम कर दिया था। जिसके लिए होम मिनिस्ट्री भी तैयार नहीं थी। इसका एक लंबा प्रोसेस था। उसको एक आम इंसान ने हल कर दिया। इस पर नीरज कुमार काफी खुश हुए। यह जानकारी उन्होंने कमिश्नर को दी। यह बात 21 फरवरी की थी। 22 फरवरी को गृह मंत्रालय को पूरी जानकारी दी गई। लालकृष्ण आडवाणी उस वक्त गृहमंत्री थे। शाम को आडवाणी ने एक मीटिंग बुलाई। जिसमें नीरज कुमार को भी बुलाया गया। यह लोग वहां पहुंचे। इन्होंने उस मेल का पूरा चैन उनको बताया। सारी चीजें उनके सामने रखी।

यह बैठक 22 फरवरी की रात तक चली थी। 23 फरवरी की सुबह जब लोग उठकर इंडिया गेट पहुंचे। उन्होंने पहली बार इंडिया गेट का ऐसा नजारा देखा था। वह इसलिए कि 23 की सुबह में ही इंडियन आर्मी को इंडिया गेट के आसपास तैनात कर दिया गया था।

इंडिया गेट के करीब जाने पर आम लोगों को मना ही कर दिया गया था। जैसे ही 23 फरवरी को इंडिया गेट की सुरक्षा बढ़ाई गई। उसके बाद उसी दिन शाम से यह जो ईमेल आईडी प्रदीप कुशवाह कश्मीर से लेकर आए थे। उस शाम के बाद उस ईमेल आईडी पर दोबारा कोई मेल नहीं आया।

इससे यह समझा गया कि इंडिया गेट की सुरक्षा को देखकर आतंकियों को पता चल गया। शायद पुलिस और सरकार को हमले की जानकारी मिल गई है। उन्होंने इस हमले को रद्द कर दिया। इस ईमेल आईडी को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया। उसके बाद 23 फरवरी के बाद से इस ईमेल आईडी पर कोई भी मेल नहीं आया।

इस तरीके से एक पुलिस अफसर किसी और काम से कश्मीर जाता है। वहां से एक ईमेल लेकर आता है। इस ईमेल पर आए किसी कोड को उसका दोस्त डिकोड कर देता है। दिल्ली में हमला होने से बच जाता है।

“Delhi Police crack a code & foil terror attack at India Gate”

यह सऊदी अरब के King Faisal Murder की कहानी है। जब भी सऊदी अरब का नाम आता है। दिमाग में Shah Faisal की तस्वीर आ जाती है। क्योंकि इनका वहां पर अपना एक अलग ही मुकाम था। उनके हिंदुस्तान के साथ भी काफी अच्छे रिश्ते थे। सऊदी अरब के अंदर Shah Faisal ने जो भी काम किया। लोग उसको आज भी याद करते हैं। लेकिन अगर किसी बादशाह का उसी के महल में कत्ल हो जाए। यह चीज भी चौंका देती है।

उस वक्त कातिल को लेकर बहुत सारी बातें हुई। बहुत सारे सवाल सामने आए। इस साजिश की तह तक जाने की कोशिश की गई। कातिल वह शाही खानदान से ही था। उसको सजा मिलती है। मगर उसके दिमागी हालत ठीक न होने की वजह से उसको माफ कर दिया गया। फिर डॉक्टरों ने कहा इसकी दिमागी हालत सही है। फिर उसको सजा हो गई। उसका सर कलम कर दिया गया।

किंग शाह फैसल का पाकिस्तान का दौरा-

1974 में किंग फैसल पाकिस्तान के दौरे पर थे। तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो थे। दौरे के दौरान जुल्फिकार अली भुट्टो Shah Faisal को वहां के एक मशहूर मजार पर लेकर जाते हैं। Shah Faisal जब मजार पर पहुंचते हैं। देखते हैं, कि बहुत सारे लोग वहां पर बहुत ज्यादा ज्यादा चढ़ा पैसे रहे हैं। उन्हें देखकर बड़ा अजीब लगता है। वह जुल्फिकार अली भुट्टो से पूछते हैं। यह क्या है।

