Purulia Arms Drop Part-2, सवाल ये था की ये जो हवाई जहाज था ये हथियार कैसे लाया इसकी जाँच की गयी तो पता चला की ये एक कार्गो प्लैन था। जो एक माल ढोने वाला प्लैन होता है और ये जहाज रूस का बना हुआ था और बुल्गारिया से ख़रीदा हुआ था। पहली बार इसने बुल्गारिया से उड़ान भरी वहाँ से उड़ान भरने के बाद ये टर्की गया वहाँ से ईरान, ईरान से कराची गया। कराची होते हुए भारत की वायु सीमा में दाखिल होता है। बनारस में ये जहाज तकरीबन 8 घंटे तक खड़ा रहा। उसके बाद ये ईंधन लेने के बाद पश्चिम बंगाल के लिये उड़ान भरता है और पुरलिया में पैराशूट के जरिये बॉक्स गिराता है। इसके बाद ये जहाज कोलकाता पहुँचता है। कोलकाता से ये थाईलैंड जाता है और थाईलैंड से जब कराची जा रहा था तब इसे मुंबई में पकड़ा गया।

Kim Davy जो की इस का मैंन आदमी था जो पकड़ा नहीं गया इस पर सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। PV Narsimha Rao उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री थे। इसके बाद इसकी जाँच सीबीआई को शॉप दी गयी । सीबीआई ने जाँच के बाद जो रिपोर्ट दी उसके मुताबिक ये सारे हथियार आनंद मार्गी के लोगो के लिये थे। आनंद मार्गी एक धार्मिक संस्था है। वामपंथी सरकार जो उस वक्त पश्चिम बंगाल में थी उनका 36 का आंकड़ा था। दुनिया भर के कई देशो में इनके आश्रम है। सीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कहा गया की आनंद मार्गी का जो मुख्यालय है वो पुरुलिया में है और पुरुलिया में ही हथियार गिराए गये।

इसमें पहलू-

  1. इनको सरकार के खिलाफ हथियार चाहिए थे।
  2. इनका मुख्यालय वहां पर था।

MI6 का जो एजेंट पकड़ा गया था उसने हथियारों की जो तादाद बताई थी और जो हथियार मिले थे उनकी तादाद में काफी फर्क था। मतलब ये थे की जो हथियार ऊपर से गिराए गये उनमे से काफी काम हथियार मिले थे तो बाकी के हथियार आनंद मार्गी के लोग ले गये। हालाँकि सीबीआई की इस रिपोर्ट को अदालत के सबूतों के अभाव में ख़ारिज कर दिया तो फिर ये था की ये हथियार किसके लिये थे इसपर काफी थ्योरी सामने आई।

  1. पहली ये की बांग्लादेश में कुछ उग्रवादी लोग थे ये उनके लिये थे हथियार को बांग्लादेश में गिराना था मगर पायलट की गलती से पुरुलिया में गिरा दिए गये।
  2. दूसरी ये की ये अमेरिका ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की करतूत थी। सीआईए ने असल में ये हथियार म्यांमार में काचेन विद्रोहियों के लिये भेजे थे।
  3. तीसरी ये की ये श्रीलंका में LTT जो काम कर रही थी उसके लिये थे।

लेकिन इस साड़ी थ्योरी को लेकर कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया।

इसके बाद भारत सरकार पर भी ऊँगली उठी उसकी वजह ये थी की ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी का दावा था की भारत सरकार को इस की जानकारी थी। उसके बाद हंगामा हुआ की जब आपको ये जानकारी थी तो आपने पश्चिम बंगाल की सरकार को ये जानकारी क्यों नहीं दी। ब्रिटिश एजेंसी के मुताबिक ये सारे हथियार लेफ्ट सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिये थे। जिससे वहाँ हिंसा कराकर राष्ट्रपति शासन लगाकर दोबारा चुनाव कराये जाये। ये सारी बात खुद Kim Davy ने बताई । 2011 में Kim Davy ने एक इंटरव्यू दिया और कहा Purulia Arms Drop के बारे में RAW,IB और भारत सरकार को जानकरी थी। उसने ये भी कहा की एक विदेशी जहाज भारत की वायु सीमा में दाखिल हो पता न चले।

इसके लिये इंतजाम किया गया था की सभी राडार को मेंटेनन्स पर लगा दिया जाये और जहाज पकड़ा न जाये। Kim Davy ने ये भी कहा हथियार पश्चिम बंगाल में हिंसा के लिये इस्तेमाल होने थे।

इसमें सीबीआई ने काफी कोशिस की के किम को भारत लाकर उस पर मुकदमा चलाया जाये। इस पर डेनमार्क ने दो शर्ते रखी थी।

  1. Kim Davy को फांसी की सजा नहीं होगी।
  2. उसे जो भी सजा होगी वो डेनमार्क में भुगतेगा।

लेकिन डेनमार्क के इस फैसले के खिलाफ Kim Davy ने वहाँ के कोर्ट में अपील की और कोर्ट ने Kim Davy को सौंपने से मना कर दिया। सीबीआई ने फिर कोशिस की मगर कोर्ट ने साफ़ इंकार कर दिया और कहा हर चीज की एक टाइम लिमिट होती जो की काफी वक्त गुजर चूका है। इस पर भी सीबीआई पर सवाल उठे थे।

जब नरेंद्र मोदी की सरकार आई तो उन्होंने डेनमार्क से गुजारिश की के Kim Davy को भारत को सौंप दे लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। कहते की की Kim Davy एक ऐसा शख्स है जो बता सकता है पुरुलिया आर्म्स ड्राप का क्या सच है। लेकिन वो डेनमार्क में है, अगर उसकी मौत हो जाती है तो ये एक राज ही रहेगा । कहते है की इसमें कई देशो की ख़ुफ़िया एजेंसी भी  शामिल थी। इस पर भारत सरकार पर भी ऊँगली उठी थी।

लेकिन आज 25 साल बाद भी ये एक राज ही है?………….

Purulia Arms Drop Part-1

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