उन्होंने कहा यह बहुत पहुंचे हुए बाबा पीर का मजार है। लोग अपनी अकीदत से वहां पर पैसे चढ़ा रहे हैं। इस पर कहते हैं कि Shah Faisal मुस्कुराए। उन्होंने कहा अगर यह पहुंचे हुए पीर बाबा की मजार है। इस्लाम की तारीख के हिसाब से सबसे पाक सबसे जो पहुंचे हुए हैं। उनके मजार तो हमारे यहां हैं। सऊदी अरब में हजरत मोहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम की भी इसी तरीके से छूट कर दे तो लोग वहां पर हीरे, मोती, जेवरात पता नहीं क्या-क्या चढ़ा कर उनको पूजना शुरू कर देंगे। ऐसे में तो सऊदी अरब बहुत पैसे कमा सकते हैं।

Shah Faisal Murder
King Shah Faisal

इससे पता चलता है कि Shah Faisal  कितने ज़हीन आदमी थे। वह बचपन से ही ज़हीन थे। जब उनकी पैदाइश हुई। उस वक्त उनके वालिद (पिता) जो बादशाह थे। शाह अब्दुल अजीज उनका नाम था। इनकी मां की इनके बचपन में ही मौत हो गई थी। उसके बाद वालिद की छत्रछाया में ही इन्होंने परवरिश की। बचपन से ही तेज और होशियार थे। इसी सलाहियत की वजह से सिर्फ 20 साल की उम्र में ही सऊदी अरब के हिजाज का गवर्नर बना दिया गया। गवर्नर के तौर पर Shah Faisal जिस तरीके से काम कर रहे थे। लोगों के बीच काफी मशहूर हो गए थे।

धीरे-धीरे उनके हुनर और सत्ता को चलाने की सलाहियत लोग मानने लगे। गवर्नर के तौर पर ही काम करते हुए। उनकी सलाहियत को देखते हुए। उनके वालिद शाह अब्दुल अजीज ने उनको विदेश मंत्री बना दिया। विदेश मंत्री के तौर पर 1954 के करीब Shah Faisal  पहली बार हिंदुस्तान आए थे। तब जवाहरलाल नेहरू हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री थे। उनकी उनसे मुलाकात हुई थी। विदेश मंत्री के तौर पर रहते हुए। उन्होंने बहुत सारे काम किए और लग रहा था। आने वाले वक्त में Shah Faisal ही सऊदी अरब के बादशाह होंगे।

सऊदी अरब में रोड एयरपोर्ट और औरतों की तालीम वगैरह फैसल ने शुरू की थी। वह अलग ही सोचा करते थे। किसी के साथ कोई जुल्म ना हो इन चीजों का ख्याल काफी रखा गया था। लोगों के बीच में धीरे-धीरे मशहूर हो गए। इसी तरीके से काम करते रहे।

शाह सऊद का बादशाह बनना-

इनके वालिद शाह अब्दुल अजीज की 1953 में मौत हो जाती है। उनकी मौत के बाद सऊदी अरब के बादशाह शाह सऊद बन जाते हैं। अब शाह सऊद के हाथों में सऊदी अरब की हुकूमत थी। सऊद और फैसल में जमीन आसमान का फर्क था। Shah Faisal सऊदी अरब को आगे ले जाना और नए नए काम करना चाहते थे।

शाह सऊद के हाथों में हुकूमत आने के बाद सऊदी अरब की हालत बिगड़ती चली गई। क्योंकि उसने बेवजह पैसा खर्च करना शुरू कर दिया। शाह सऊद की वजह से सऊदी अरब के रियाल की कीमत गिरती चली गई। सऊदी अरब की हालत बिगड़ती चली गई। उसकी आर्थिक हालत बिगड़ती चली गई। सऊद के अपने अलग शौक थे। इसको लेकर सऊद और फैसल के रिश्ते भी काफी खराब हो गए थे।

शाह फैसल को शाह सऊद ने वजीरे आजम बना दिया था। Shah Faisal जो भी काम कर रहे थे। उसमें शाह सऊद बीच में आ जाते थे। इसी वजह से दोनों में काफी झगड़ा चल रहा था। Shah Faisal ने वजीरे आजम के पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद में उन्होंने किसी दूसरे भाई को वजीरे आजम बना दिया। लेकिन रॉयल परिवार में Shah Faisal कीअच्छी इमेज थी। इसलिए उनको दोबारा वजीरे आजम बना दिया गया।

इसके बाद शाह सऊद अपना इलाज कराने के लिए एक बार यूरोप गए थे। उनके पीछे Shah Faisal ने एक कैबिनेट की मीटिंग बुलाई। उनमें से बहुत सारे मंत्रियों को हटा दिया ।जो कि रॉयल फैमिली से ही थे। आम लोगों को मंत्री बना दिया गया। यह सऊदी अरब में पहली बार हुआ था।

जब शाह सऊद को इस बारे में पता चलता है। वह बिगड़ जाता है। कहता है, कि अभी भी मैं ही राजा हूं। मेरी मर्जी के बगैर कैबिनेट की कोई मीटिंग नहीं होनी चाहिए। उसमें मंत्रियों का जो सिलेक्शन किया है। वह भी मेरी मर्जी से होना चाहिए। Shah Faisal को शाही परिवार की सपोर्ट थी। इसलिए कुछ नहीं हुआ।

Shah Faisal का बादशाह बनना-

इसके के बाद शाह सऊद मिश्र चले जाते हैं। रेडियो पर Shah Faisal के खिलाफ बोलना शुरू कर देते हैं। इससे Shah Faisal, शाह सऊद को बेदखल करके सऊदी अरब के नए बादशाह बन जाते हैं। बादशाह बनने के बाद सबसे पहले जो काम करते हैं। वह यह था कि अपने भाई शाह सऊद की नागरिकता सऊदी अरब से खत्म कर देते हैं। उनको देश बदर कर दिया गया। 1964 को शाह फैसल सऊदी अरब के बादशाह बन जाते हैं।

बादशाह बनने के बाद इनके जरूरी काम थे। यह उनको पूरा कर रहे थे। कहते हैं, कि सऊदी अरब Shah Faisal के वक्त में ही सबसे ज्यादा तरक्की के रास्ते पर चला। कई सारे ऐसे फैसले लिए जिससे सऊदी अरब की आर्थिक स्थिति भी सही हुई।

इसी दौरान 1973 में जब इजराइल और सऊदी अरब की जंग छिड़ी थी। अमेरिका, इजरायल का साथ दे रहा था। इस बात से नाराज Shah Faisal ने अमेरिका के साथ जो भी ने ताल्लुक जोड़े थे। वह खत्म कर दिए। सऊदी अरब ने अमेरिका को तेल की सप्लाई रोक दी थी। तेल की सप्लाई रुकने के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब पर हमला करने की धमकी दी थी। तब शाह फैसल ने ही अमेरिका को कहा था। हम जंग से नहीं डरेंगे “हम वह लोग हैं, जो रेगिस्तान में खजूर और पानी के ऊपर भी जिंदा रह सकते हैं।” मगर आप तेल के बिना नहीं रह सकते।

King Faisal का Murder-

25 मार्च 1975 को शाहपुरा सन रियाद में अपने शाही महल में थे। वहीं पर दरबार लगाया करते थे। लोगों की फरियाद सुना करते थे। यह उन्होंने अपने वालिद से सीखा था। 25 मार्च 1975 को रियाद में दिन में ही Shah Faisal अपने महल में थे। उनको लोगों से मिलना था। कुछ लोग कतर से आए हुए थे।  उनको उनसे भी मिलना था। यह सारी मुलाकाते होनी थी। Shah Faisal दरबार में आते हैं। लोगों से बातें सुनते हैं। फिर कतर के जो लोग आए हुए थे।

उनसे मिलने के लिए आगे बढ़ते हैं। उन्हीं लोगों के पीछे उनका अपना भतीजा खड़ा हुआ था। उस भतीजे का नाम भी फैसल ही था। Prince Faisal जब दरबार में आया। आमतौर पर शाही परिवार के भी काफी लोग दरबार में आया करते थे। यह कोई हैरत वाली बात नहीं थी। वह कुछ ही दिन पहले अमेरिका से लौटा था। कतर के डेलिगेशन के साथ ही Shah Faisal की नजर अपने भतीजे पर पड़ती है। जो उनके सौतेले भाई का बेटा था।

शाही परिवार में एक रिवाज था। अपने बड़े आदमी को इज्जत देने के लिए। उनके पेशानी चूमते थे। जब Shah Faisal चूमने के लिए अपने सर को आगे बढ़ाते हैं। प्रिंस फैसल के पास एक पिस्टल थी। वह अपनी पिस्टल निकालता है। एक साथ तीन गोली चला देता है। पहले गोली Shah Faisal के चेहरे पर लगती है। दूसरी गोली कान के पास लगती है। तीसरी गोली निकल जाती है। गोली लगते ही Shah Faisal जमीन पर गिर पड़ते हैं। जब तक उनके गार्ड थे वह आगे आते हैं। उनमें से एक मंत्री चिल्लाता है, कि प्रिंस फैसल को मारो मत उसको जिंदा पकड़ना है। Shah Faisal को फौरन हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर शाह फैसल को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं। मगर कुछ देर के बाद उनकी मौत हो जाती है।

Shah Faisal का कातिल-

अब वहां के जो हो शाही गार्ड थे। वह Prince Faisal से पूछताछ करते हैं। पूछताछ करने के बाद जो पहली चीज थी। वह बड़ी हैरान करने वाली थी। Prince Faisal से पूछताछ करने के बाद यह राय बनती है। इसकी दिमागी हालत सही नहीं है। इसलिए इसको माफ कर दिया जाए। सऊदी शाही परिवार में एक कानून है। अगर किसी की दिमागी हालत सही नहीं है। उसके ऊपर मुकदमा नहीं चला सकते। उसको सजा नहीं दी जा सकती।

मगर शाही परिवार के ही कुछ लोग यह मानने को तैयार नहीं थे। इसके बाद एक मेडिकल टीम का गठन किया गया। मेडिकल टीम ने प्रिंस फैसल की पूरी तरीके से जांच की। जांच करने के बाद यह पाया कि यह पूरे तरीके से सही है। जब महल के अंदर इसने गोली चलाई। उसे मालूम था की गोली कहां चलानी है। उसने सही जगह पर गोली चलाई थी। दूसरी गोली भी अपने सही निशाने पर ही चलाई थी।

गोली चलाने के बाद वह आराम से खड़ा हो गया। यह ऐसे था कि जैसे सब कुछ पलानिंग के साथ किया गया हो। पिछली भी काफी चीजें उसकी निकाली गई। मेडिकल बोर्ड और डॉक्टर की टीम ने अपनी रिपोर्ट दी। यह कहा Prince Faisal दिमागी तरीके से बिल्कुल सही है। इस पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

Prince Faisal को मौत की सजा-

इसके बाद उस पर मुकदमा चलाया जाता है। प्रिंस फैसल को गुनहगार साबित किया जाता है। सऊदी अरब का जान के बदले जान लेने का कानून काफी पहले से है। Prince Faisal को मौत की सजा सुना दी गई। 18 जून को यह फैसला हुआ था। 18 जून की दोपहर को बाकायदा पूरे रियाद में लाउडस्पीकर पर यह ऐलान किया गया। King Faisal के Murder के इल्जाम में प्रिंस फैसल को मौत की सजा दी गई है। Shah Faisal के बाद शाह खालिद वहां के बादशाह बने। उन्हीं के पास यह इख़्तियार है, कि वह इस को सजा दे या माफ कर दे। वहां का आखिरी फैसला माना जाता है। किंग खालिद ने भी अदालत के इस फैसले को माना। प्रिंस फैसल की मौत की सजा को बरकरार रहने को कहा गया।

इसके बाद प्रिंस फैसल को करीब 4:30 बजे रियाद में गवर्नर पैलेस के करीब सजा-ए-मौत देने का फैसला हुआ। लोगों से कहा गया कि आप बड़ी तादाद में वहां पर पहुंचे करीब 10000 आम लोग वहां पर पहुंचे।

King Faisal के Murder का बदला-

शाही परिवार का सिर्फ एक शख्स इस मौत को देखने के लिए वहां पर पहुंचा था। जो Shah Faisal के ही भाई थे। 10000 लोगों की मौजूदगी में सर कलम करने वाला शख्स आता है। प्रिंस फैसल का एक झटके में ही सर कलम कर देता है। उसके सर को उठा कर वही तख़्त पर रख दिया गया। घंटो तक लोगों ने उसको देखा। फिर एंबुलेंस में उस सर और कटे हुए धड़ को रखा गया। उसको ले जाकर दफन कर दिया गया। King Faisal Murder का बदला इस तरीके से पूरा किया गया।

Shah Faisal की मौत पर सवाल-

मगर सबसे बड़ा सवाल मौजूद था।  प्रिंस फैसल ने अपने चाचा को क्यों मारा। प्रिंस फैसल एक पढ़ा-लिखा लड़का था। उसने अमेरिका से तालीम हासिल की थी। अमेरिका की दो अलग-अलग यूनिवर्सिटी से तालीम हासिल की थी। उसके बाद वह सऊदी अरब लौटकर बाकायदा वहां की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाता है। फिर उसने यह कत्ल क्यों किया। इसकी पूरी जांच की गई। इसमें दो तीन चीजें सामने आए। पहली यह कि प्रिंस फैसल जब अमेरिका में रह रहा था। उसको वहां पर ड्रग्स के साथ पकड़ा गया था। ड्रग्स और अल्कोहल को लेकर उस पर हमेशा इल्जाम लगते रहे।

जब Shah Faisal सऊदी अरब को तरक्की की राह पर ले जाना चाहते थे। उन्होंने शाही परिवार के जो लोग थे। उनके खर्चे में कटौती कर दी थी। जो शाह सऊद के दौर में फिजूलखर्ची हो रही थी। इससे बहुत सारे शाही परिवार के लोग नाराज थे। उनमें से एक प्रिंस फैसल भी था। नंबर दो जब प्रिंस फैसल अमेरिका से वापस लौटता है। उसका पासपोर्ट ले लिया जाता है। यह Shah Faisal की वजह से ही था। उसको कहा गया था कि यह बाहर ड्रग्स और अल्कोहल की वजह से जाता है। इसके बाहर जाने पर भी रोक लगा दी जाए। पासपोर्ट ना मिलने और सऊदी से बाहर ना जाने का  गुस्सा भी Prince Faisal के अंदर था।

जिस वक्त सऊद किंग और Shah Faisal वजीरे आजम थे। जब तख्ता पलट हुआ था। उस वक्त Shah Faisal की लड़की की शादी प्रिंस फैसल से होनी थी। मगर तख्ता पलट की वजह से यह शादी टल गई। वो इस वजह से भी नाराज था।

क्या सऊदी KING SHAH FAISAL के क़त्ल के पीछे CIA का हाथ था?

कुछ और रिपोर्ट भी आई। जिसमें कहा गया कि, अमेरिका का तेल Shah Faisal नहीं रोका था। अमेरिका के साथ उसके रिश्ते अच्छे नहीं थे। इजराइल के साथ पहले ही जंग लड़ चुके थे। यह प्रिंस फैसल जब अमेरिका में था। अमेरिका के काफी नजदीक था। यह चाहता था, कि अमेरिका और इजरायल के साथ सऊदी अरब के अच्छे रिश्ते बन जाए। इसके लिए CIA और Mossad प्रिंस फैसल का इस्तेमाल कर रही थी। इसमें यह भी शक किया जाता है। King Faisal के Murder के पीछे CIA और Mossad का हाथ था। प्रिंस फैसल उसका मोहरा बना। लेकिन यह कभी साबित नहीं हो पाया।

एक और अहम चीज बाद में सामने आई। प्रिंस फैसल की माँ ने यह बताया। King Faisal के Murder से पहले प्रिंस फैसल ने अपनी मां से एक बार कहा था। मैं अपने चाचा को मार दूंगा। कहते हैं, कि प्रिंस फैसल की माँ ने Shah Faisal को यह बात बताई थी। मुझे डर है, कि वह ऐसे-ऐसे कह रहा था। आपके साथ कुछ हो सकता है। तब Shah Faisal ने पलट कर यह जवाब दिया था। अगर अल्लाह की यही मर्जी है, तो फिर मुझे कोई नहीं बचा सकता। उसके बाद इस बात को खत्म कर दिया गया। फिर वही हुआ जो प्रिंस फैसल की माँ ने कहा था।

आज भी सऊदी अरब के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है, कि इस क़त्ल के पीछे क्या वजह थी। क्या प्रिंस फैसल ने खुद जाति तौर पर यह कत्ल किया था। या CIA और Mossad के कहने पर उसने King Faisal का Murder किया।